मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर मचे घमासान के बीच शनिवार को निर्वाचन आयोग ने बड़ी बैठक करके विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों से खुद का बचाव किया। इस बैठक में ज्ञानेश कुमार के साथ में दोनों चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी शामिल थे। मगर, आयोग की बैठक के फौरन बाद बीजेपी ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कांग्रेस और विपक्षी दलों पर हमला बोला।
बीजेपी सांसद और प्रवक्ता संबित पात्रा ने भुवनेश्वर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि एक राजनीतिक दल होने के नाते, यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम जनता और देश के सामने यह सबूत रखें कि कांग्रेस पार्टी अपने फायदे के लिए कैसे संवैधानिक संस्था पर हमला कर रही है। हमें यह बताया चाहिए कि कांग्रेस कैसे संस्थाओं को कमजोर करने और उनकी विश्वसनियता को खत्म करने की कोशिश कर रही है।
चुनाव आयोग के अंदर आम सहमति की कमी
उन्होंने कहा कि आज चुनाव आयोग की तरफ से सार्वजनिक मंच पर जारी की गई प्रेस रिलीज के बारे में, सबसे खास बात आयोग और एक राजनीतिक पार्टी, खासकर बीजेपी पर लगाए गए आरोपों से जुड़ी है। इन आरोपों से पता चलता है कि चुनाव आयोग के अंदर आम सहमति की कमी है, जिसका मतलब है कि तीनों कमिश्नर एक नहीं थे और यह इशारा करता है कि मामला इतना गंभीर हो गया था कि यह कैबिनेट सेक्रेटरी तक पहुंच गया, जिन्हें दखल देने के लिए मजबूर होना पड़ा।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग को कमजोर करने की कोशिश की
CEC ज्ञानेश कुमार विवाद पर संबित पात्रा ने कहा, 'कई विपक्षी पार्टियों सहित खासकर कांग्रेस पार्टी ने भारत के चुनाव आयोग और बीजेपी पर जबरदस्त हमला किया है। उन्होंने चुनाव आयोग और बीजेपी के बीच मिलीभगत का आरोप लगाया और दावा किया कि भारत के लोकतंत्र से समझौता किया जा रहा है। उन्होंने (BJP) इस बात पर जोर दिया कि कैसे कांग्रेस ने हाल ही में चुनाव आयोग को कमजोर करने की कोशिश की थी और कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया को मंजूरी दी थी। इसके अलावा, चुनाव आयोग ने राज्यों के लिए जो प्रक्रिया शुरू किया था उसे तीनों चुनाव कमिश्नरों ने एकमत से मंजूरी दी थी।'
SIR
तीनों कमिश्नरों के साइन से
बीजेपी सांसद संबित ने कहा, 'कांग्रेस पार्टी ने इसे असहमति के तौर पर दिखाया, जबकि चुनाव आयोग के पत्र से अब साफ पता चल गया है कि SIR तीनों कमिश्नरों के साइन और पूरी सहमति से किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने SIR के पक्ष में फैसला सुनाया। जब मामला कैबिनेट सेक्रेटरी के पास गया, तब भी यह कोई पॉलिसी का मामला नहीं था। इसके बावजूद, जिस तरह से कांग्रेस ने हमला करने की कोशिश की है, उससे साफ पता चलता है कि पार्टी में मैच्योरिटी की कमी है साथ ही संविधान को कमजोर करने की नापाक कोशिश भी है।'
संबित पात्रा ने कहा, '2014 से कांग्रेस का इतिहास देखें तो ऐसा कोई संस्थान नहीं है जिस पर पार्टी ने हमला न किया हो। भारत में किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी ने भारतीय सेना पर हमला नहीं किया है। लेकिन कांग्रेस और उसकी कुछ साथी सैटेलाइट पार्टियों ने सच में सेना पर हमला किया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट, एपेक्स कोर्ट के जजों पर भी हमला किया है, उन्हें 'कठपुतली' कहकर।
राहुल गांधी
सत्ता हासिल नहीं कर पा रहे हैं और सिर्फ इसी वजह से वह चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कर रहे हैं। आज चुनाव आयोग के जारी पब्लिक स्टेटमेंट के आखिरी पेज पर एक फोटो है जिसमें तीनों कमिश्नर एक साथ बैठे हुए दिख रहे हैं। चुनाव आयोग पर जो हमले हो रहे थे आज सच साफ सामने आ गया है।'