आज के समय में घर को सुरक्षित रखने के लिए लोग ताले, कैमरे, अलार्म और दूसरी तकनीक का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन पुराने समय में यूरोप में घर की सुरक्षा को लेकर लोगों की सोच बिल्कुल अलग थी। उस समय लोगों को चोरों के अलावा बुरी आत्माओं और शक्तियों का भी डर सताता था।
इसी वजह से घरों में ऐसी कई अजीब चीजें की जाती थीं, जिन्हें आज देखकर हैरानी होती है। लोग घर की दीवारों और लकड़ी पर खास तरह के निशान बनाते थे, बोतलों में बाल, पिन और कील जैसी चीजें भरकर उन्हें छिपा देते थे। इतना ही नहीं कुछ पुराने घरों में दीवारों, फर्श के नीचे और दूसरी छिपी जगहों पर पुराने जूते भी मिले हैं। माना जाता था कि इन चीजों से घर को बुरी शक्तियों से बचाया जा सकता है।
पुराने समय में किए जाने वाले ये उपाय आज भले ही अजीब लगते हों लेकिन उस दौर में कई लोग इन्हें घर की सुरक्षा का एक तरीका मानते थे। खास बात यह है कि इन चीजों को घर के ऐसे हिस्सों में रखा या बनाया जाता था, जिन्हें लोग बुरी शक्तियों के घर में आने की जगह मानते थे।
दरवाजे, खिड़कियां, फायरप्लेस और घर की लकड़ी वाली जगहों पर ऐसे निशान मिलते हैं। वहीं विच बॉटल जैसी बोतलों को घर के अंदर छिपाया जाता था। पुराने जूते भी कई बार ऐसी जगहों पर मिले हैं, जहां उन्हें जानबूझकर छिपाया गया लगता है। इन चीजों से पता चलता है कि पुराने समय में लोग अपने घर और परिवार को बुरी शक्तियों से बचाने के लिए कितने अलग-अलग तरीके अपनाते थे।
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दीवारों पर बनाते थे खास निशान
पुराने यूरोप के घरों में दरवाजों, खिड़कियों, फायरप्लेस और लकड़ी के हिस्सों पर खास तरह के निशान बनाए जाते थे। इन निशानों को ‘विच मार्क्स’ या ‘प्रोटेक्शन मार्क्स’ कहा जाता है। लोगों का मानना था कि ऐसे निशान बुरी आत्माओं, चुड़ैलों और दूसरी बुरी शक्तियों को घर से दूर रखने में मदद करते हैं।
इन निशानों में गोल-गोल डिजाइन, एक-दूसरे से जुड़ी V जैसी रेखाएं, क्रॉस और पांच कोनों वाले निशान शामिल थे। इनमें सबसे आम निशानों में से एक ‘डेजी व्हील’ था जो छह पंखुड़ियों वाले फूल जैसा दिखाई देता था। माना जाता था कि इसमें बनी हुई रेखा बुरी आत्माओं को उलझा सकती है और उन्हें आगे बढ़ने से रोक सकती है।
ऐसे निशान ज्यादातर दरवाजों, खिड़कियों और फायरप्लेस के पास मिलते हैं। उस समय लोगों को लगता था कि ये घर में बाहर से आने वाली बुरी शक्तियों के रास्ते हो सकते हैं। इसलिए इन्हीं जगहों पर सुरक्षा के निशान बनाए जाते थे। कुछ घरों में लकड़ी के बीम और फर्श के नीचे भी ऐसे निशान मिले हैं।
बोतल में भरकर छिपाते थे अजीब चीजें
पुराने समय में घर को बुरी शक्तियों से बचाने के लिए ‘विच बॉटल’ का भी इस्तेमाल किया जाता था। ये देखने में आम बोतल जैसी होती थीं लेकिन इनके अंदर बाल, पिन, कील और दूसरी चीजें भरकर रखी जाती थीं। कुछ बोतलों में पेशाब जैसी चीजें भी मिली हैं। इन बोतलों को एक तरह के जादुई बचाव के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था।
इन बोतलों को घर के अंदर ऐसी जगह छिपाया जाता था जहां वे आसानी से दिखाई न दें। कई बोतलें फायरप्लेस के नीचे या दीवारों के अंदर और फर्श के नीचे मिली हैं। मान्यता थी कि बोतल बुरी शक्ति या जादू के असर को अपने अंदर खींच लेगी और घर में रहने वाले लोगों को नुकसान से बचाएगी। कुछ मामलों में बोतल के अंदर मुड़ी हुई पिन और कीलें डाली जाती थीं। माना जाता था कि अगर किसी ने घर या परिवार पर बुरा असर डालने की कोशिश की है तो यह बोतल उस बुरे असर को रोक सकती है।
घर में पुराने जूते भी छिपाते थे
पुराने घरों में सिर्फ बोतलें ही नहीं बल्कि पुराने जूते भी जानबूझकर छिपाए जाते थे। ऐसे जूते दीवारों के अंदर, फर्श के नीचे, छत के पास और चिमनी के आसपास मिले हैं। खास बात यह है कि ये ऐसी जगहें थीं, जहां कोई व्यक्ति आमतौर पर जूते रखने के लिए नहीं जाता था। इसलिए माना जाता है कि इन्हें जानबूझकर वहां छिपाया गया था। इंग्लैंड के कई पुराने घरों में ऐसे जूते मिले हैं। एक पुराने घर में फर्श के नीचे जूता मिला जबकि दूसरे घरों में चिमनी और दीवारों के अंदर भी जूते पाए गए।
लोग पुराने जूते घर में क्यों छिपाते थे, इसका कोई एक पक्का जवाब नहीं है लेकिन एक मान्यता यह है कि जूतों को घर के लिए एक तरह का शुभ या सुरक्षा वाला सामान माना जाता था। पुराने समय में जूते को सौभाग्य से भी जोड़ा जाता था। इसलिए कुछ लोगों ने शायद यह माना हो कि पुराने जूते घर और उसमें रहने वाले लोगों को बुरी चीजों से बचा सकते हैं।
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लकड़ी पर भी बनाए जाते थे निशान
बुरी शक्तियों से बचने के लिए घर की लकड़ी पर भी खास निशान बनाए जाते थे। दरवाजों, खिड़कियों और लकड़ी के बड़े हिस्सों पर गोल निशान, आपस में जुड़ी रेखाएं और दूसरे डिजाइन बनाए जाते थे। कुछ निशान फायरप्लेस के आसपास भी मिले हैं।
कुछ जगहों पर लकड़ी के बीम को जानबूझकर हल्का जलाने के निशान भी मिले हैं। इन्हें भी घर की सुरक्षा से जोड़ा जाता है। माना जाता था कि आग से बने ये निशान घर को आग या दूसरी बुरी चीजों से बचाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि हर निशान का मतलब एक जैसा नहीं था। कुछ निशान कारीगरों द्वारा लकड़ी के हिस्सों की पहचान के लिए भी बनाए जाते थे।