आजकल भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर लोग काम और निजी जीवन के बीच बैलेंस बनाने में मुश्किल महसूस करते हैं। ऑफिस का काम, घर की जिम्मेदारियां और लगातार मोबाइल या लैपटॉप पर जुड़े रहने की वजह से कई लोगों को अपने लिए समय ही नहीं मिल पाता है।
अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो इसका असर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ रिश्तों पर भी असर पड़ता है। ऐसे में कुछ आसान आदतें अपनाकर वर्क लाइफ बैलेंस को बेहतर बनाया जा सकता है। आइए जानते हैं 6 आसान तरीके।
1. काम और निजी जीवन की सीमा तय करें
आजकल कई लोग ऑफिस का काम घर आने के बाद भी करते रहते हैं। इससे परिवार और खुद के लिए समय नहीं बचता। कोशिश करें कि ऑफिस के तय समय के बाद काम से जुड़ी कॉल, ईमेल और मैसेज से दूरी बनाएं। इससे आपको मानसिक आराम मिलेगा।
2. रोजाना अपने लिए थोड़ा समय निकालें
दिनभर काम करने के बाद कम से कम 30 मिनट अपनी पसंद की किसी एक्टिविटी के लिए जरूर निकालें। आप किताब पढ़ सकते हैं, संगीत सुन सकते हैं, टहलने जा सकते हैं या कोई नया शौक अपना सकते हैं। इससे तनाव कम होता है और मन शांत रहता है।
3. हर काम की पहले से योजना बनाएं
अगर दिन की शुरुआत बिना प्लानिंग के होती है तो काम का दबाव बढ़ सकता है। इसलिए सुबह या एक रात पहले ही जरूरी कामों की सूची बना लें। सबसे जरूरी काम पहले पूरे करें और बाकी काम बाद में करें।
4. काम के बीच छोटे-छोटे ब्रेक लें
लगातार कई घंटे काम करने से थकान और तनाव बढ़ सकता है। हर 60 से 90 मिनट के बाद 5 से 10 मिनट का छोटा ब्रेक लें। इस दौरान थोड़ा टहलें, पानी पिएं या आंखों को आराम दें। इससे काम पर दोबारा बेहतर तरीके से ध्यान लगाया जा सकता है।
5. परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं
काम कितना भी जरूरी क्यों न हो, अपने परिवार और दोस्तों के लिए समय जरूर निकालें। उनके साथ बातचीत करने, खाना खाने या घूमने जाने से मन हल्का होता है और रिश्ते भी मजबूत होते हैं।
6. अच्छी नींद और सेहत को नजरअंदाज न करें
अगर आप पर्याप्त नींद नहीं लेते या खानपान पर ध्यान नहीं देते तो इसका असर आपके काम और मूड दोनों पर पड़ सकता है। रोज 7 से 8 घंटे की नींद लें, संतुलित भोजन करें और हल्की-फुल्की एक्सरसाइज या योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
किन संकेतों से समझें कि आपका वर्क लाइफ बैलेंस बिगड़ रहा है?
- हर समय काम का तनाव महसूस होना।
- परिवार या दोस्तों के लिए समय न निकाल पाना।
- नींद पूरी न होना।
- छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन आना।
- लगातार थकान महसूस होना।
- छुट्टी के दिन भी काम के बारे में सोचना।