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'राम मंदिर में चोरी के 105 मामले मिले', SIT की जांच में सामने क्या आया?

राम मंदिर में दान के हिसाब-किताब में गड़बड़ी के आरोपों की जांच के लिए SIT ने CCTV फुटेज, गवाहों के बयान और दान के रिकॉर्ड की जांच करने के बाद चोरी के 105 अलग-अलग मामले पाए हैं।

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राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला। Photo Credit- PTI

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अयोध्या के राम मंदिर में राम भक्तों के द्वारा चढाए गए पैसों की चोरी को लेकर स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) जांच कर रही है। इस बीच चढ़ावा चोरी को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। राम मंदिर में दान के हिसाब-किताब में गड़बड़ी के आरोपों की जांच के लिए SIT ने CCTV फुटेज, गवाहों के बयान और दान के रिकॉर्ड की जांच करने के बाद चोरी के 105 अलग-अलग मामले पाए हैं।

 

SIT टीम में लखनऊ जोन के पुलिस इंस्पेक्टर जनरल किरण एस, अयोध्या रेंज के DIG सोमेन बर्मा, अयोध्या के SSP गौरव ग्रोवर और बाराबंकी के एडिशनल SP रितेश कुमार सिंह शामिल हैं। जांचकर्ताओं ने सैकड़ों घंटे के सर्विलांस वीडियो टेप, डिजिटल लॉगिंग रसीदों और बैंक डिपॉजिट रिकॉर्ड की जांच की, जिससे यह पता लगाया जा सके कि बैंक लॉकर में ट्रांसफर होने से पहले डोनेशन कैसे निकाला जाता था।

 

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25 सितंबर तक आरोपपत्र दाखिल करेगी SIT

इसी बीच सुप्रीम कोर्ट को सोमवार को बताया गया है कि राम मंदिर में चढ़ावे की जांच कर रही SIT 25 सितंबर तक या उससे पहले पहला आरोपपत्र दाखिल करेगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ को बताया कि इस मामले में पहली गिरफ्तारी के बाद से कानूनी तौर पर तय 90 दिन की समय-सीमा जल्द ही खत्म होने वाली है।

90 दिन की अवधि 25 सितंबर को पूरी हो रही

तुषार मेहता ने कहा, 'पहली गिरफ्तारी की तारीख से 90 दिन की अवधि 25 सितंबर को पूरी हो जाएगी, इसलिए हमें आरोपपत्र दाखिल करना होगा, अन्यथा आरोपियों को डिफॉल्ट जमानत मिल जाएगी।' शीर्ष कोर्ट ने सीलबंद लिफाफे में एसआईटी की ओर से दाखिल की गई विस्तृत वस्तु स्थिति रिपोर्ट को भी देखा किया।

 

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आरोपियों को मिल सकती है जमानत

दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 167(2) के तहत अगर जांच एजेंसी तय समय यानी 60 या 90 दिन के भीतर कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल करने में नाकाम रहती है तो आरोपी को वैधानिक जमानत पाने का अधिकार मिल जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले एसआईटी को अपनी जांच जल्द पूरी करने और उसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने एसआईटी को निर्देश दिया था कि वह चढ़ावा चोरी मामले में जांच में हुई प्रगति की वस्तु स्थिति रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल करे।

 

राम मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन में अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद, राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह समेत कई याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उन्होंने सीबीआई से जांच कराने और मंदिर न्यास के वित्तीय मामलों का फॉरेंसिक ऑडिट कराने संबंधी निर्देश का अनुरोध किया था।

 


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