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2 मांगों पर सहमति, इस्तीफे पर टकराव, CJP-सरकार में कैसे बनेगी बात?

कॉकरोच जनता पार्टी की दो मांगों को केंद्र सरकार ने स्वीकार किया है। NTA में व्यापक सुधार का भरोसा दिया गया है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बात फंस रही है।

CJP Leadership with JP Nadda

जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ कॉकरोच जनता पार्टी का प्रतिनिधिमंडल। Photo Credit: ANI

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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में आंदोलनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं। उन्होंने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। अगर मंत्री इस्तीफा नहीं देते या उन्हें हटाया नहीं जाता तो सीजेपी संसद की ओर मार्च निकालेगी। सरकार की तरफ से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने सीजेपी के प्रवक्ताओं से बातचीत की। 

सरकार ने 24 घंटे का समय मांगा, लेकिन सूत्रों के मुताबिक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देने का कोई इरादा नहीं है। सरकार का रुख साफ है कि किसी भी प्रदर्शनकारी समूह के दबाव में झुकना ठीक नहीं। ऐसा करने से कल कोई और समूह दूसरे मंत्रियों या प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग करेगा।

CJP को तीसरी बैठक से क्या उम्मीद है?


कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा, 'कल की बैठक में मुआवजे और कानूनी मामलों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। सैद्धांतिक रूप से सहमति बनी। हमें उम्मीद है कि आज वह लिखित समझौता भी मिल जाएगा। लेकिन मुख्य मांग, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े को लेकर कोई ठोस फैसला नहीं हुआ है।'

धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देंगे? CJP जिद पर अड़ी

आशुतोष रांका ने कहा, 'हमने मुख्यधारा की मीडिया में देखा कि सूत्रों का कहना था कि प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे। अगर प्रधान इस्तीफा नहीं देते हैं तो हमें बता दें। फिर इस तरह की बैठक का कोई मतलब नहीं है। हम अपनी भविष्य की रणनीति पर काम करेंगे। अगर सरकार का रवैया ऐसा ही रहा तो हम कड़ा रुख अपनाने को मजबूर होंगे।'

 

यह भी पढ़ें: सरकार से क्या बात हुई? CJP नेताओं का पहला बयान आया सामने

सरकार ने पेपर लीक के खिलाफ क्या कदम उठाए?

NEET परीक्षा के पेपर लीक होने के बाद सीजेपी ने आंदोलन शुरू किया था। सरकार ने शुक्रवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया। परीक्षा प्रक्रिया को और मजबूत बनाने के लिए बड़े बदलाव किए जा रहे हैं।

किन मुद्दों पर CJP के साथ बनी है सहमति?

सरकार ने CJP को बताया कि प्रदर्शनकारियों पर 20 जुलाई की घटना की वजह से FIR नहीं होगी। NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने पर भी विचार किया जा रहा है। सरकार 1 करोड़ रुपये के मुआवजे का ऐलान नहीं करना चाहती, क्योंकि इससे गलत मिसाल न बने और अदालत में टिक सके। जिला मजिस्ट्रेट हर परिवार का केस देख रहे हैं। 

यह भी पढ़ें: 'कोई याचिका नहीं आई, मीडिया ने झूठ बोला', CJP प्रदर्शन पर बोले मुख्य न्यायाधीश

नए कानून में क्या कवायद की गई है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात वीडियो जारी कर पेपर लीक पर सख्त कानून बनाने की घोषणा की थी। शुक्रवार को कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी। नया बिल पेपर लीक करने वालों को 10 साल तक जेल और ₹10 करोड़ तक जुर्माना लगा सकता है। पेपर लीक के मामलों की जांच 2 महीने में और ट्रायल 3 महीने में पूरा करने का प्रावधान है। पूरे केस 5 महीने में निपट जाएंगे। फास्ट-ट्रैक कोर्ट को कानूनी दर्जा मिलेगा। यह बिल सोमवार को संसद में पेश किया जा सकता है।

प्रदर्शनों का संसद सत्र पर असर क्या है?

मॉनसून सत्र का पहला हफ्ता लगभग बेकार चला गया है। विपक्ष भी कह रहा है कि प्रधान के इस्तीफे के बिना NEET मुद्दे पर चर्चा नहीं होगी। सरकार अब विपक्ष पर दबाव बनाने की तैयारी में है। सरकार सत्र चलाना चाह रही है, विपक्ष इसके लिए तैयार नहीं है। CJP की मांग है कि धर्मेंद्र प्रधान हर हाल में अपने पद से इस्तीफा दें, वहीं सरकार सख्त कानून के दावे कर रही है। दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पा रही है। 


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