बांग्लादेश की राजधानी ढाका और देश के कई हिस्सों में लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। लोगों का आरोप है कि पलाशबाड़ी में एक जुलूस के दौरान भगवान राम की तस्वीर पर जूते फेंके गए थे। साथ ही राधा-गोबिंद मंदिर में भगवान राम की मूर्ति तोड़ने की धमकी भी दी गई थी। इस घटना के विरोध में हजारों हिंदू लोग सड़कों पर उतर आए और आंदोलन शुरू कर दिया। लोगों ने सरकार से मांग की है कि इस शर्मनाक हरकत को अंजाम देने वालों को सख्त सजा दी जाए।
यह विरोध प्रदर्शन शुक्रवार रात को शुरू हुआ था। इसके बाद शनिवार को हजारों लोग प्रदर्शन में शामिल हुए, जिसके चलते मामला गंभीर रूप लेता गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ भी नाराजगी जताई। लोगों का कहना है कि सरकार अल्पसंख्यकों की धार्मिक आस्था की रक्षा करने में विफल रही है, साथ ही अब तक आरोपियों को सजा भी नहीं दिला पाई है।
यह भी पढ़ें: 16 साल से कम उम्र के बच्चे नहीं यूज कर पाएंगे सोशल मीडिया, ब्रिटेन PM का फैसला
हिंदू संगठनों ने किया विरोध प्रदर्शन
इस घटना को लेकर बांग्लादेश पूजा उद्जापन परिषद ने भी प्रदर्शन किया। उनके साथ बौद्ध और ईसाई संगठनों के सदस्य भी शामिल हुए। इस मामले पर हिंदू संगठनों का कहना है कि इस घटना ने लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, जो बिल्कुल भी उचित नहीं है। इन संगठनों ने ढाका प्रेस क्लब के सामने प्रदर्शन किया, जहां हिंदू संगठनों के नेताओं ने घटना की निंदा की। साथ ही पूरे देश को संदेश दिया कि इस तरह की घटनाएं सांप्रदायिक मतभेद बढ़ाती हैं।
विरोध प्रदर्शन में शामिल एक व्यक्ति ने कहा, 'हम इस देश के नागरिक हैं, हम यहां के प्रवासी नहीं हैं। बांग्लादेश के निर्माण में हमने भी खून बहाया है। हमारे पूर्वजों के बलिदान से ही यह देश बना है। इसलिए अब हमें देश में हो रही बुराइयों को रोकना होगा।'
यह भी पढ़ें: पहले किडनैप किया, फिर रेप..., लंदन में भारतीय को 34 साल की सजा
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने मांग की कि जुलूस के दौरान हुई घटना पर तुरंत कार्रवाई की जाए और आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए। फिलहाल इस मामले में किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।