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डीजल और ATF के निर्यात पर सरकार ने बढ़ा दिया टैक्स, क्या आप पर भी पड़ेगा असर?

सरकार ने डीजल और ATF एक्सपोर्ट पर ड्यूटी बढ़ा दी है और नई दरें आज से ही लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी की दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

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सांकेतिक तस्वीर, Photo Credit: AI

केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) में बढ़ोतरी कर दी है। आज से डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी कर दी है। सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक नई दरें आज से ही लागू कर दी गई हैं। सरकार का मकसद पश्चिम एशिया संकट के बीच घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है। हालांकि पेट्रोल के निर्यात शुल्क में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है।

 

सरकार ने डीजल के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) को बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। इससे पहले यह 13.5 रुपये प्रति लीटर था। वहीं एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर निर्यात शुल्क 9.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 12.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

 

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क्या मंहगा होगा पेट्रोल?

सरकार के इस फैसले के बाद लोगों के मन में सवाल है कि क्या पेट्रोल और डीजल के दाम फिर से बढ़ सकते हैं। इस मामले में सरकार ने लोगों को राहत दी है। सरकार ने साफ किया है कि घरेलू खपत के लिए बेचे जाने वाले पेट्रोल-डीजल पर मौजूदा एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी इस फैसले का असर अभी पेट्रोल पंप पर मिलने वाले पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नहीं पड़ेगा। 

अगले पखवाड़े तक रहेंगी यह दरें

यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सरकार समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, रिफाइनिंग मार्जिन और घरेलू उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए इन दरों की समीक्षा करती है। आमतौर पर यह समीक्षा हर पखवाड़े यानी दो हफ्तों की जाती है और उसी के आधार पर नई दरें तय की जाती हैं। इस बार 16 जून से शुरू होने वाले पखवाड़े में यह नई दरें लागू की गई हैं।

 

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क्यों लिया फैसला?

विंडफॉल टैक्स का उद्देश्य तेल के निर्यात को कम करना या मंहगा करना है, जिससे घरेलू मार्केट में सप्लाई बढ़ जाए। पश्चिमी एशिया में जारी तनाव के बीच तेल संकट पैदा हुआ है। ऐसे में सरकार नहीं चाहती है कि रिफाइनरी कंपनियां ज्यादा मुनाफे के लिए डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल का निर्यात बढ़ाएं, जिससे घरेलू मार्केट में सप्लाई चेन पर नाकारात्मक असर पड़े। 

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