logo

मूड

ट्रेंडिंग:

आयरन की कमी दूर करने में देसी तरीका क्यों बन रहा है डॉक्टरों की पसंद?

पारंपरिक आहार और लोहे के बर्तनों का उपयोग शरीर में हीमोग्लोबिन के स्तर को प्राकृतिक रूप से बढ़ाने का सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका है। अब इसे WHO और प्रमुख न्यूट्रीशन एक्सपर्ट्स भी मान्यता दे रहे हैं।

Representative Image

प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Sora

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement
Group2

आज के मॉडर्न युग में जहां सप्लीमेंट्स का बोलबाला है, वहीं लोग एक बार फिर अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं। लोहे की कड़ाही में खाना पकाना और गुड़, चना व हरी पत्तेदार सब्जियों जैसे पारंपरिक सुपरफूड्स का सेवन करना अब केवल दादी-नानी के नुस्खे नहीं रहे। कई रिसर्च बताते हैं कि जब हम लोहे के बर्तनों में एसीडिक खाना या सब्जियां पकाते हैं, तो भोजन में आयरन की मात्रा कई गुना बढ़ जाती है, जिसे शरीर को इसे आसानी से सोखने में मदद मिलती है।

 

डॉक्टर और शोधकर्ता इस बदलाव को एक सस्टेनेबल हेल्थ यानी की सतत स्वास्थ्य के रूप में देख रहे हैं। डॉक्टर अब केवल दवाइयों पर निर्भर रहने के बजाय डायट में बदलाव की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त आयरन का अवशोषण शरीर में बेहतर होता है। साथ ही इसके नुकसान, जैसे कब्ज या पेट की समस्या, न के बराबर होते हैं।

 

यह भी पढ़ें: बिना गैस जलाए घर पर आसानी से बनाएं ये 8 रेसिपी

डॉक्टर और शोध क्या कहते हैं?

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के विभिन्न अध्ययनों ने पुष्टि की है कि खाने में कई तरह के फायदेमंद चीजों के सेवन से एनीमिया से लड़ने में बहुत मदद मिलती है।
  • वहीं 'जर्नल ऑफ फूड साइंस' में छपे एक रिसर्च के अनुसार, लोहे की कड़ाही में खाना बनाने से भोजन में आयरन की मात्रा में 16% से 20% तक की वृद्धि हो सकती है।
  • कई बड़े स्वास्थ्य संस्थान जैसे टाटा ट्रस्ट और 'द लैंसेट' आदि ने माना है कि 'फोर्टिफाइड' पारंपरिक भोजन, लोहे की कड़ाही में पका भोजन ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में हीमोग्लोबिन बढ़ाने में सफल रहा है।

पारंपरिक खान-पान के प्रमुख फायदे

प्राकृतिक अवशोषण: सप्लीमेंट्स की तुलना में भोजन से मिलने वाला आयरन शरीर के अंगों पर दबाव नहीं डालता क्योंकि यह आपके शरीर में नेचुरल तरीके से अवशोषित होने की ताकत रखता है। इसके साथ ही पारंपरिक भोजन में अक्सर नींबू या आंवले का प्रयोग होता है। वैज्ञानिक रूप से, विटामिन C आयरन के अवशोषण को बढ़ा देता है।

 

नेचुरल तरीके से जो भी चीजें उपलब्ध है वह महंगी दवाओं की तुलना में अत्यंत सस्ते और सुलभ है। सिंथेटिक आयरन टैबलेट्स से होने वाली प्रॉब्लम जैसे जी मिचलाने या पाचन की समस्या इसमें नहीं होती।

 

यह भी पढ़ें: छोटी-छोटी गलतियां आपको बना रही हैं एनीमिया का शिकार, समझें क्या हैं कारण

आयरन बढ़ाने वाले प्रमुख स्रोत

  • इसमें गुड़ और काला चना का प्रयोग सबसे ज्यादा होता है। इसे आयरन और फोलेट का पावरहाउस माना जाता है। यह काफी सस्ता और आसानी से मिलने वाला ऑप्शन है।
  • सहजन या मोरिंगा जिसमें आयरन की मात्रा पालक से भी कहीं अधिक होती है।
  • लोहे की कड़ाही में खाना पकाने के दौरान भोजन में आयरन के कण मिल जाते हैं। 
  • बाजरा और रागीये मोटे अनाज आयरन के समृद्ध स्रोत हैं।

हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि हम अपनी थाली में विविधता लाएं और पारंपरिक खाना पकाने के तरीकों को अपनाएं, तो एनीमिया जैसी गंभीर समस्या को बिना किसी दवा के जड़ से खत्म किया जा सकता है।


और पढ़ें