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301वीं रैंक पर विवाद खत्म, UPSC ने ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती का दावा किया खारिज

UPSC परीक्षा में एक ही नाम की दो छात्राओं का 301वीं रैंक पर दावा करने के बाद पैदा हुए भ्रम को आयोग ने सामने आकर खत्म कर दिया है। साथ ही आयोग ने असली उम्मीदवार के नाम की पुष्टि कर दी है।

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UPSC, Photo Credit- Social Media

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यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2026 के नतीजों के बाद एक घटना सामने आई जिसमें 'आकांक्षा सिंह' नाम की दो अलग-अलग उम्मीदवारों ने 301वीं रैंक मिलने का दावा किया। इनमें से एक बिहार के आरा की रहने वाली हैं तो दूसरी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की। दोनों ही मीडिया के सामने अपना एडमिट कार्ड लेकर आईं, जिससे काफी भ्रम फैल गया था।

 

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने एक आधिकारिक बयान जारी किया है। आयोग ने साफ कर दिया है कि असली रैंक होल्डर गाजीपुर (यूपी) की रहने वाली आकांक्षा सिंह हैं। इस स्पष्टीकरण के साथ ही पिछले कुछ दिनों से चल रहे पहचान का यह विवाद पर अब पूरी तरह से खत्म हो गया है।

 

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गाजीपुर की आकांक्षा का दावा

गाजीपुर के अभयपुर गांव की रहने वाली आकांक्षा सिंह, जो रंजीत सिंह और नीलम सिंह की बेटी हैं, ने सोशल मीडिया पर पहले ही अपनी पहचान चोरी होने की बात कही थी। उन्होंने फेसबुक पर अपने असली दस्तावेज और ई-समन शेयर करते हुए लिखा था कि कोई और उनके नाम और रैंक का इस्तेमाल कर रहा है। अंततः आयोग के बयान ने उनकी बात पर मुहर लगा दी है।

आरा की दूसरी उम्मीदवार का दावा

दूसरी तरफ, बिहार के आरा की रहने वाली आकांक्षा सिंह ने भी अपनी जीत का दावा किया था। वह रणवीर सेना के संस्थापक ब्रह्मेश्वर मुखिया की बेटी हैं। उन्होंने मीडिया को बताया था कि यह उनका दूसरा प्रयास था और उन्होंने अपने दादाजी का सपना पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत की थी। हालांकि, सरकारी स्पष्टीकरण के बाद उनका दावा गलत साबित हुआ है।

 

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परीक्षा के मुख्य बिंदु

UPSC 2026 की मुख्य परीक्षा के नतीजे 6 मार्च को घोषित किए गए थे। इस साल कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है, जिन्हें IAS, IFS और IPS जैसी सेवाओं के लिए चुना गया है। दोनों उम्मीदवारों का नाम एक जैसा होना और दोनों के पास एडमिट कार्ड का होना इस पूरे कन्फ्यूजन की मुख्य वजह रही।

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