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रेस्क्यू में दूसरे देशों की मदद नहीं लेगा नेपाल, वजह 2015 का भूकंप कैसे है?

नेपाल में चीन सीमा के पास बाढ़-भूस्खलन के बाद कई देशों ने सर्च-रेस्क्यू टीम भेजने की पेशकश की लेकिन नेपाल ने इसे ठुकरा दिया। इसकी वजह 2015 का गोरखा भूकंप के अनुभव को माना जा रहा है।

Why Nepal not accept help from other countries in rescue

धादिङ में लोगों को निकालते नेपाल रेस्क्यू टीम, Photo Credit: PTI

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नेपाल में चीन सीमा के पास आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद कई देशों ने राहत और बचाव के लिए अपनी सर्च एंड रेस्क्यू टीमें भेजने की पेशकश की है। हालांकि, नेपाल सरकार ने फिलहाल विदेशी बचाव दलों की मदद लेने से इनकार कर दिया है। सरकार का कहना है कि उसकी सेना, पुलिस और दूसरी सुरक्षा एजेंसियां राहत और बचाव अभियान संभालने में सक्षम हैं।

 

बाढ़ और भूस्खलन में अब तक 472 लोगों की मौत होने की खबर है, जबकि 1500 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। राहतकर्मी मलबे और कीचड़ में लोगों की तलाश कर रहे हैं। इस बीच, चट्टानों और बर्फ के कारण नदियों का रास्ता रुकने से नए जलाशय बन गए हैं, जिससे आसपास के इलाकों में एक और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

 

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भारत समेत कई देशों ने की थी मदद की पेशकश

नेपाल को भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और बांग्लादेश समेत कई देशों ने अपने खोज और बचाव दल भेजने की पेशकश की थी। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री ने कहा, 'मदद की पेशकश करना स्वाभाविक है। हमारी सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। फिलहाल हमें इस तरह की मदद की जरूरत नहीं है।'

 

हालांकि, नेपाल ने मानवीय सहायता लेने से इनकार नहीं किया है। भारत ने भारतीय वायुसेना की दो उड़ानों के जरिए 47.5 टन राहत सामग्री भेजी है। इसमें टेंट, कंबल, दवाइयां, भोजन और जनरेटर जैसी जरूरी चीजें शामिल हैं। भारत राहत अभियान के लिए बेली ब्रिज भेजने की भी तैयारी कर रहा है।

 

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नेपाल ने विदेशी मदद क्यों ठुकराई?

विदेशी रेस्क्यू टीमों को नहीं बुलाने के फैसले के पीछे 2015 के गोरखा भूकंप का अनुभव अहम माना जा रहा है। नेपाली अधिकारियों के मुताबिक, उस दौरान बड़ी संख्या में विदेशी बचाव दल नेपाल पहुंचे थे। अलग-अलग टीमों के बीच तालमेल बनाने में दिक्कत आई थी। इस बार सेना और पुलिस की सिफारिश पर नेपाल ने घरेलू एजेंसियों के जरिए ही अभियान चलाने का फैसला किया है। आपको बता दें कि 2015 के विनाशकारी भूकंप में करीब 9,000 लोगों की मौत हुई थी और 23,000 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

विदेशी नागरिकों की तलाश के लिए टीम गठित

बाढ़ में कई विदेशी नागरिकों के लापता होने की खबर है। इसे देखते हुए नेपाल के विदेश मंत्रालय ने इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (ERT) बनाई है। यह टीम विदेशी नागरिकों की तलाश, बचाव और उनके परिवारों को जानकारी देने का काम करेगी। नेपाल पुलिस के अनुसार, 290 भारतीय, 65 अमेरिकी, 51 मलेशियाई, 53 यूक्रेनी, 33 ब्रिटिश, 35 ऑस्ट्रेलियाई और 25 कनाडाई नागरिक लापता हैं। वहीं, चीन ने भी कम से कम 100 नागरिकों के संपर्क से बाहर होने की जानकारी दी है। दूसरी ओर, रसुवागढ़ी के पास बने नए जलाशय में पानी बढ़ने से नेपाल और चीन के अधिकारी बाढ़ के एक और खतरे पर नजर बनाए हुए हैं।


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