ईरान पर हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा पर सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस के बाद अब ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इजरायल पर पीएम मोदी की यात्रा का ईरान के खिलाफ हमले में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। ओवैसी का कहना है कि इजरायल ने ईरान पर हमला करके भारत को धोखा दिया है। भारत को इस हमले से क्या हासिल होगा?
शनिवार की सुबह इजरायल ने ईरान के कई शहरों पर भीषण बमबारी की। इसी घटना पर हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पूछा, अगर प्रधानमंत्री का एयरक्राफ्ट हवा में होता और और ऐसा हमला होता तो फिर इसका जिम्मेदार कौन होता।'
ओवैसी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री को देश को बताना चाहिए कि क्या नेतन्याहू ने उनको यह बताया था कि इजरायल ईरान पर हमला करने वाला है। अगर बताया था तो फिर प्रधानमंत्री को चाहिए था कि फौरन इजरायल का दौरा खत्म करके देश वापस आना चाहिए था। मैं यह बात इसलिए कह रहा हूं कि अटल बिहारी वाजपेयी 1979 में चीन गए थे। जब वियतनाम पर हमला हुआ तो अटल बिहारी वाजपेयी देश वापस आ गए थे।
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'इजरायल ने हमको धोखा दिया है'
ओवैसी यह भी कहा कि अगर इजरायल ने नहीं बताया था कि वह यूएस के साथ मिलकर ईरान पर हमला कर रहा है तो इजरायल ने हमको धोखा दिया है। भारत की 133 करोड़ की जनता को इजरायल ने धोखा दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री की यात्रा का इस्तेमाल किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री के दौरे का इस्तेमाल ईरान पर हमला करने और गाजा में फिलिस्तीनियों के नरसंहार को छिपाने के लिए किया है। इससे यह संदेश जाएगा कि भारत ईरान के साथ नहीं, इजरायल के साथ खड़ा है। भारत को इस हमले से क्या हासिल हो रहा है।
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कांग्रेस ने भी साधा निशाना
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी पीएम मोदी की इजरायल यात्रा पर सवाल उठाया। उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा, 'प्रधानमंत्री मोदी के इजरायल दौरे का खुशी मनाने के दो दिन बाद ही इजरायल और अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपना संयुक्त हमला शुरू कर दिया है। पिछले कुछ महीनों में उनके सैन्य जमावड़े को देखते हुए यह पूरी तरह अपेक्षित था। इसके बावजूद पीएम मोदी ने इजरायल जाने का निर्णय लिया, जहां उन्होंने उच्चतम स्तर की नैतिक कायरता का प्रदर्शन किया। उन्होंने घोषणा किया कि भारत इजरायल के साथ खड़ा है और ऐसा कहने पर स्वयं को एक पुरस्कार भी दिलवा दिया। यह इजरायल दौरा शर्मनाक था और अब तो यह और भी अधिक शर्मनाक प्रतीत होता है, क्योंकि युद्ध उन्हीं दो नेताओं ने शुरू किया, जिन्हें प्रधानमंत्री मोदी अपना अच्छा मित्र बताते रहे हैं।'