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क्या सऊदी अरब को सैन्य मदद देकर हूतियों के साथ संघर्ष में उलझ जाएगा तुर्की?

सऊदी अरब को तुर्की सैन्य मदद देने को तैयार है। मगर अभी तक यह साफ नहीं है कि सैन्य मदद का स्वरूप क्या होगा? यह रक्षात्मक होगा या आक्रामक। यही तय करेगा कि हूती विद्रोहियों के साथ अंकारा का रिश्ता कैसा होगा?

Saudi Arabia-Turkey relations

ईरान के खिलाफ तुर्की के कदम। (Photo Credit: Social Media)

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अमेरिका और ईरान की जंग में तुर्की लंबे समय तक तटस्थ रहा। मार्च महीने में ही चार बार तुर्की के एयरस्पेस में ईरानी बैलेस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया गया, तब भी कोई कड़ी प्रतिक्रिया नहीं दी। उस वक्त तुर्की ने सिर्फ संयम बरतने और उकसावे की हरकत न करने का अनुरोध किया।

 

मगर मामला अब बिगड़ता दिख रहा है। हूती विद्रोहियों के खिलाफ तुर्की ने सऊदी अरब को सैन्य सहायता देने की बात कही है। हूती विद्रोहियों ने तुर्की और पाकिस्तान को सऊदी अरब मामले में दूर रहने की चेतावनी दी। इसके बाद से ही आशंका जताई जा रही है कि अगर रियाद को सैन्य सहायता भेजी गई तो अंकारा भी संघर्ष का हिस्सा बन सकता है।  

 

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तुर्की के साथ संघर्ष छिड़ने की सिर्फ एक यही वजह नहीं है। हाल ही में अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव में अंकारा ने ईरान की महान एयरलाइन और एक बैंक के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। तुर्की के इस कदम को ईरान सही नहीं मान रहा है। आइये समझते हैं कि अंकारा कैसे संघर्ष में घसीटा जा सकता है। उसने हाल ही में ईरान के खिलाफ कौन-कौन से कदम उठाए हैं। सऊदी अरब को उसने क्या भरोसा दिया है?

 

तुर्की मीडिया से बातचीत में तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा कि तकनीकी मुद्दों पर अंकारा रियाद को सहायता दे सकता है। ऐसा करने में हमें कोई समस्या भी नहीं है। उन्होंने कहा कि हूतियों के लगातार हमलों के कारण सऊदी अरब को सैन्य आवश्यकताओं की जरूरत पड़ सकती है और रियाद और इस्लामाबाद के साथ अपने रक्षा समझौते के तहत अंकारा सहायता प्रदान करने को तैयार है।

 

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि तुर्की की यह सहायता रक्षात्मक या आक्रामक दोनों तरह की हो सकती है, लेकिन इस बात की संभावना बेहद कम है कि तुर्की प्रत्यक्ष तौर पर अपनी सेना भेजेगा। सऊदी अरब ने अमेरिका से सैन्य सहायता मांगी थी, लेकिन खुफिया जानकारी के अलावा उसके हाथ बहुत कुछ नहीं लगा है। इस स्थिति में वह तुर्की निर्मित सैन्य साजो सामान पर अपनी निर्भरता बढ़ा सकता है। हूतियों के खिलाफ रियाद तुर्की के ड्रोनों का इस्तेमाल कर सकता है। एयर डिफेंस और रडार सिस्टम भी तैनात किए जा सकते हैं।

 

आशंका यह है कि अगर हूती विद्रोहियों के खिलाफ तुर्की के हथियारों का इस्तेमाल हुआ तो अंकारा भी सीधे संघर्ष की चपेट में आ सकता है। हूती विद्रोही तुर्की और पाकिस्तान को अपने खिलाफ रियाद का सहयोगी मान सकते है, जैसा कि मक्का समझौते से एकदम स्पष्ट भी है।

 

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कुछ मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि सऊदी अरब हूती विद्रोहियों पर जमीन, हवा और पानी तीनों मोर्चे से बड़ा हमला प्लान कर रहा है। इसमें तुर्की और पाकिस्तान की भी मदद ली जा सकती है। लेकिन सबसे दिलचस्प पहलू यह होगा कि ईरान कब तक संयम दिखाएगा। हूती विद्रोहियों पर हमले को कब तक सहेगा, क्योंकि हूती विद्रोहियों पर हमले को सहने की तेहरान की एक सीमा है। 

ईरान के खिलाफ तुर्की के कदम?

बैंक का लाइसेंस रद्द: अमेरिका प्रतिबंध के डर से तुर्की ने ईरान के सबसे बड़े निजी बैंक में से एक बैंक मेल्लत का लाइसेंस रद्द कर दिया है। ईरान की इस बैंक पर अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय यूनियन ने प्रतिबंध लगा रखा है। बैंक का मुख्यालय तेहरान में है। अंकारा और इस्तांबुल में इसकी ब्रांच हैं। ईरान की सरकार बैंक की सबसे बड़ी शेयरधारक है। 2019 में अमेरिका ने बैंक मेल्लत को आईआरजीसी से जुड़े 25 संगठनों में से एक माना था। अब तुर्की के इस कदम को सीधे तौर पर ईरान की सरकार को झटका के तौर पर देखा जा रहा है। 

 

कुछ दिन पहले ही अमेरिकी वित्त विभाग ने तुर्की की गोल्डन ग्लोबल बैंक और उससे जुड़ी दो कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया था। अमेरिका का आरोप है कि इस कंपनी ने ईरान के कुद्स फोर्स तक करोड़ों डॉलर के लेनदेन के सुविधाजनक बनाया। ईरान की सरकार को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैसा ट्रांसफर करने में मदद की। अमेरिका के इसी कदम से डरकर तुर्की ने ईरानी बैंक पर एक्शन लिया है।

 

महान एयर पर एक्शन: तुर्की ने ईरान की प्राइवेट एयरलाइन महान एयर की फ्लाइट्स को सस्पेंड कर दिया है। यह आदेश 21 सितंबर यानी सोमवार से लागू होगा। अमेरिकी वित्त विभाग ने हाल ही में तुर्की की ग्राउंड-सर्विसेज कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया। इसके बाद तुर्की ने महान एयर के ऑपरेशन को रोकने का फैसला लिया। इन तीनों कंपनी की पहचान एस सिस्टेम, मेस कार्गो और स्काई फीनिक्स के तौर पर हुई। इन्होंने महान एयर को न केवल सेवा प्रदान की, बल्कि पुर्जे की आपूर्ति भी की। अमेरिका ने आरोप लगाया कि महान एयर आईआरजीसी से जुड़ी है।

 

कैसी होगी ईरान की प्रतिक्रिया: तुर्की के इन कदमों को ईरान अपने खिलाफ मान रहा है। सऊदी अरब के साथ अंकारा की बढ़ती नजदीकी को भी खतरे के तौर पर देख रहा है। अगर तुर्की का दखल अधिक बढ़ता है तो ईरान उसके खिलाफ भी ठीक वैसा ही कदम उठा सकता है, जैसा कि अमेरिका का साथ देने पर बहरीन, कतर, कुवैत, यूएई और जॉर्डन के खिलाफ उठाया था। हालांकि तुर्की नाटो का सदस्य है। उस पर सीधा हमला होने की स्थिति में यह देखना होगा कि क्या आर्टिकल-5 लागू होता है या नहीं।


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