हम सभी ने अपने घर में बड़ों से सुना है कि सुबह जल्दी उठना चाहिए। सुबह उठने से सेहत अच्छी रहती है और दिनभर तरोताजा महसूस करते हैं। जबकि आज कल की भागदौड़ वाली जिंदगी में हम में से ज्यादातर लोग रात को लेट सोते हैं। इसके पीछे कई कारण हैं। रात को लेट सोना या सुबह जल्दी उठना शरीर के हिसाब से क्या सही है?
सोने का समय आपके बॉडी क्लॉक पर पूरी तरह से निर्भर करता है। नींद का मतलब सिर्फ आराम नहीं है। यह वह समय जब शरीर खुद को रिपेयर करता है। हमारे बॉडी की एक क्लॉक है जिसे दिमाग निर्देश देता है कि कब हमें अलर्ट होना है और कब स्लो डाउन होना है?
यह भी पढ़ें: सुबह 11 से दोपहर 4 बजे तक, धूप में बाहर क्यों नहीं निकलना चाहिए?
बॉडी क्लॉक नींद में निभाती है महत्वपूर्ण भूमिका
National Institute of Health की रिपोर्ट के मुताबिक हमारे शरीर में अंदरूनी घंडी है जो मेलेटोनिन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन को नियंत्रित करता है। ये केमिकल तय करते हैं कि कब हमें सोना है और कब उठना है? जब सोने का समय हमारे बॉडी क्लॉक के हिसाब से काम करता है तो शरीर अच्छे तरीके से काम करता है। जब मैच नहीं होता है तो आप पूरी रात भर भी नींद लेंगे तो कम पड़ेगी।
कम नींद लेने से क्या होता है?
कम नींद लेने की वजह से दिन भर चिड़चिड़ापन महसूस करते हैं। आपका काम में नहीं लगेगा और थकान मबसूस होगी। कुछ स्टडी में दावा किया गया है कि सुबह जल्दी उठने से शरीर में भरपूर एनर्जी होती है लेकिन आपकी नींद पूरी होनी चाहिए। हमारा शरीर सिर्फ जल्दी उठने वालों के हिसाब से डिजाइन नहीं है। Center For Disease Control And Prevention के मुताबिक हर व्यक्ति को 7 से 9 घंटे की पूरी नींद लेनी चाहिए।
यह भी पढ़ें: गर्मी में आप भी तो नहीं डिहाइड्रेटेड है, इन लक्षणों से करें पहचान
नींद का इम्यूनिटी पर पड़ता है प्रभाव
पर्याप्त नींद नहीं लेने से सिर्फ थकान महसूस नहीं होती है। इसकी वजह से इम्यून सिस्टम पर भी प्रभाव पड़ता है। नींद का इम्यूनिटी से सीधा संबंध है। इस बात की पुष्टि कई स्टडी में हुई हैं। National Health Service के मुताबिक पर्याप्त नींद नहीं लेने से शरीर की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है।
आपके सुबह जल्दी उठने या लेट सोने से नींद की गुणवत्ता पर प्रभाव नहीं पड़ता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि आपकी सोने के समय और सुबह उठने का समय हर रोज एक जैसा होना चाहिए। इस पर आपकी नींद की गुणवत्ता निर्भर करती है।