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अमेरिका ने सऊदी अरब के MBS को क्यों हड़काया, इसमें UAE का एंगल क्या है?

अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस को कड़ी फटकार लगाई है। उन्होंने कहा कि मैं बकवास से तंग आ चुका हूं। सऊदी अरब को यह सब बंद करना होगा।

Donald Trump and Mohammed bin Salman

डोनाल्ड ट्रंप और मोहम्मद बिन सलमान। ( Photo Credit: Social Media)

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सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच बढ़ते तनाव का मामला अमेरिका तक पहुंच गया है। यमन से सूडान तक दोनों देशों के बीच तनाव है। यमन में दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद (STC) को समर्थन करने के बाद यूएई और सऊदी अरब के रिश्ते सबसे अधिक बिगड़े हैं। अब दोनों देशों के बीच इजरायल के मामले में तनाव बढ़ गया है। 

 

यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद (MBZ) पर 'जायोनिस्ट' होने का आरोप लगाया है। यह भी दावा किया गया कि यूएई ने इजरायल समर्थक समूहों पर दबाव डाला कि वे सऊदी अरब के खिलाफ यहूदी-विरोधी होने का आरोप मढ़े। अब पूरे मामले में डोनाल्ड ट्रंप के बेहद करीबी लिंडसे ग्राहम ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को कड़ी फटकार लगाई है।

 

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लिंडसे ग्राहम ने साफ तौर पर यूएई का पक्ष लिया। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब को यूएई के साथ झगड़ा बंद करना चाहिए। म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में ग्राहम ने कहा, 'सऊदी अरब, यह सब बंद करो। मैं इस बकवास से तंग आ चुका हूं। एमबीजेड जायोनिस्ट नहीं है। इस संघर्ष से आप ईरान को बढ़ावा दे रहे हैं।' ग्राहम की इस नाराजगी को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। वे ट्रंप के बेहद करीबी हैं। उनकी सलाह पर ट्रंप कई बड़े फैसले भी ले चुके हैं।

ग्राहम क्यों नाराज हैं?

सयुंक्त अरब अमीरात और इजरायल के बीच घनिष्ठ संबंध है। सऊदी अरब को यही बात पसंद नहीं है। वह इजरायल के साथ यूएई के रिश्ते को खतरे के तौर पर देख रहा है। इजरायल से नजदीकी के कारण ही सऊदी अरब यूएई पर जायोनिस्ट होने का आरोप लगाया है। इसी बात से ग्राहम बेहद खफा हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि एमबीजेड जायोनिस्ट नहीं है। बता दें कि संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद को एमबीजेड के नाम से भी जाना जाता है।

 

उधर, यूएई ने सऊदी अरब पर यहूदी विरोधी भावना भड़काने का आरोप लगाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यूएई ने अबू धाबी स्थित अमेरिकन ज्यूइश कमेटी से संपर्क किया। उस पर सऊदी अरब की यहूदी विरोधी भावना की निंदा करने का दबाव बढ़ाया। लिंडसे ग्राहम का इजरायल का कट्टर समर्थक माना जाता है। अब उनके इसी बयान को सऊदी पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

 

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सूडान: यूएई सूडान में वहां के अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) का समर्थन करता है, जबकि सऊदी अरब सूडान आर्मी के साथ खड़ा है। हाल ही में सऊदी अरब ने मिस्र के साथ मिलकर लीबिया के खलीफा हफ्तार पर संयुक्त अरब अमीरात से संबंध तोड़ने का आरोप लगाया है। सूडान के मोर्चे पर यूएई काफी हद तक अलग थलग पड़ गया है।

 

सोमालीलैंड: सऊदी अरब सोमालिया के साथ खड़ा है। उसे मिस्र और तुर्की का भी समर्थन है। यूएई सोमालीलैंड के साथ खड़ा है। उसे इजरायल का समर्थन है। सऊदी अरब ने सोमालिया पर भी यूएई से रिश्ते तोड़ने का दबाव बढ़ाया। इसके सोमालिया ने यूएई के साथ कई समझौतों को तोड़ दिया। सऊदी अरब यहीं पर ही नहीं रुका। उसने मिस्र और सोमालिया के साथ एक क्षेत्रीय सैन्य संगठन बनाने की कवायद में जुटा है।

 

यमन: सऊदी अरब और यूएई के बीच सबसे खराब स्थिति पिछले साल यमन में देखने को मिली। रियाद ने अबू धाबी पर एसटीसी का समर्थन करने आरोप लगाया। एसटीसी दक्षिण यमन को अलग देश बनाना चाहता है। सऊदी अरब इसके खिलाफ है। उसे लगता है कि लाल सागर के तट पर नया देश उसकी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा होगा। सऊदी अरब के दबाव के बाद यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार ने यूएई के साथ अपने रिश्ते तोड़ दिए।

 

यूएई चिंतिंत क्यों: सऊदी अरब अब हर मोर्चे पर यूएई के खिलाफ मुस्लिम देशों को लामबंद करने में जुटा है। सूडान, लीबिया, सोमालिया और यमन में काफी हद तक उसे सफलता भी मिली है। उधर, पाकिस्तान के साथ नए सैन्य समझौते ने भी यूएई की टेंशन बढ़ाई है। अबू धाबी ने पाकिस्तान के साथ बातचीत करने और समान रिश्ते की अपील की। मगर पाकिस्तान का सैन्य नेतृत्व खुलकर सऊदी अरब के साथ है। यही कारण है कि हाल ही में अबू धाबी ने पाकिस्तान के खिलाफ कई सख्त फैसले लिए हैं।

 

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