अगस्त में हर पर तैयार होने वाले खाने की लागत में बढ़ोतरी हुई है। क्रिसिल इंटेलिजेंस की मंगलवार को जारी मासिक रिपोर्ट के मुताबिक, शाकाहारी थाली की लागत सालाना आधार पर 1% बढ़कर 29.5 रुपये हो गई। वहीं, मांसाहारी थाली की कीमत 5% बढ़कर 57.5 रुपये पहुंच गई। हालांकि, जुलाई के मुकाबले अगस्त में नॉन-वेज ताली करीब 1% सस्ती रही।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में प्याज, खाद्य तेल और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी ने घरेलू खाने की लागत पर दबाव डाला है। दूसरी ओर, आलू और टमाटर के सस्ते होने से थाली की कुल लागत में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई। मांसाहारी थाली में चिकन महंगा होने के बावजूद जुलाई के मुकाबले अगस्त में इसकी लागत में गिरावट दर्ज की गई।
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प्याज ने बढ़ाया रसोई का खर्च
अगस्त में प्याज की कीमत सालाना आधार पर 43% बढ़कर 40 रुपये प्रति किलो हो गई। पिछले साल अगस्त में प्याज 28 रुपये किलो था। रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र में मार्च-अप्रैल के दौरान हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से प्याज की सप्लाई प्रभावित हुई। इसका असर अगस्त में इसकी कीमत पर दिखाई दिया। इसी दौरान खाद्य तेल की कीमत में 11% और
LPG
की कीमत में 10% की बढ़ोतरी हुई। इन चीजों के महंगे होने से घर में बनने वाले खाने की लागत बढ़ी।
जहां प्याज और तेल महंगे हुए, वहीं आलू और टमाटर की कीमतों में गिरावट ने राहत दी। अगस्त में आलू सालाना आधार पर 12% और टमाटर 28% सस्ता हुआ। इससे महंगी चीजों का असर कुछ कम हुआ और शाकाहारी थाली की लागत सालाना और मासिक आधार पर सिर्फ 1% बढ़ी। महीने-दर-महीने आधार पर अगस्त में प्याज की कीमत 17% बढ़ी, जबकि टमाटर 7% सस्ता हुआ। इस वजह से शाकाहारी थाली की लागत में ज्यादा बदलाव नहीं आया।
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जुलाई से सस्ती रही नॉन-वेज थाली
अगस्त में चिकन की कीमत सालाना आधार पर 10% बढ़ी। इसके चलते मांसाहारी थाली की लागत सालाना आधार पर 5% बढ़कर 57.5 रुपये हो गई। हालांकि, जुलाई में यह लागत 58.3 रुपये थी, यानी अगस्त में नॉन-वेज थाली करीब 1% सस्ती रही।
रिपोर्ट के मुताबिक, श्रावण महीने में चिकन की मांग कम होने से अगस्त में इसकी कीमत महीने-दर-महीने 4% घट गई। क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पुषन शर्मा ने कहा कि अगले दो-तीन महीनों तक प्याज की कीमें ऊंची रह सकती हैं। इसकी वजह रबी फसल की कम आपूर्ति और खरीफ फसल की आवक में देरी बताई गई है।