ज्यादातर लोगों को लगता है कि पानी पीना सबसे आसान काम है। जब आपको प्यास लगती हैं तब पानी पीते हैं और जब नहीं लगती है तो नहीं पीते हैं लेकिन ये आदत हमारी किडनी के लिए नुकसानदायक है। किडनी टॉक्सिन को रिलीज करता है, इलेक्ट्रोलाइट्स को बैलेंस करता है और शरीर में तरल पदार्थ को नियंत्रित करने का काम करता है। जब आप पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीते हैं तो किडनी में स्टोन, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन और किडनी की गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।
कुछ लोग दिन भर कॉफी, चाय और जूस पीते हैं। कैफीन या शुगर वाली ड्रिंक शरीर से पानी को सोखने का काम करते हैं जिससे किडनी को शरीर में पानी बनाए रखने में दिक्कत होती है। एक आम गलतफहमी है कि पानी तभी पीना चाहिए जब आपको प्यास लगे। आपको प्यास तब लगती है जब शरीर पूरी तरह से डिहाइड्रेट हो चुका होता है। इस कारण किडनी पर दबाव पड़ता है।
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अधिक पानी पीने से होती है ये समस्या
ज्यादातर लोगों को कम पानी पीने के नुकसान पता है। डिहाइड्रेशन से बचने के लिए कुछ लोग बहुत अधिक पानी पीते हैं। अधिक पानी पीने के कारण Hyponatremia की समस्या का खतरा बढ़ जाता है। Hyponatremia एक ऐसी स्थिति है जब बल्ड में सोडियम का लेवल कम हो जाता है। इस वजह से कोशिकाओं में सूजन आ जाती है। इसका प्रभाव आपके लिवर और किडनी पर पड़ता है। गंभीर स्थिति में दिमाग में पानी भर जाता है, व्यक्ति कोमा में चला जाता है।
अधिक पानी पीने से टॉक्सिन बाहर निकलते हैं
कई लोगों को लगता है कि अधिक पानी पीने की वजह से टॉक्सिन आसानी से बाहर निकल जाते हैं। अधिक पानी पीने की वजह से खून में सोडियम घूलता है जिसकी वजह से हाइपोनेट्रमिया का खतरा बढ़ जाता है।
प्यास लगने का मतलब आप ठीक है
आप पानी तब पीते हैं जब प्यास लगती है तो यह गलत तरीका है। हमें प्यास तब लगती है जब किडनी पर दबाव बढ़ता है। इस कारण से पेशाब का रंग पीला होता है। इसके अलावा किडनी में स्टोन, यूटीआई समेत अन्य परेशानियां भी हो सकती है।
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कितनी मात्रा में पानी पीना चाहिए?
एक महिला को दिन भर में 2.2 लीटर और पुरुष को 3 लीटर पानी पीना चाहिए। किडनी या अन्य किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को डॉक्टर की सलाह से पानी पीना चाहिए।