दिल्ली में पुलिस मुख्यालय के बाहर धरना देने वाले एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को गृहमंत्रालय ने निलंबित कर दिया है। उन्होंने निलंबित होने के बाद एक और वीडियो बनाया है। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक विभागीय कार्रवाई है, पुलिसकर्मियों का मुद्दे पर बात होनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई है कि उनका पक्ष सुना जाएगा।
मनस्वी वशिष्ठ ने कहा है कि उनका न तो मनोबल टूटा है, न ही मुद्दे के प्रति उनकी प्रतिबद्धता कम हुई है। उन्होंने कहा है कि पुलिसकर्मियों का ध्यान पुलिस के हितों के प्रति रहेगा। उन्होंने कहा है कि बेहतर जांच से ही सही बात सामने आ पाएगी।
निलंबित एसीपी मनस्वी वशिष्ठ:-
मैं आपको शुक्रिया कहना चाहता हूं। आपने संपर्क सभा में हिस्सा लिया, हमारी मुलाकात हुई, हमने बात खुलकर रखी। हमें यकीन है कि हमारी बातों पर अमल होगा, समाधान मिलेगा। मेरे निलंबन की बात सही है, मैं आहत नहीं हूं, मनोबल टूटा नहीं है।
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अब क्या करेंगे मनस्वी वशिष्ठ?
एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने कहा, 'मुझे लगता है कि हमारा सभी का फोकस है, सबकी प्रतिबद्धता और संकल्प है, बने रहना चाहिए। निलंबन गलत नहीं है, यह एक विभागीय कार्यवाही है। मुझे यकीन है कि एक बेहतर जांच होगी, सही फैसला आएगा। '
क्यों निलंबित हुए हैं मनस्वी वशिष्ठ?
दिल्ली के शाहदरा थाने में वकीलों और पुलिस कर्मियों के बीच झड़प के बाद दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन में शामिल हुए सहायक पुलिस आयुक्त मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2 नवंबर को यह आदेश जारी किया है।
मंत्रालय ने अपने आदेश में क्या कहा है?
मंत्रालय के आदेश में कहा गया है वरिष्ठ के खिलाफ विभागीय कार्यवाही प्रस्तावित है और इसी के मद्देनजर सक्षम प्राधिकारी ने केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम 1965 के तहत उन्हें निलंबित करने का आदेश जारी किया है। आदेश में कहा गया है कि निलंबन की अवधि के दौरान वशिष्ठ का मुख्यालय दिल्ली रहेगा और उन्हें सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी।
क्यों मुश्किलों में फंसे हैं सस्पेंडेड ACP मनस्वी वशिष्ठ?
शाहदरा थाने में पुलिस और वकीलों के बीच झगड़ा हुआ था। वकीलों ने कहा था कि मनस्वी वशिष्ठ ने पिस्टल दिखाई है, मारपीट की धमकी दी है। वकील इस बात से नाराज थे और प्रदर्शन कर रहे थे। वकीलों के अनिश्चितकालीन हड़ताल की अपील के बाद, गांधीनगर उपमंडल के एसीपी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के प्रभारी (एसएचओ) अरूण कुमार का तबादला कर दिया गया था। इसके बाद वकीलों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली थी।
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वकील VS पुलिस का यह केस शुरू कैसे हुआ?
दिल्ली की सभी जिला अदालतों के बार एसोसिएशन की समन्वय समिति के अनुसार, यह टकराव एक घटना के बाद शुरू हुआ था जिसमें वकील ललित बंसल को कथित हमले में सिर पर गंभीर चोट लगी थी, जिसके लिए शाहदरा थाने में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले में नामज़द लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर कई वकील 23 अक्टूबर की शाम थाने गए।
समिति ने दावा किया कि एसीपी और एसएचओ ने उन्हें आश्वासन दिया कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा जो उस वक्त थाने में ही मौजूद था। अगले दिन अधिवक्ताओं को पता चला कि आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है और उसे कथित तौर पर रिहा कर दिया गया है जिससे बार के सदस्यों ने आपत्ति जताई। समिति का कहना है कि वकील जब शाहदरा थाने पहुंचे तो वकीलों और दो पुलिस अधिकारियों के बीच हाथापाई हो गई।
पुलिस को धरने पर क्यों बैठना पड़ा?
मनस्वी वशिष्ठ और थानेदार के ट्रांसफर के खिलाफ दिल्ली पुलिस के 150 कर्मी सोमवार को पुलिस मुख्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। महिला कर्मचारियों ने भी विरोध जताया। उनके हाथों में तख्तियां थीं, पोस्टर लेकर पुलिसकर्मी धरने पर बैठे। प्रदर्शनकारी 'वर्दी का अपमान नहीं सहेंगे' जैसे नारे लगाए। प्रदर्शनकारी एसीपी वशिष्ठ और अरुण कुमार की पुरानी तैनाती बहाल करने की मांग कर रहे थे।
पुलिसकर्मियों की मांगे क्या हैं?
पुलिस के एक प्रतिनिधि मंडल ने पुलिस कमिश्नर से मुलाकात की है और अपनी 5 मांगें सौंपी है। शाहदरा थाने में वकीलों क खिलाफ कार्रवाई और गुंडागर्दी के आरोप लगाए गए। वकीलों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई। पुलिस कमिश्नर अनुाग कुमार ने बार काउंसिल ऑफ दिल्ली और जिला बार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ 30 अक्तूबर को एक बैठक की। एक संयुक्त समन्वय और शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने का फैसला लिया गया है।
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दिल्ली में बार-बार टकराते क्यों हैं वकील और पुलिस?
पुलिस और वकीलों के उलझने की कहानी नहीं है। वकीलों के एक बड़े धड़े का कहना है कि पुलिस, वकीलों के साथ अधिकारियों जैसा सलूक नहीं करती है। वकील चाहते हैं कि पुलिस वकीलों के किसी काम में बाधा न डाले, उनके हितों में दखल न दे। साल 2019 में भी इसी तरह का एक प्रदर्शन हुआ था।
वकीलों के एक समूह ने 2019 में पुलिसकर्मियों पर हमला किया था। 2 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी और उनके परिजन मुख्यालय के बाहर जुट गए थे। 30 हजारी कोर्ट में पार्किंग को लेकर हंगामा हुआ था। अधिकारियों ने पुलिसकर्मियों से वादा किया था कि उनकी मदद की जाएगी। बड़े अधिकारियों ने बार से विवाद सुलझाने की अपील की थी।