सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मंगलवार को कहा कि
कॉकरोच जनता पार्टी
(CJP) के विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर को वापस लिया जाएगा। उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। मंगलवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया है।
जेपी नड्डा ने कहा, 'भारत सरकार की ओर से हमने छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें आश्वासन दिया था कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले वापस ले लिए जाएंगे और उनके खिलाफ आगे कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की जाएगी।'
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीजेपी ने 5 सितंबर को प्रस्तावित अपना मार्च वापस ले लिया है। जेपी नड्डा ने सीजेपी के इस कदम का स्वागत किया और कहा, 'इसी भावना के साथ हमने भाजपा शासित राज्यों के साथ भी चर्चा की। अब हम अपना आश्वासन पूरा करने जा रहे हैं। हम दिल्ली में पांच सितंबर के प्रदर्शन वापस लेने के सीजेपी के फैसले का स्वागत करते हैं।'
20 जून को नीट पेपर लीक के खिलाफ सीजेपी ने अपना आंदोलन शुरू किया था। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा प्रमुख मांग थी। इस्तीफे के बाद 25 जुलाई को सीजेपी ने अपना आंदोलन खत्म करने का ऐलान किया था। उस वक्त जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सीजेपी नेताओं के साथ वार्ता की थी। प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआईआर और नीट-यूजी की परीक्षा के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिजनों को मुआवजा देने पर सहमति बनी थी।
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20 जुलाई को सीजेपी ने 'चलो संसद' का आह्वान किया था। इस दौरान सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों में हिंसक झड़प हुई थी। दिल्ली पुलिस ने भीड़ पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों की बरसात की। विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की और सरकार को कटघरे में खड़ा किया। कुछ दिन पहले ही सीजेपी नेताओं ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया और कहा कि 25 जुलाई को किए गए वादों को पूरा नहीं किया जा रहा। इसके बाद 5 सितंबर को दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक मार्च का ऐलान किया था।