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हमारी-आपकी बातें चुरा रहा WhatsApp? मेटा पर मुकदमा हो गया

एक शिकायकर्ता ने आरोप लगाया है कि मेटा और व्हाट्सऐप, निजी बातचीत सुन सकते हैं। क्यों मेटा मुश्किलों में घिरा है, चिंताएं क्या हैं, पढ़िए रिपोर्ट।

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WhatsApp। AI Image. Photo Credit: PTI

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व्हाट्सऐप को लेकर मार्क जुकरबर्ग की कंपनी मेटा एक बार फिर कानूनी पचड़े में फंसती नजर आ रही है। दुनिया के कई देशों के एक समूह ने मेटा प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ केस दायर किया है। आरोप हैं कि कंपनी ने यूजर्स की गोपनीयता के साथ धोखाधड़ी की है, अरबों व्हाट्सऐप यूजर्स को उनके मैसेज की प्राइवेसी के बारे में गुमराह किया गया है, एनक्रिप्शन के झूठे दावे किए गए हैं।

सैन फ्रांसिस्को में एक अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में दायर मुकदमे में कहा गया है कि व्हाट्सऐप के बारे में कहा जाता है कि दो लोगों के बीच होने वाली बातचीत 'एंड-टू-एंड' एन्क्रिप्टेड हैं लेकिन यह धोखा है। मैसेज सुरक्षित नहीं है, डेटा लीक किया जा रहा है। मेटा, प्राइवेसी का उल्लंघन करके व्हाट्सऐप चैट्स देख सकता है। मेटा ने इन आरोपों को गलत गया है और कहा है कि ऐसे मुकदमे बुनियाद हैं।  


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 व्हाट्सऐप किस वादे पर घिर गया है?

व्हाट्सऐप, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का वादा करता है। इसका मतलब है कि दो यूजर के बीच होने वाली बातचीत, कंपनी खुद नहीं देखती है, कोई तीसरा शख्स भी नहीं देख सकता है। कंपनी की इस मामले में साफ नीति है कि किसी भी स्थिति में डेटा लीक नहीं होने दी जा सकती है। मेटा भी,  व्हाट्सऐप पर दो यूजर के बीच हुई बातचीत को नहीं पढ़ सकता है। 

व्हाट्सऐप यूज़र्स से क्या वादा करता है?

एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन व्हाट्सऐप की प्राइवेसी का अहम हिस्सा रहा है। मेटा का कहना है कि मैसेज भेजने वाला और रिसीव करने वाला ही इसे पढ़ सकता है, खुद मेटा या व्हाट्सऐप भी इसे नहीं पढ़ या सुन नहीं सकता है। यह फीचर, बाय डिफॉल्ट है। 

क्यों गोपनीयता पर आया है खतरा?

मेटा और व्हाट्सऐप यूजर के कथित तौर पर 'प्राइवेट' कम्युनिकेशन को स्टोर, एनालाइज और एक्सेस कर सकते हैं। मुकदमे में कंपनियों और उनके लीडरशिप पर व्हाट्सऐप को एक प्राइवेट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के रूप में मार्केटिंग करके दुनिया भर के यूज़र्स को धोखा देने का आरोप लगाया गया है। 

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किन देशों के समूह ने आरोप लगाया है?

भारत, मेक्सिको, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील के यूजर्स के एक समूह ने यह याचिका दायर की है। याचिकार्ताओं का दावा है कि मेटा यूजर कम्युनिकेशन के कंटेंट को स्टोर करता है और कंपनी के कर्मचारी उन मैसेज को एक्सेस कर सकते हैं। फाइलिंग में उस शख्स का भी जिक्र है, जिसने पहली बार मेटा की डेटा पॉलिसी की पोल खोली है। शिकायत में उस शख्स की पहचान छिपाई गई है।

मेटा का क्या कहना है?

मेटा ने इन आरोपों से इनकार किया है। मुकदमे को गलत बताया है। कंपनी ने कहा है कि साल 2014 में व्हाट्सऐप का अधिग्रहण हुआ था। यह केस झूठा और बेतुका है। वादी के वकील के खिलाफ अब कंपनी केस दायर करेगी। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक मेटा के प्रवक्ता एंडी स्टोन ने कहा, 'व्हाट्सऐप मैसेज एन्क्रिप्टेड नहीं हैं, यह दावा पूरी तरह से गलत और बेतुका है। व्हाट्सऐप पिछले एक दशक से सिग्नल प्रोटोकॉल का उपयोग करके एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड है। यह मुकदमा एक बेतुकी मनगढ़ंत कहानी है।'

किन लोगों ने शिकायत की है?

इस शिकायत में क्विन इमैनुएल अर्क्हार्ट एंड सुलिवन और केलर पोस्टमैन फर्मों के वकील और कुछ सदस्य शामिल हैं। अब यह समूह कवायद कर रहा है कि दूसरे देशों के प्रतिनिधि भी इस रेस में शामिल हों, जिससे मेटा पर दबाव बनाया जा सके।

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