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रंग बिरंगी मिठाइयां सेहत के लिए कितनी खतरनाक? ऐसे करें पहचान

त्योहार के सीजन में मार्केट में रंग बिरंगी मिठाइयां मिलती हैं। क्या आप जानते हैं इन मिठाइयों में आर्टिफिशियल कलर मिलाया जाता है जो सेहत के लिए बहुत खतरनाक होता है।

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मिठाइयां, Photo credit: Freepik

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देशभर में राखी का त्योहार धूम धाम से मनाया जाता है। बिना मिठाइयों के हर त्योहार अधूरा लगता है। इस वजह से बाजार में रसगुल्ले से लेकर बर्फी तक की डिमांड सबसे ज्यादा होती है। इस दौरान मिलावटी मिठाइयों का कारोबार भी तेजी से बढ़ता है।

 

दुकानदार मिठाइयों को बनाने के लिए नकली मावा, सिथेंटिक दूध से लेकर केमिकल वाला कलर तक मिलाते हैं। कुछ मामलों में तो चांदी की वर्क की जगह पर एल्युमिनियम का इस्तेमाल किया जाता है। क्या आप जानते हैं मिठाइयों में जिन रंगों को मिलाया जाता है। उससे हमारी सेहत पर कितना बुरा प्रभाव पड़ता है। इस बारे में डॉक्टर तरंग कृष्णा ने बताया है।

 

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कितना खतरनाक होता है मिठाइयों में इस्तेमाल होने वाला रंग?

एमडी और डॉक्टर तरंग कृष्णा ने अपने वीडियो में रंग बिरंगी मिठाइयों का सच बताया है जिसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे। डॉक्टर तरंग कृष्णा ने कहा, 'हर त्योहार पर मिठाइयों में ऐसे रंगों को मिलाया जाता है जो धीरे-धीरे हमारे शरीर के अंदर जा रहे हैं।

सनसेट येलो

इस लिस्ट में पहला नाम सनसेट येलो कलर है जिसका केमिकल का नाम E110 है। इस रंग का इस्तेमाल जलेबी, मोतीचूर के लड्डू और इमरती बनाने में किया जाता है। ये सिंथेटिक कलर पेट्रोलियम से निकले वाले डाई से आता है। क्लिनीकल स्टडी में पाया गया है कि सनसेट येलो कलर को लगातार खाने से बच्चों में हाइपरएसिडिटी, अटेंशन की कमी और गट लाइनिंग में दिक्कत हो सकती है।

ऑरेंज रेड 2

ऑरेंज रेड 2 सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। ये लोकल डाई है जिसका इस्तेमाल जलेबी को डीप रेड दिखाने के लिए किया जाता है। इससे हमारे लिवर सेल्स पर ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है।

 

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टार्ट्राजिन कलर और ब्रिलियंट ग्रीन

पान की बर्फी और पिस्ता बर्फी मार्केट में 600 से 700 रुपये किलो मिलता है। पिस्ता इतना सस्ता नहीं होता है कि 600 रुपये की बर्फ इतनी हरी नजर आए। इस मिठाई को बनाने के लिए टार्ट्राजिन कलर और ब्रिलियंट ग्रीन जैसे हानिकारक रंगों को मिलाया जाता है। टार्ट्राजिन एक एजो डाई है जिसे यूरोपियन फूड सेफ्टी अथॉर्टी ने खतरनाक माना है। उनका कहना है कि इसकी वजह से अस्थमा और स्किन रैशेज की समस्या हो सकती है। इसके अलावा मिठाइयों में चांदी के वर्क की जगह पर एल्युमिनियम का इस्तेमाल होता है जो सेहत के लिए बेहद हानिकारक होता है।

कैसे इन मिलावटी मिठाइयों की करें पहचान?

  • खोया वाली मिठाई- आप खोए वाली मिठाई को हथेली पर रगड़ कर चेक कर सकते हैं। असली खोए वाली मिठाई में चिकनाहट होगी। जबकि नकली मिठाई रबड़ की तरह लगेगी। 
  • पानी से चेक करें- मिठाई की शुद्धता को पहचानने के लिए एक गिलास गुनगुने पानी में मिठाई का छोटा सा टुकड़ा डालकर चेक करें। अगर रंग मिला होगा तो कलर निकलने लगेगा।
  • चांदी वर्क वाली मिठाई को जलाकर चेक करें। अगर जलाने पर वह गोल हो जाता है तो समझ लीजिए एल्युमिनियम है।

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