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कुछ खास लोगों को ही क्यों काटते हैं मच्छर? जानें इसके पीछे का साइंस

जानिए आखिर मच्छर कुछ खास लोगों को ही अपना शिकार क्यों चुनते हैं और इसके पीछे खून के ग्रुप और पसीने की गंध का क्या कनेक्शन है, पूरा सच यहां जानें।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Freepik

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गर्मी और बारिश के आते ही मच्छरों का हमला शुरू हो जाता है लेकिन आपने देखा होगा कि कुछ लोगों को मच्छर बहुत ज्यादा काटते हैं, जबकि उनके पास बैठे दूसरे इंसान को वे छूते तक नहीं। यह कोई जादू नहीं है, बल्कि इसके पीछे विज्ञान की एक पूरी कहानी छिपी है। दरअसल, दुनिया में मच्छरों की हजारों प्रजातियां हैं लेकिन उनमें से सिर्फ मादा (फीमेल) मच्छर ही इंसान का खून चूसती हैं। 

 

उन्हें अपने अंडों को पालने और उन्हें पोषण देने के लिए हमारे खून में मौजूद खास प्रोटीन और आयरन की जरूरत होती है। नर मच्छर तो पेड़ों और फूलों के रस पीकर ही अपना पेट भर लेते हैं। मादा मच्छर हमें ढूंढने के लिए एक बहुत ही खतरनाक तकनीक का इस्तेमाल करती हैं, जिसमें हमारी सांस, पसीने की गंध और हमारे शरीर की गर्मी तक सब कुछ शामिल होता है। वे सिर्फ किसी को भी रैंडमली नहीं काटतीं, बल्कि अपना शिकार बहुत सोच-समझकर चुनती हैं।

 

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सांसों की गंध से करती हैं पहचान

मच्छर हमारी सांसों को बहुत दूर से पहचान लेते हैं। जब हम सांस छोड़ते हैं, तो हमारे शरीर से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस बाहर निकलती है। मच्छरों के पास इसे सूंघने के लिए एक खास अंग होता है, जिसकी मदद से वे करीब 100 फीट की दूरी से ही समझ जाते हैं कि आसपास कोई इंसान मौजूद है। यही वजह है कि जिनका शरीर बड़ा होता है या जो लोग ऊंचे कद के होते हैं, उन्हें मच्छर ज्यादा काटते हैं क्योंकि वे छोटे बच्चों के मुकाबले ज्यादा गैस छोड़ते हैं। इसी तरह, गर्भवती महिलाओं को भी मच्छर अपना निशाना ज्यादा बनाते हैं क्योंकि वे आम लोगों से करीब 21 प्रतिशत ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड बाहर छोड़ती हैं।

पसीने की महक से खिंचते हैं

सिर्फ सांस ही नहीं, हमारे शरीर से निकलने वाला पसीना भी मच्छरों को दावत देता है। जब हम कोई मेहनत वाला काम करते हैं या एक्सरसाइज करते हैं, तो पसीने के साथ लैक्टिक एसिड, यूरिक एसिड और अमोनिया जैसे कुछ तत्व बाहर निकलते हैं। मच्छरों को इन केमिकल्स की महक बहुत पसंद होती है। इसके अलावा, हमारी स्किन पर करोड़ों छोटे-छोटे बैक्टीरिया होते हैं। हर इंसान की त्वचा पर इन बैक्टीरिया का मेल अलग होता है, जिससे एक खास गंध पैदा होती है। रिसर्च के मुताबिक, जिन लोगों की स्किन पर खास तरह के बैक्टीरिया ज्यादा होते हैं, मच्छर उनकी तरफ पागलों की तरह खिंचे चले आते हैं।

खून के प्रकार

क्या आपको पता है कि मच्छरों का भी अपना एक पसंदीदा 'मेन्यु' होता है? वैज्ञानिकों ने पाया है कि 'O' ब्लड ग्रुप वाले लोग मच्छरों की सबसे पहली पसंद होते हैं। इन लोगों को 'A' ब्लड ग्रुप वालों के मुकाबले दोगुना ज्यादा मच्छर काटते हैं, जबकि 'B' ग्रुप वाले लोग इनके बीच में आते हैं। दरअसल, हमारे शरीर के जीन्स ही यह तय करते हैं कि हमारी त्वचा से कौन से केमिकल बाहर निकलेंगे। दुनिया में करीब 80 प्रतिशत लोग ऐसे होते हैं जिनके शरीर से निकलने वाले पसीने या स्राव से उनके ब्लड ग्रुप का पता चल जाता है। मच्छर इसी जानकारी के आधार पर उन पर हमला कर देते हैं।

शरीर की गर्मी का असर

मच्छर सिर्फ सूंघते ही नहीं, बल्कि वे रंगों को भी बहुत अच्छी तरह देख सकते हैं। उन्हें गहरे रंग जैसे काला, गहरा नीला और लाल रंग बहुत जल्दी नजर आते हैं। अगर आपने गहरे रंग के कपड़े पहने हैं, तो आप मच्छरों की नजर में आसानी से आ जाएंगे और वे आपको ढूंढ लेंगे। इसके साथ ही, मच्छर हमारे शरीर से निकलने वाली गर्मी को भी महसूस करते हैं। जब मादा मच्छर हमारे शरीर के करीब आती है, तो वह उन जगहों को ढूंढती है जहां खून की नसें त्वचा के बिल्कुल पास होती हैं। जब हम हिलते-डुलते हैं, तो शरीर की गर्मी और गंध तेजी से फैलती है, जिससे मच्छरों को शिकार करने में आसानी होती है।

 

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बचाव के तरीके

मच्छरों के कहर से बचने के लिए कुछ आसान तरीके अपनाए जा सकते हैं। सबसे पहले, घर के बाहर निकलते समय हल्के रंग के और पूरी बाजू के कपड़े पहनना चाहिए क्योंकि गहरे रंग मच्छरों को जल्दी दिखाई देते हैं। घर के आस-पास कहीं भी पानी जमा न होने दें, क्योंकि ठहरे हुए पानी में ही मच्छर अपने अंडे देते हैं। सोने के समय मच्छरदानी का इस्तेमाल सबसे सुरक्षित तरीका है। इसके अलावा, शाम के वक्त खिड़की-दरवाजे बंद रखें और शरीर पर नीम का तेल या बाजार में मिलने वाली मॉस्किटो रिपेलेंट क्रीम का इस्तेमाल करें। अगर आप पसीने से लथपथ हैं, तो नहाकर खुद को साफ कर लें क्योंकि पसीने की महक मच्छरों को न्योता देती है।

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