बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में भारत लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को भेजेगा। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के चेयरमैन तारिक रहमान मंगलवार को ढाका में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। बीएनपी ने हाल ही में हुए 2026 के आम चुनाव में भारी बहुमत से जीत हासिल की है।
यह चुनाव बांग्लादेश के लिए बहुत खास है। यह 2024 में छात्रों के बड़े आंदोलन के बाद पहला आम चुनाव था। उस आंदोलन में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। हसीना को सुरक्षा कारणों से भारत में शरण लेनी पड़ी और वे अभी भी भारत में हैं। हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनाव में हिस्सा लेने से रोका गया था।
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मिला दो-तिहाई बहुमत
बीएनपी ने संसद की 299 सीटों में से 212 सीटें जीतीं। यह दो-तिहाई से ज्यादा बहुमत है। तारिक रहमान ने ढाका-17 और बोगुरा-6 दोनों सीटों से जीत दर्ज की। वह 17 साल तक लंदन में निर्वासन में रहे थे। दिसंबर 2025 में वे वापस लौटे और अब प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। यह उनके और बीएनपी के लिए बड़ी सफलता है।
तारिक रहमान ने जीत के बाद एकता की अपील की। उन्होंने कहा कि यह जीत लोकतंत्र के लिए बलिदान देने वालों को समर्पित है। अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने भी उन्हें बधाई दी। यूनुस की अंतरिम सरकार अब इस्तीफा देगी और नई सरकार को सत्ता सौंपेगी।
13 देशों के नेताओं को निमंत्रण
समारोह राष्ट्रीय संसद के साउथ प्लाजा में होगा। बांग्लादेश ने 13 देशों के नेताओं को निमंत्रण भेजा था, जिसमें भारत भी शामिल है। भारत की ओर से लोकसभा स्पीकर ओम बिरला जाएंगे। उनके साथ विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी होंगे। यह फैसला रविवार को लिया गया।
भारत और बांग्लादेश के रिश्ते में पिछले कुछ समय से उतार-चढ़ाव आए हैं। 2024 में हसीना के भारत आने के बाद संबंधों पर असर पड़ा। अब बीएनपी की सरकार आने से दोनों देशों के बीच नए सिरे से बातचीत होगी। भारत ने हमेशा कहा है कि वह बांग्लादेश के साथ मजबूत दोस्ती चाहता है। ओम बिरला की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि भारत लोकतंत्र और पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना चाहता है।
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17 फरवरी को समारोह
यह समारोह 17 फरवरी 2026 को होगा। नए सांसद सुबह शपथ लेंगे और शाम को तारिक रहमान और उनकी कैबिनेट शपथ ग्रहण करेगी। बांग्लादेश के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि नई सरकार अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाएगी, रोजगार बढ़ाएगी और लोकतंत्र को मजबूत करेगी। चुनाव में युवा वोटरों ने बड़ी हिस्सेदारी की और बदलाव की मांग की।
बीएनपी की जीत से बांग्लादेश में राजनीतिक माहौल बदला है। अब देखना होगा कि नई सरकार कैसे काम करती है और भारत के साथ संबंध कैसे आगे बढ़ते हैं।