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कपास की खेती छोड़ रहे किसान! कम होती बुवाई के पीछे क्या है असली वजह?

देश में सूखे के कारण कपास के घरेलू उत्पादन में बहुत भारी कमी आई है। खपत में बढ़ोतरी को देखते हुए केंद्र सरकार ने कपास के आयात पर सीमा शुल्क में छूट की अवधि बढ़ा दी है। सरकार ने ड्यूटी फ्री कपास के आयात की अवधि 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दी है।

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प्रतीकात्मत तस्वीर, Photo Credit- Social Media

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देश में सूखे के कारण कपास के घरेलू उत्पादन में भारी कमी आई है। इस साल को मांग को देखते हुए यह कयास लगाए जा रहे हैं कि खपत में बढ़ोतरी होने की संभावना है। कपड़ा उद्योग की मांग को देखते हुए केंद्र सरकार ने कपास के आयात पर सीमा शुल्क में छूट की अवधि भी बढ़ा दी है। इसके चलते 2026-27 के चालू मार्केटिंग सीजन में कपास का आयात बढ़कर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान है। केंद्र सरकार ने ड्यूटी फ्री कपास के आयात की अवधि 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दी है।

 

कपास उत्पादक प्रमुख राज्यों महाराष्ट्र और कर्नाटक में बारिश की कमी और खेती के रकबे में गिरावट के कारण देश में कपास का उत्पादन घटने की आशंका जताई जा रही है। व्यापारिक अनुमानों के मुताबिक, 2026-27 में भारत का कपास उत्पादन 2.9 करोड़ गांठ से नीचे रह सकता है जबकि घरेलू मांग 3.4 करोड़ गांठ से अधिक रहने का अनुमान है। इससे विदेशी कपास के आयात पर देश की निर्भरता बढ़ सकती है।

 

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आयात 71 लाख गांठ के पार जाने का अनुमान

उद्योग और व्यापार क्षेत्र के विश्लेषकों का कहना है कि 2025-26 के मार्केटिंग सीजन में कपास का आयात बढ़कर 71 लाख गांठ ( प्रत्येक गांठ 170 किलोग्राम का होता है) पर पहुंच गया। साल 2026-27 में कपास का आयात इसके बराबर या इससे अधिक हो सकता है। कस्टम ड्यूटी में छूट मिलने से टेक्सटाइल मिलों को अच्छी गुणवत्ता वाली रूई का आयात प्रतिस्पर्धी कीमतों पर बढ़ाने में मदद मिलेगी। आपको बता दे कि भारत में 2024-25 सीजन के दौरान लगभग 41 लाख गांठ रूई का आयात हुआ था। यह 2025-26 के सीजन में 30 लाख गांठ बढ़कर 71 लाख गांठ पर पहुंच गया।

कपास आयात में 63 फीसदी की बढ़ोतरी

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में भारत का कपास आयात सालाना आधार पर 63 फीसदी बढ़कर 1.1 अरब डॉलर हो गया है। शुल्क में छूट की अवधि बढ़ने से अमेरिका, ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से कपास का आयात और बढ़ने की संभावना है।

 

आयात शुल्क में छूट बढ़ने से कपड़ा मिलों को सस्ता कच्चा माल उपलब्ध कराने और उनकी उत्पादन लागत कम करने में मदद मिल सकती है। दूसरी ओर, सस्ते आयात से घरेलू कपास की कीमतों पर दबाव पड़ने की आशंका है। इसका असर किसानों को मिलने वाले मूल्य पर पड़ सकता है।

नई फसल के बावजूद कीमतों में तेजी

आमतौर पर अक्टूबर में नई फसल को आने की शुरू होने के बाद कपास की कीमतों में नरमी आती है लेकिन इस साल कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। घरेलू बाजार में कपास की कीमतें 9,000 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर चल रही हैं। वहीं, 2026-27 सीजन के लिए सरकार ने मध्यम रेशे वाली कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 8,267 रुपये और लंबे रेशे वाली कपास का 8,667 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।

कपास आयात पर 11 फीसदी शुल्क से छूट

सरकार ने 30 मई 2026 को कपास के आयात पर सीमा शुल्क में अस्थायी छूट देने की घोषणा की थी। यह छूट 1 जून से 31 अक्टूबर 2026 तक के लिए लागू की गई थी। इसके तहत कपास के आयात पर लगने वाले 11 फीसदी सीमा शुल्क से राहत दी गई थी।

 

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अब सरकार ने कपास के आयात पर सीमा शुल्क में छूट की अवधि दो महीने बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 तक कर दी है। इस कदम से टेक्सटाइल उद्योग की उत्पादन लागत कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि, कपास की नई फसल के आने के दौरान ड्यूटी फ्री आयात जारी रखने का फैसला किसानों के हितों के खिलाफ साबित हो सकता है।


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