logo

मूड

ट्रेंडिंग:

'सो रहे सांसदों को जगाएंगे', E20 पेट्रोल के खिलाफ संसद मार्च करेंगे ट्रांसपोर्टर

दिल्ली के टैक्सी और ट्रांसपोर्ट संगठनों ने E20 पेट्रोल के खिलाफ 4 अगस्त को संसद मार्च का ऐलान किया है। उनका आरोप है कि E20 से गाड़ियों में खराबी, माइलेज में कमी और मेंटेनेंस खर्च बढ़ रहा है।

representative image of Demo E20 petrol Car

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: ChatGPT

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

दिल्ली के टैक्सी और ट्रांसपोर्ट संगठनों ने E20 पेट्रोल के खिलाफ बड़ा आंदोलन करने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि 4 अगस्त को वे संसद मार्च निकालेंगे और सरकार से E20 पेट्रोल की अनिवार्यता खत्म करने की मांग करेंगे। संगठनों का आरोप है कि E20 पेट्रोल की वजह से देशभर में गाड़ियों में तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं। इससे माइलेज कम हो रहा है और गाड़ियों के रखरखाव का खर्च भी बढ़ गया है। उनका कहना है कि इतनी शिकायतों के बावजूद सरकार और जनप्रतिनिधि इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।

 

दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट ने कहा कि संसद मार्च का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का विरोध नहीं, बल्कि वाहन मालिकों और आम लोगों की चिंताओं को संसद तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि सांसद इस मुद्दे पर चुप हैं, इसलिए उन्हें जगाने के लिए यह प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही उन्होंने साफ किया कि यह आंदोलन पूरी तरह गैर-राजनीतिक है और इसका किसी राजनीतिक संगठन से कोई संबंध नहीं है।

 

यह भी पढ़ें: CJP की चेतावनी के बाद पीछे हटी बिहार सरकार, प्रदर्शनकारियों पर नहीं होगी FIR

E-20 जनता पार्टी से बनाई दूरी

संजय सम्राट ने साफ कहा कि प्रस्तावित प्रदर्शन का सोशल मीडिया पर सक्रिय 'E-20 जनता पार्टी', कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) या किसी अन्य राजनीतिक दल से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ संगठनों द्वारा चलाए जा रहे ऑनलाइन अभियानों से उनके आंदोलन को जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि यह केवल ट्रांसपोर्ट सेक्टर और वाहन चालकों की समस्याओं को लेकर शुरू किया गया अभियान है।

 

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरीश सभरवाल ने भी संसद मार्च का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को लोगों पर E20 पेट्रोल थोपने के बजाय विकल्प देना चाहिए। उपभोक्ताओं के पास सामान्य पेट्रोल और E20 पेट्रोल में से अपनी जरूरत के अनुसार ईंधन चुनने की आजादी होनी चाहिए। हालांकि उन्होंने साफ किया कि फिलहाल किसी प्रकार की हड़ताल का फैसला नहीं लिया गया है और आंदोलन केवल संसद मार्च तक सीमित रहेगा।

 

यह भी पढ़ें: 'कल तक लिखित आश्वासन दें, वरना फिर धरना शुरू होगा', CJP ने अब क्यों दी चेतावनी?

E20 को लेकर क्यों है विवाद?

E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल मिलाया जाता है। केंद्र सरकार का दावा है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी, प्रदूषण कम होगा और एथेनॉल उत्पादन के जरिए किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। दूसरी ओर, कई वाहन मालिकों और ट्रांसपोर्ट संगठनों का कहना है कि E20 ईंधन के इस्तेमाल से कुछ वाहनों में माइलेज कम हो रहा है और इंजन पर असर पड़ने की शिकायतें मिल रही हैं। हालांकि सरकार इन दावों को खारिज करते हुए कह चुकी है कि E20 ईंधन पूरी तरह सुरक्षित है और फिलहाल 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। अब 4 अगस्त को प्रस्तावित संसद मार्च के जरिए ट्रांसपोर्ट संगठन अपनी मांगों को सरकार के सामने मजबूती से रखने की तैयारी में हैं।

Related Topic:#National News

और पढ़ें