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शर्मा की चाय और गलावटी कबाब ही नहीं, लखनऊ में ये चीजें भी हैं मशहूर

लखनऊ अपनी तहजीब, अदब और ऐतिहासिक इमारतों के साथ खान-पान के लिए देश भर में अलग पहचान रखता है। यहां शर्मा की चाय के अलावा भी बहुत कुछ है, जो मशहूर है।

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प्रतीकात्मक फोटो, Photo Credit : Chat GPT

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नवाबों का शहर लखनऊ अपनी तहजीब, अदब और ऐतिहासिक इमारतों के साथ-साथ खानपान के लिए भी देशभर में अलग पहचान रखता है। यहां सुबह की शुरुआत चाय और बन-मक्खन से हो सकती है तो दिन बढ़ते-बढ़ते गलावटी कबाब, निहारी-कुलचा, बिरयानी, चाट, खस्ता-कचौड़ी, कुल्फी और मक्खन मलाई तक पहुंच जाता है। खास बात यह है कि लखनऊ के अलग-अलग इलाकों की अपनी अलग खानपान की पहचान है। अगर आप शहर का असली स्वाद चखना चाहते हैं तो चौक, अमीनाबाद और हजरतगंज की गलियों का रुख जरूर करें।

 सुबह के चाय-नाश्ते की बात हो तो लालबाग की शर्मा जी की चाय का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। यह 34, त्रिलोकीनाथ मार्ग, सुषानपुरा, लालबाग में स्थित है। यहां चाय के साथ बन-मक्खन, समोसा, पोहा और दूसरे नाश्ते का स्वाद लिया जा सकता है।सुबह के समय यहां चाय-नाश्ते के लिए लोगों की भीड़ रहती है। लखनऊ आने वाले लोगों के लिए यह पुराने शहर के चर्चित चाय-नाश्ते के ठिकानों में शामिल है।

 

अमीनाबाद में टुंडे कबाबी का गलावटी कबाब

लखनऊ की पहचान अगर किसी एक मांसाहारी व्यंजन से की जाए तो कबाब का नाम सबसे ऊपर आएगा। टुंडे कबाबी की अमीनाबाद शाखा 168/6, ओल्ड नजीराबाद रोड, मोहन मार्केट, ख्यालीगंज, अमीनाबाद में है। यहां गलावटी कबाब के साथ पराठे का स्वाद लिया जा सकता है। शामी कबाब, सीख कबाब और दूसरे अवधी व्यंजन भी लखनऊ के खानपान की खास पहचान हैं।

चौक में निहारी-कुलचा और शीरमाल का स्वाद

पुराने लखनऊ का चौक इलाका पारंपरिक खानपान के लिए खास पहचान रखता है। सुबह के समय यहां निहारी-कुलचा का स्वाद लेने वालों की भीड़ रहती है। धीमी आंच पर तैयार की गई निहारी को नरम कुलचे के साथ खाया जाता है। चौक के रहीम्स का नाम निहारी, कुलचा और शीरमाल के लिए लिया जाता है। शीरमाल हल्की मीठी, नरम और खुशबूदार पारंपरिक रोटी है, जिसे निहारी और दूसरे मुगलई व्यंजनों के साथ खाया जाता है।

 

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पाटानाला के पास इदरीस की बिरयानी

अवधी बिरयानी का अपना अलग स्वाद है। पुराने लखनऊ में इदरीस बिरयानी का नाम खास तौर पर लिया जाता है। इसकी दुकान पाटानाला के सामने, जौहरी मोहल्ला, राजा बाजार इलाके में स्थित है। बिरयानी के साथ कबाब और दूसरे पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी यहां लिया जा सकता है। पुराने लखनऊ की गलियों में घूमते हुए बिरयानी की खुशबू ही आपको इन इलाकों तक खींच ले जाती है।

हजरतगंज में शुक्ला चाट हाउस की चाट

लखनऊ सिर्फ कबाब और बिरयानी का शहर नहीं है। यहां की चाट भी खाने के शौकीनों के बीच खूब लोकप्रिय है। शुक्ला चाट हाउस शहनाजफ रोड, हजरतगंज में चर्च बिल्डिंग की दुकान नंबर एक पर स्थित है। यहां गोलगप्पे और दूसरी चाट का स्वाद लिया जा सकता है। हजरतगंज में चाट खाने के बाद आसपास के बाजार और पुराने शहर की रौनक का भी आनंद लिया जा सकता है।

