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टी ब्रेक, चालू फ्रायर, 30 मिनट की चुप्पी, दिल्ली अग्निकांड का सच आया सामने

दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल में आग लगने से 21 लोगों की मौत की जांच जारी है। इस मामले में पुलिस ने होटल के कुक को गिरफ्तार कर लिया है।

Delhi Fire accident

दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल में लगी आग। Photo Credit: PTI

दिल्ली के मालवीय नगर में बीते बुधवार 3 जून को एक अवैध बेड एंड ब्रेकफास्ट (B&B) में भीषण आग लग गई थी, जिसमें 21 लोगों की जान चली गई। इस हादसे ने दिल्ली ही नहीं बल्कि पूरे देश को दहला दिया था। इस हादसे के कुछ दिनों बाद अब जांच में कई बड़े खुलासे सामने आए हैं। इस मामले में अब जांच जारी है और जांच अब  उन घटनाओं की कड़ी पर घूम रही है जिन्होंने इस हादसे को इतना बड़ा बना दिया। इस हादसे को अब तक का दिल्ली में सबसे बड़े अग्निकांड में से एक बताया जा रहा है। 


पुलिस को शक है कि चाय पीने के लिए लिया गया ब्रेक, बिना निगरानी के चालू छोड़ा गया ऑयल फ्रायर और आग लगने के बाद समय रहते किसी को जानकारी न देना इस हादसे की मुख्य वजह रही हैं। इस मामले में पुलिस अब तक B&B के मैनेजर और कुक को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं होटल मालिक लवकेश बजाज के करीबी सहयोगी और अकाउंटेंट जय मिश्रा ने सोमवार को दिल्ली की एक कोर्ट में सरेंडर कर दिया।

 

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कैसे लगी आग?

4 जून को मालवीय नगर के हौज रानी इलाके स्थित फ्लोरिश स्टेज B&B में जब आग लगी तब इमारत के अंदर तीन कर्मचारी मौजूद थे। इनमें कुक केशव नेगी, ऊपरी मंजिल पर सो रहा एक हेल्पर और मैनेजर रूपेश उर्फ राकेश शामिल थे। शुरुआत में पुलिस को आशंका थी कि आग शॉर्ट सर्किट या गैस सिलेंडर फटने की वजह से लगी होगी, लेकिन जांच के बाद पुलिस ने बताया कि आग एक ऐसे ऑयल फ्रायर से शुरू हुई जिसे चालू छोड़ दिया गया था जबकि कुक चाय पीने चला गया था।

 

जांच में सामने आया कि फ्रायर में मौजूद तेल लगातार गर्म होता रहा और ऑटो इग्निशन तापमान तक पहुंचने के बाद उसमें खुद आग लग गई। इसके बाद आग छत तक पहुंच गई और तेजी से फैलने लगी। उस जगह पर कई ज्वलनशील पदार्थ रखे थे जिन्होंने तेजी से आग को पकड़ लिया। इससे आग तेजी से फैल गई। 

कुक ने क्या बताया?

पूछताछ के दौरान कुक केशव नेगी ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि उसने तेल वाला फ्रायर चालू किया और फिर अपने लिए चाय बनाई। चाय पीते समय वह भूल गया कि फ्रायर अभी भी चालू है। कुछ समय बाद फ्रायर ज्यादा गर्म हो गया और उसमें आग लग गई जो छत तक पहुंच गई और आसपास रखे सामान को अपनी चपेट में ले लिया।

 

जब कुक वापस लौटा तो उसने देखा कि तेल में आग लग चुकी है। पुलिस के अनुसार, उसने आग बुझाने की कोशिश की लेकिन जब आग काबू से बाहर हो गई तो वह वहां से भाग गया। पुलिस का आरोप है कि कुक के पास समय होने के बावजूद उसने न तो मेहमानों को चेतावनी दी, न पड़ोसियों को जानकारी दी और न ही इमरजेंसी सेवाओं को फोन किया।

देरी बनी त्रासदी

अब तक की जांच में सामने आया है कि आग लगने और फायर ब्रिगेड को पहली सूचना देने के बीच करीब 30 मिनट की देरी हुई। पुलिस का मानना है कि इसी देरी की वजह से आग फैलती रही और इस हादसे में 21 लोगों की जान चली गई। बता दें कि मृतकों में कई विदेशी नागरिक भी शामिल थे। 

 

जांच अधिकारियों के अनुसार अगर समय रहते लोगों को बाहर निकाला जाता और अधिकारियों को सूचना दी जाती तो नुकसान कम हो सकता था। बताया जा रहा है कि फ्रायर में आग लगने और पुलिस को पहली कॉल के बीच करीब आधे घंटे का अंतर था। पुलिस अब इस मामले की अलग-अलग एंगल से जांच कर रही है और देरी से फोन करना इस हादसे को बड़ी त्रासदी में बदलने की एक बड़ी वजह बताया जा रहा है। 

 एक सूत्र ने बताया कि आग के शुरुआती संकेत मिलने और पुलिस को पहली कॉल के बीच करीब आधे घंटे का अंतर था। अब जांच एजेंसियां इसी समय को विस्तार से खंगाल रही हैं क्योंकि समय पर निकासी और सूचना से हादसे का असर कम हो सकता था।

 

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अवैध थी इमारत?

जांच में यह भी सामने आया है कि इमारत ने भी इस हादसे को बड़ा बनाने में भूमिका निभाई हो सकती है। जांच एजेंसियों को शक है कि इमारत जरूरी मंजूरियों के बिना बनाई गई थी। इसके अलावा सीढ़ियों, छत और फर्श में लकड़ी और प्लास्टिक से बने सजावटी सामान का इस्तेमाल किया गया था जिससे आग तेजी से फैल गई। इसके साथ ही इमारत में एंट्री और एग्जिट के लिए एक ही प्वाइंट होने का दावा भी किया जा रहा है, जिसके कारण  धुआं और गर्मी वहां भर गई और वही रास्ता लोगों के लिए मौत का जाल बन गया, जिससे लोग बाहर नहीं निकल पाए। इस मामले ने दिल्ली की अन्य इमारतों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। 

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