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दिल्ली में 99% PG में नहीं है फायर NOC, सर्वे में निकलीं बड़ी सुरक्षा खामियां

दिल्ली नगर निगम ने शहर के 2,453 पीजी बिल्डिंगों का सर्वे किया, जिसमें पता चला कि सिर्फ 31 पीजी के पास फायर विभाग का NOC है। करीब 99 फीसदी पीजी बिना फायर सेफ्टी मंजूरी के चल रहे हैं।

Delhi PG Building Survey, MCD

सत्य निकेतन में PG हादसा के बाद की तस्वीर, Photo Credit-Chat GPT

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दिल्ली में पेइंग गेस्ट (पीजी) की सेफ्टी को लेकर एक चौंकाने वाला सर्वे सामने आया है। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने शहर भर में 2,453 पीजी बिल्डिंगों का सर्वे किया, जिसमें पता चला कि सिर्फ 31 पीजी के पास फायर विभाग का एनओसी यानी सुरक्षा प्रमाण पत्र है। इसका मतलब है कि लगभग 99 फीसदी पीजी बिना फायर सेफ्टी मंजूरी के चल रहे हैं। 

 

इसके अलावा, 30 फीसदी से भी कम पीजी के पास बिल्डिंग का सही नक्शा है और केवल 8 इमारतों के पास यह प्रमाण पत्र है कि उनकी संरचना मजबूत और सुरक्षित है। 6 सितंबर को हुए सत्य निकेतन हादसे के बाद  दिल्ली हाई कोर्ट ने MCD को फटकार लगाई और पूरे शहर में पीजी की जांच का आदेश दिया।  

 

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सर्वे में क्या सामने आया?

द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस सर्वे में दिल्ली नगर निगम (MCD) के सभी 12 इलाकों में बनी पीजी प्रॉपर्टीज को शामिल किया गया है। यह सर्वे 6 सितंबर को सत्य निकेतन में 5 मंजिला हॉस्टल गिरने के बाद किया गया। इस हादसे में 7 लोगों की मौत हुई थी। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने MCD को फटकार लगाई थी।

 

सर्वे में सामने आया कि दिल्ली में 2,453 पेइंग गेस्ट पीजी में से केवल 31 के पास फायर विभाग का एनओसी है। इसके अलावा, 30 फीसदी से भी कम के पास स्वीकृत भवन योजना है। केवल 8 इमारतों के पास संरचनात्मक स्थिरता प्रमाण पत्र है। सर्वे किए गए 2,453 पीजी में से सिर्फ 726 के पास मंजूर बिल्डिंग प्लान हैं। दिल्ली के कुछ बड़े छात्र इलाकों में स्थिति और भी साफ दिखती है।

 

सर्वे में सामने आया कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के नॉर्थ कैंपस वाले सिविल लाइंस इलाके में 608 पीजी हैं। इनमें से 364 के पास मंजूर बिल्डिंग प्लान, 28 के पास फायर NOC और 27 के पास नियमितीकरण की मंजूरी है। सर्वे में किसी भी पीजी के पास बिल्डिंग की मजबूती का सर्टिफिकेट नहीं मिला। 

किसी भी पीजी के पास नहीं ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट

इसके अलावा, केशव पुरम में 410 पीजी हैं। इनमें से सिर्फ 54 के पास मंजूर बिल्डिंग प्लान हैं और केवल 2 पीजी के पास फायर NOC और 2 के पास बिल्डिंग की मजबूती का सर्टिफिकेट है। वहीं, किसी भी पीजी के पास ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (यह प्रमाणित करता है कि भवन का निर्माण स्वीकृत नक्शे और नियमों के अनुसार हुआ है और यह रहने के लिए सुरक्षित व उपयुक्त है या नहीं) नहीं है।

 

वहीं दक्षिणी दिल्ली के इलाकों में स्थिति और भी खराब है। दिल्ली यूनिवर्सिटी का साउथ कैंपस, IIT दिल्ली और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के आसपास के क्षेत्र शामिल हैं। यहां सर्वे किए गए 390 पीजी में से किसी के पास भी दिल्ली फायर सर्विस की मंजूरी, बिल्डिंग की मजबूती का सर्टिफिकेट, मंजूर बिल्डिंग प्लान या ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट नहीं था।

 

MCD  के नियम के मुताबिक किसी भी पीजी के बिल्डिंग प्लान को दिल्ली के मास्टर प्लान और बिल्डिंग से जुड़े नियमों का पालन करना जरूरी है। फायर NOC यह बताता है कि बिल्डिंग में रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी फायर सेफ्टी नियमों का पालन किया गया है या नहीं।  


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