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दिल्ली से राज्यों तक पहुंचेगी महिला आरक्षण की आंच, BJP और विपक्ष का प्लान समझिए

महिला आरक्षण के मुद्दे पर बीजेपी और विपक्ष अब राज्यों की विधानसभा में आमने-सामने होगा। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश चुनाव में बीजेपी इस मुद्दे को मुखरता से उठाएगी।

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संसद से विशेष सत्र का दूसरा दिन। Photo Credit: Sansad TV

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लोकसभा में संविधान (131वां) संशोधन विधेयक गिरने के बाद अब इस सियासत की आंच दिल्ली से राज्यों तक पहुंचने लगी है। भारतीय जनता पार्टी और विपक्ष एक दूसरे पर वार कर रहे हैं। दोनों एक दूसरे को महिला विरोधी साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। संसद का सत्र खत्म होने के साथ ही आरक्षण की यह लड़ाई अब देश की सड़कों पर लड़ी जा रही है। वहीं, बीजेपी अब इस लड़ाई को राज्यों की विधानसभाओं तक ले जाने का मन बना चुकी है। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नबीन ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों से महिला आरक्षण पर चर्चा के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने को कहा है। 

 

हरियाणा कैबिनेट की बुधवार को गुरुग्राम में हुई बैठक में विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 27 अप्रैल को बुलाने का फैसला लिया गया है। इस सत्र में कांग्रेस पार्टी के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया जाएगा। हरियाणा विधानसभा में इस सत्र में हंगामा देखने को मिल सकता है। बीजेपी की रणनीति जनता को यह समझाने की है कि कांग्रेस ने सदन में महिला आरक्षण संबंधित बिल पारित नहीं होने दिया। हरियाणा के बाद अब तमाम बीजेपी शासित राज्य विधानसभा के विशेष सत्र बुलाकर कांग्रेस और विपक्षी दलों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाएंगे। 

 

यह भी पढ़ें: 'कांग्रेस, सपा, TMC के कृत्य महिला विरोधी...', विपक्ष के खिलाफ सड़क पर उतरी BJP

बीजेपी की रणनीति 

बीजेपी महिला आरक्षण के मुद्दे को आसानी से छोड़ने के मूड में दिखाई नहीं दे रही है। कुछ लोग कह रहे हैं कि यह मुद्दा सिर्फ मौजूदा राज्यों खासकर पश्चिम बंगाल में हो रहे चुनावों को प्रभावित करने के लिए इस मुद्दे को उठाया है। हालांकि, बीजेपी इस मुद्दे को लेकर अब पूरे देश में मुखर हो रही है। इस बिल के संसद में गिरने के बाद कांग्रेस के खिलाफ बीजेपी ने दिल्ली में मोर्चा खोला। दिल्ली में राहुल गांधी के घर के बाहर महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इसके बाद तमाम राज्यों में बीजेपी और संबंधित संगठनों ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस और विपक्ष के खिलाफ प्रदर्शन किया। 

 

यूपी चुनाव में बनेगा मुद्दा

अगले साल देश के सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में चुनाव होंगे और महिला आरक्षण के मु्द्दे की आंच लखनऊ पहुंच चुकी है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मंगलवार को 'जनाक्रोश महिला पदयात्रा' निकाली। इस पदयात्रा की शुरुआत करते हुए मुख्मयंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के कृत्य महिला विरोधी हैं। पश्चिम बंगाल में चुनावी सभाओं में भी सीएम योगी विपक्ष को महिला विरोधी बता रहें। उत्तर प्रदेश में जगह-जगह बीजेपी के कार्यकर्ता कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के झंडे जला रहे हैं। 

 

बीजेपी 2027 के यूपी विधानसभा सी सक्रिप्ट में महिला आरक्षण का अध्याय जोड़ने का पूरा प्लान तैयार कर चुकी है। पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार थमने के बाद 28 अप्रैल को पीएम मोदी उत्तर प्रदेश पहुंचेगें। यहां पीएम मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में महिला सम्मेलन में शामिल होंगे। इसके जरिए महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के लोकसभा में पारित न होने देने को लेकर विपक्ष पर हमला करेंगे। 

इसके साथ ही बीजेपी शहरी निकायों में बोर्ड की बैठक बुलाकर इस मुद्दे पर निंदा प्रस्ताव पारित कराए जाने की योजना पर काम कर रही है। इसके ठीक बाद 30 अप्रैल को विधानमंडल का विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही पार्टी सोशल मीडिया पर माहोल बनाने की तैयारी कर रही है। 

 

यह भी पढ़ें: 'विपक्ष ने भ्रूण हत्या की, इसकी सजा जरूर मिलेगी', महिला आरक्षण पर बोले PM मोदी

विपक्ष की रणनीति

एक तरफ बीजेपी विपक्ष को घेरने का प्लान बना रही है तो दूसरी तरफ विपक्ष बीजेपी से सवाल कर रहा है। इस मुद्दे पर विपक्ष भी बीजेपी पर आक्रामक है। विधानसभा के विशेष सत्र में बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस और विपक्षी दल भी निंदा प्रस्ताव लाएंगे। इसके साथ ही राज्यों में कांग्रेस पार्टी बीजेपी के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। संसद सत्र के बाद टीएमसी जैसी पार्टियों ने बीजेपी पर कई सवाल उठाए। महिला प्रतिनिधित्व को लेकर विपक्ष का कहना है कि बीजेपी मौजूद 543 सीटों पर ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दे।

 

इसके साथ ही विपक्ष खासकर उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस अपने 2024 के ट्रंप कार्ड पीडीए को मजबूत करने में जुटे हैं। अखिलेश यादव ने तो संसद में मुस्लिम महिलाओं के लिए आरक्षण की भी मांग कर दी। विपक्ष यह मैसेज देने की कोशिश कर रहा है कि बीजेपी दक्षिण भारत और ओबीसी महिलाओं के अधिकारों को छिनने की कोशिश कर रही है। कुल मिलाकर यह मुद्दा बंगाल चुनाव से ज्यादा अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में उठाया जाएगा और विपक्ष और बीजेपी दोनों इसके लिए रणनीति बना चुके हैं। 


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