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भारत में बढ़ा स्लीप डिवोर्स का ट्रेंड, कपल्स क्यों चाहते हैं अलग-अलग सोना?

भारत में स्लीप डिवोर्स के मामले बढ़े हैं। 78% भारतीय कपल्स इस कॉन्सेप्ट को अपना रहे हैं। आइए जानते हैं क्या होता है स्लीप डिवोर्स?

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Freepik

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इन दिनों कपल्स के बीच में स्लीप डिवोर्स का ट्रेंड काफी तेज से बढ़ रहा है। यह शब्द सुनने में नकरात्मक लगता है लेकिन ऐसा नहीं है। स्लीप डिवोर्स में कपल अपनी सेहत को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं। इसका कानूनी प्रक्रिया से कोई लेना देना नहीं है। स्लीप डिवोर्स में कपल आपसी सहमति से अलग-अलग कमरों में सोने का फैसला लेते हैं। यह फैसला पार्टनर के खर्राटों, बार-बार करवट लेने, अलग-अलग स्लीप शेड्यूल की वजह से लेता है। नींद सेहत के लिए बहुत जरूरी है। 

 

डॉक्टर्स के मुताबिक नींद की कमी की वजह से चिड़चिड़ापन बढ़ता है। साथ ही रिश्तों में तनाव बढ़ता है। दुनियाभर के कपल में स्लीप डिवोर्स का ट्रेंड बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 70% से ज्यादा भारतीय कपल्स स्लीप डिवोर्स को अपना रहे हैं।

 

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भारत में बढ़ा स्लीप डिवोर्स का ट्रेंड

 ResMed's 2025 Global Sleep Survey की रिपोर्ट के मुताबिक स्लीप डिवोर्स का ट्रेंड भारत में सबसे ज्यादा बढ़ा है। 78% भारतीय कपल इस कॉन्सेप्ट को अपना रहे हैं। इसके बाद चीन में 67% और दक्षिण कोरिया 65% का स्थान है। यह स्टडी 13 बाजारों में 30,000 से ज्यादा लोगों पर हुई। इस स्टडी में पाया गया कि यूके और यूएस में 50% कपल साथ में सोते हैं और 50% कपल अलग सोते हैं। अलग-अलग सोना लोगों को अजीब लग सकता है लेकिन कई लोगों का मानना है अच्छी नींद के लिए यह जरूरी कदम है। नींद में कमी का मुख्य कारण खर्राटे लेना, जोर से सांस लेना, बेचैनी, बेड पर ज्यादा देर फोन चलाना आदि शामिल है। जिन लोगों ने अलग-अलग सोने का फैसला किया उनकी नींद की क्वॉलिटी बेहतर हुई और सेक्स लाइफ भी बेहतर हुई। हालांकि विशेषज्ञों का सुझाव है कि एक साथ सोने के कई फायदे हैं। पार्टनर के साथ सोने से ऑक्सीटोसिन लव हार्मोन रिलीज होता है जिससे डिप्रेशन और स्ट्रेस का स्तर कम हो सकता है। साथ ही जीवन और रिश्ते में संतुष्टि रहती है।

 

नींद की कमी की वजह से खराब मूड, एकाग्रता में कमी, तनावपूर्ण रिश्ते और कार्यस्थल पर प्रदर्शन में कमी शामिल है। इसके अलावा एंग्जायटी और डिप्रेशन का जोखिम बढ़ता है जिससे मेंटल हेल्थ पर असर पड़ता है। नींद की कमी से गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं। हर व्यक्ति को 7 से 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए। 

 

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कपल्स क्यों अलग सोना पसंद करते हैं?

खर्राटे लेन और स्लीप डिसऑर्डर- खर्राटे, नींद नहीं आने की समस्या की वजह से कपल्स अलग कमरों में सोने का फैसला लेते हैं। उनकी वजह से पार्टनर की नींद भी खराब होती है।

अलग स्लीप शेड्यूल- भागदौड़ वाली जिंदगी की वजह से एक-दूसरे के साथ रूटीन मैच नहीं होता है। उदाहरण के लिए शिफ्ट शेड्यूल, रात में देर तक फोन चलााना, लेट से सोने की वजह से स्लीप साइकिल पर प्रभाव पड़ता है।

तापमान और वातावरण- कपल में अक्सर रूम के ऐसी का टेंपरेचर, लाइटनिंग की वजह से प्रभाव पड़ता है।

तनाव और लाइफस्टाइल फैक्टर- घंटों की शिफ्ट, माता-पिता की जिम्मेदारी और डिजिटल डिस्ट्रेक्शन की वजह से तनाव बढ़ता है। ये सभी चीजें नींद को प्रभावित करती हैं। इसी वजह से कपल्स अपनी मानसिक स्वास्थ्य को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं।

 

 

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