हाल ही में देश के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव के नतीजे आए हैं। केरल, तमिनलाडु और पश्चिम बंगाल में सरकार बदल गई है और असम में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने फिर से जीत हासिल की है। चार में से तीन राज्यों में मुख्यमंत्री ने ही अपने पास गृह विभाग रखा है। सिर्फ केरल में ऐसा हुआ है कि मुख्यमंत्री वी डी सतीशन के बजाय रमेश चेन्निथला को गृहमंत्री बनाया गया है। मौजूदा वक्त में देश के सिर्फ पांच राज्य ऐसे हैं जहां गृह विभाग मुख्यमंत्री के पास नहीं हैं। इनमें से तीन राज्य गैर बीजेपी शासित हैं। ये राज्य केरल, कर्नाटक और पंजाब हैं जहां मुख्यमंत्री के अलावा किसी दूसरे मंत्री को गृह विभाग सौंपा गया है। साल 2024 की नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट बताती है कि उस साल जिन 5 राज्यों में गृह विभाग मुख्यमंत्री के अलावा किसी और के पास था उनमें से 4 राज्य में संज्ञेय अपराध की दर राष्ट्रीय औसत 237.4 से कम थी।
आमतौर पर यह देखा जाता है कि मुख्यमंत्री गृह विभाग अपने ही पास रखते हैं। गृह विभाग अक्सर तभी किसी दूसरे नेता को दिया जाता है जब दूसरे नंबर के नेता को बैलेंस करना हो या फिर गठबंधन सहयोगी बेहद मजबूत स्थिति में हो। पंजाब में आम आदमी पार्टी ने हरपाल चीमा को गृहमंत्री बनाया है। एक समय पर उन्हें डिप्टी सीएम बनाने की बात भी कही जा रही थी लेकिन उन्हें गृह विभाग देकर मनाया गया।
इसी तरह महाराष्ट्र में और बिहार में जब बीजेपी के गठबंधन सहयोगियों के पास मुख्यमंत्री पद था तो बीजेपी ने क्रमश: देवेंद्र फडणवीस और सम्राट चौधरी को गृहमंत्री बनाया। कर्नाटक में कांग्रेस ने सत्ता का बराबर बंटवारा किया था और सिद्धारमैया को सीएम, डी के शिवकुमार को डिप्टी सीएम और वरिष्ठ नेता जी परमेश्वर को गृहमंत्री बनाया था। बीजेपी ने छत्तीसगढ़ में संतुलन स्थापित करने के लिए दो डिप्टी सीएम बनाए थे। डिप्टी सीएम विजय शर्मा को ही छत्तीसगढ़ का गृह मंत्री भी बनाया गया।
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2024 में क्या थे हालात?
यहां यह स्पष्ट कर दें कि केंद्र शासित प्रदेशों जैसे कि दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर में कानून व्यवस्था उपराज्यपाल के हाथ में होती है। इसलिए हमने सिर्फ राज्यों का विश्लेषण किया है। साल 2024 में देश के 28 में से सिर्फ 5 राज्य ऐसे थे जहां मुख्यमंत्री के पास गृह विभाग नहीं था। बाकी के 23 राज्यों में मुख्यमंत्रियों ने ही गृह विभाग भी संभाले। जिन राज्यों में अलग गृहमंत्री थे उनमें से 3 में एनडीए, एक में काग्रेस और एक में आम आदमी पार्टी की सरकार थी। आंध्र प्रदेश में चल रही टीडीपी और बीजेपी गठबंधन सरकार में चंद्रबाबू नायडू ने गृह विभाग वी अनीता को दिया। मौजूदा वक्त में वह देश के सभी राज्यों को मिलाकर इकलौती महिला गृहमंत्री हैं। उनके अलावा, छत्तीसगढ़ में बीजेपी के विजय शर्मा, कर्नाटक में कांग्रेस के जी परमेश्वर, पंजाब में हरपाल चीमा और महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस को गृहमंत्री बनाया गया था।
अगर NCRB रिपोर्ट को देखें तो संख्या के हिसाब से छत्तीसगढ़ में साल 2024 में कुल 72410, कर्नाटक में 1,38,784, बिहार में 238753, महाराष्ट्र में 383044 और पंजाब में 47677 आपराधिक केस सामने आए। ये इंडियन पीनल कोड (IPC) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दर्ज हुए केस की संख्या है। जनसंख्या के हिसाब से राज्यों में आपराधिक मामलों की संख्या ज्यादा हो सकती है इसलिए प्रति एक लाख जनसंख्या के हिसाब से अपराध की दर निकाली जाती है। राज्यों में इसका औसत प्रति एक लाख जनसंख्या पर 237.4 केस था और अगर केंद्र शासित प्रदेशों को भी शामिल कर लें तो औसत 252.3 हो जाता है।

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मुख्यमंत्री खुद संभालें तो कैसा हाल?
अगर इन राज्यों में अपराध की दर देखें तो बिहार में 184.8, छत्तीसगढ़ में 236.3, कर्नाटक में 203.3, महाराष्ट्र में 300 और पंजाब में 153.8 थी। देश के 28 राज्यों में चार्जशीट फाइल करने की दर का औसत 75.6 है। अब अगर इन राज्यों में देखें तो पंजाब में चार्जशीट फाइनल करने की दर 68.7, महाराष्ट्र में 75.6, कर्नाटक में 74.6, छत्तीसगढ़ में 78.5 और बिहार में 73.4 है।
अब अगर बाकी राज्यों को देखें तो बड़े राज्यों में शामिल उत्तर प्रदेश में अपराध की दर 180.2, पश्चिम बंगाल में 158.3, तेलंगाना में 497.7, राजस्थान में 259.6, मध्य प्रदेश में 321.6 और हरियाणा में 368.5 थी। 28 में से 7 राज्य ऐसे थे जहां औसत अपराध दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा थी और इस 7 में से 6 राज्यों में गृह विभाग की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री के ही पास थी।

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SLL अपराध वाले केस
ऊपर हमने जितनी भी बात की वह IPS/BNS के तहत दर्ज किए गए मामलों की है। अगर स्पेशल एंड लोकल लॉ (SLL) के तहत दर्ज किए गए केस की बात करें तो साल 2024 में इन 28 राज्यों में अपराध की दर का राष्ट्रीय औसत 169.4 था। अब इन पांच राज्यों को देखें तो बिहार में अपराध की दर सिर्फ 87.8, छत्तीसगढ़ में 137.9, कर्नाचक में 87.2, महाराष्ट्र में 177.6 और पंजाब में 68.7 थी। यानी महाराष्ट्र को छोड़कर बाकी चार राज्यों में अपराध की दर राष्ट्रीय औसत से कम थी।
अब अगर बड़े राज्यों को देखें तो यह औसत राजस्थान में 102.4, उत्तर प्रदेश में 128.6, पश्चिम बंगाल में 22.9 केरल में 875.9, गुजरात में 619.4 और हरियाणा में 210.4 थी।