हजरतगंज में रॉयल कैफे की टोकरी चाट

टोकरी चाट लखनऊ के चर्चित व्यंजनों में शामिल है। कुरकुरी आलू की टोकरी में आलू, चने, दही, चटनी और सेव डालकर तैयार की जाने वाली यह चाट स्वाद और बनावट दोनों में अलग है। रॉयल कैफे हजरतगंज की शाखा 9/7, शहनाजफ रोड पर है। यहां की टोकरी चाट लखनऊ के चर्चित चाट व्यंजनों में गिनी जाती है।

अमीनाबाद में नेतराम की खस्ता-कचौड़ी

सुबह के नाश्ते में खस्ता-कचौड़ी और आलू की सब्जी का अपना अलग मजा है। नेतराम अमीनाबाद के श्रीराम रोड, मोहन मार्केट, कमला मार्केट और स्वदेशी मार्केट इलाके में स्थित है। यहां पारंपरिक नाश्ते और मिठाइयों का स्वाद लिया जा सकता है।गर्मागर्म खस्ता-कचौड़ी के साथ मसालेदार आलू की सब्जी लखनऊ के पुराने बाजारों के नाश्ते की खास पहचान है।

सर्दियों में चौक की मक्खन मलाई

सर्दियों का स्वाद मक्खन मलाई के बिना अधूरा माना जाता है। दूध से तैयार होने वाली यह हल्की और झागदार मिठाई पुराने लखनऊ की सुबह की खास पहचान है। चौक और पुराने लखनऊ की गलियों में सर्दियों के मौसम में इसके पारंपरिक विक्रेता मिलते हैं। सुबह जल्दी पहुंचने पर इसका ताजा स्वाद लेने का मौका मिलता है।

अमीनाबाद में प्रकाश की मशहूर कुल्फी

खाने के बाद मीठा खाने का मन हो तो प्रकाश की मशहूर कुल्फी का स्वाद लिया जा सकता है। इसकी अमीनाबाद वाली दुकान फ्रूट लेन, मोहन मार्केट, प्रकाश कुल्फी चौराहा के पास स्थित है।यहां कुल्फी और कुल्फी-फालूदा का स्वाद लोगों के बीच खासा लोकप्रिय है। गर्मी के मौसम में यहां लोगों की अच्छी भीड़ देखने को मिलती है।

खाने के बाद पान से पूरी होती है महफिल

खानपान की यात्रा पान के बिना अधूरी मानी जाती है। अमीनाबाद और पुराने लखनऊ की गलियों में कई तरह के पान की दुकानें मिल जाएंगी। खाना खत्म होने के बाद पान खाना यहां की पुरानी परंपरा और तहजीब का हिस्सा माना जाता है।

 

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कम समय है तो इन तीन इलाकों में चखें पूरा लखनऊ

अगर बाहर से लखनऊ घूमने आए हैं और आपके पास खाने के लिए ज्यादा समय नहीं है तो चौक, अमीनाबाद और हजरतगंज तीन ऐसे इलाके हैं, जहां घूमकर शहर के कई मशहूर स्वाद चखे जा सकते हैं। चौक में निहारी-कुलचा, शीरमाल, बिरयानी और सर्दियों में मक्खन मलाई का स्वाद लिया जा सकता है। अमीनाबाद में गलावटी कबाब, खस्ता-कचौड़ी और कुल्फी का स्वाद मिलेगा। वहीं हजरतगंज में चाट, गोलगप्पे और चाय का मजा लिया जा सकता है। लखनऊ में खानपान का सफर एक कप चाय से शुरू होकर कबाब, निहारी, बिरयानी, चाट, खस्ता-कचौड़ी, मटर बन, कुल्फी, मक्खन मलाई और पान तक पहुंचता है। यही वजह है कि लखनऊ का खाना सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि शहर की तहजीब, परंपरा और नवाबी विरासत का हिस्सा भी माना जाता है।

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