हाल ही में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने अयोध्या के राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे के पैसों के गायब होने के रोप लगाए थे। उनके इस आरोप के बाद कई तरह के सवाल खड़े हुए तो मंदिर प्रबंधन का काम देखने वाले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से जवाब दिया गया। ट्रस्ट ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि पाई-पाई का लिखित हिसाब है। अब इसी ट्रस्ट के एक पूर्व कर्मचारी ने दावा किया है कि जब वह पैसों से जुड़ा काम देखते तो पाया था कि लाखों रुपयों की हेरफेर हो रही है। उन्होंने यह भी कहा है इसकी सूचना देने के बाद ही उन्हें उस काम से हटा दिया गया था।
इसी मामले पर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने भी कहा था कि समय-समय पर इंटरनल ऑडिट होता है और मौजूदा वक्त में भी हो रहा है। हालांकि, गड़बड़ी के आरोपों को खारिज करते हुए चंपत राय ने कहा था कि अभी तक कोई उल्लेखनीय बात सामने नहीं आई है। हालांकि, अब ट्रस्ट के ही पूर्व कर्मचारी महिपाल सिंह के बयान के बाद यह मुद्दा और तेज होने के कयास लगाए जाने लगे हैं।
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इसी मामले पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष और केंद्र सरकार में राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने कहा है कि सरकार इसकी जांच करवा रही है। उनका यह भी कहना है कि यह सीधे तौर पर सरकार नहीं ट्रस्ट का विषय है लेकिन अगर कोई दोषी पाया जाएगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
क्या बोले महिपाल सिंह?
इस ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिला पाल सिंह ने एक यूट्यूब चैनल 'द रेड माइक' से बातचीत की है। इसी बातचीत में महिपाल सिंह ने कई आरोप लगाए हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि पैसों को लेकर हो रही गड़बड़ी की बात उन्होंने चंपत राय को बताई थी। उनका कहना है कि इसकी सूचना देने के बाद उन्हें पैसे गिनने के काम से अलग करके दूसरे व्यक्ति को वह जिम्मेदारी दे दी गई। इतना ही नहीं, उनका कहना है कि जब उन्हें हटाया गया तो पिछले कई महीनों के CCTV फुटेज भी डिलीट करवा दिए गए।
इसी बातचीत सिंह में महिपाल सिंह ने कहा है, 'श्रीराम जन्मभूमि के लिए जब निधि संग्रह का काम शुरू हुआ तब मैंने काम संभाला और मेरा काम देखकर ही मुझे अयोध्या बुलाया गया था। मैं अयोध्या गया तो 21 हजार ऐसी रसीदें जारी होनी थीं जो 7-8 महीने से जारी नहीं हो पा रही थीं। मुझे चंपत राय ने कहा कि आप रसीदें जारी करें। वहां विग्रह के सामने बनी पुलिस चौकी में कैश काउंटिंग का एक कमरा था जिसमें CCTV वगैरह लगे थे। मुझे उसका प्रभारी बनाया गया। नोट की सॉर्टिंग करने के लिए 14 लोग आते थे। बैंक के भी दो अधिकारी थे। यही लोग गड्डियां बनाते थे और फिर पैक किया जाता था।'
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'हर बक्से में लाखों की गड़बड़ी'
उन्होंने आगे कहा, 'इन लोगों को 10-10 की गड्डियां बनानी होती थी लेकिन 12-13 की बनाते थे। शाम को वाउचर बनता था तो उसमें 10 लिखते थे। इस तरह अगर उन्होंने 12 लाख पैक किया तो 9 लाख, 10 लाख का वाउचर बनता था। मैं अपने कमरे में आ जाता था और दूसरी तरफ से गाड़ी आती थी जिसमें रखकर पैसे ले जाता था। वाउचर पर टिन्नू के साइन होते थे। जो अतिरिक्त पैसा जाता था उसकी बंदरबांट कैसे होती थी यह मुझे पता नहीं है।'
खुलासे की बात बताते हुए महिपाल सिंह ने कहा, 'जब मुझे इसकी बात पता चली तो मैंने एक दिन बक्सा खुलवाया। उसमें वाउचर से 5 लाख रुपये ज्यादा थे। मैंने यह बात चंपत राय और गोपाल भाई साहब को बताई। उसके बाद गणना प्रक्रिया से मुझे हटाकर दूसरे आदमी को लाया गया। उस आदमी को लाने से पहले पिछले 7-8 महीनों के सीसीटीवी फुटेज को डिलीट करा दिया गया। उस समय 10 चेस्ट थे जिसमें सोने-चांदी के सिक्के डाले जाते थे। उसे टिन्नू ले जाता था और उसकी कभी कहीं कोई एंट्री नहीं होती थी। मैंने उससे पूछा भी लेकिन उसने कहा कि धातु से क्या बनेगा, यह भाई साहब देखेंगे।'
'मेरी पार्टी बीजेपी, RSS वैचारिक परिवार'
महिपाल सिंह ने आगे कहा है, 'अभी जो हो रहा है, वह रामजी की इच्छा है, वह खुद ही कर रहे हैं। मैं तो प्रार्थना करता था कि हे ईश्वर अपनी रक्षा खुद ही कर लो तब अच्छा है। उस वक्त जब मैंने चंपत राय जी से पूछा था तो उन्होंने कहा था कि देश भी खतरे में नहीं है और ट्रस्ट का काम भी ठीक चल रहा है तो शायद तुम घर लौटना चाहते हो तो तुम जा सकते हो।' महिपाल के मुताबिक, यह घटना 2021-22 की है, जब राम मंदिर का निर्माण हो रहा था।
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आरोप लगाने वाले महिपाल होगा कि आगे जो होगा, वह देख लेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में महंत दिनेंद्र दास का फोन उन्हें आया था और उन्होंने कहा कि अब मेरी बताए मुद्दे प्रकट हो रहे हैं। महिपाल का कहना है कि वह किसी राजनीतिक पार्टी से प्रेरित नहीं हैं लेकिन उनका वैचारिक परिवार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ है और उनकी पार्टी बीजेपी है।
महिपाल सिंह ने बताया है कि वह जनवरी 2021 से जुलाई 2022 तक राम मंदिर ट्रस्ट में काम कर रहे थे लेकिन मार्च 2022 में ही उनसे पैसे गिनने वाला काम हटा लिया गया था। कानूनी विवाद होने की आशंका पर महिपाल सिंह का कहना है कि आगे जो कुछ भी होगा, वह उससे निपट लेंगे।