चुनाव आयोग (EC) ने रविवार को साफ किया कि वोटर लिस्ट के लिए चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (
SIR
) के दौरान कुछ मतदाताओं को भेजे गए नोटिस का यह मतलब नहीं है कि उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया जाएगा। यह सफाई तब आई, जब दिल्ली में SIR के दौरान कई बड़े राजनीतिक नेताओं को नोटिस जारी किए गए।
चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उनसे पहले मुख्यमंत्री रहे
अरविंद केजरीवाल
उन 33.1 लाख मतदाताओं में शामिल हैं, जिन्हें उनके ब्योरे में गड़बड़ी को लेकर नोटिस मिला है। हालांकि मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के दफ्तर ने बाद में साफ किया कि जांच के बाद रेखा गुप्ता का नाम सही पाया गया है।
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किन-किन बड़े नेताओं को मिला नोटिस?
अधिकारियों के अनुसार, BJP के वरिष्ठ नेता एलके आडवाणी, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और BJP विधायक कैलाश गहलोत को भी SIR के दौरान सामने आई गड़बड़ियों को लेकर नोटिस भेजा गया है। इसके अलावा विदेश मंत्री एस जयशंकर, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और निर्वाचन आयुक्त एसएस संधू का नाम भी उन प्रमुख लोगों में शामिल है, जिन्हें मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान दी गई जानकारी में गड़बड़ी को लेकर नोटिस मिला है।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
CEO दफ्तर ने कहा कि बिना सुनवाई का मौका दिए और बिना कोई ठोस तथा अपील योग्य आदेश जारी किए किसी भी मतदाता का नाम नहीं काटा जा सकता। दफ्तर ने कहा कि सभी संबंधित पक्षों को सूचित किया जाता है कि नोटिस जारी होने का यह मतलब नहीं है कि उनका नाम दिल्ली की मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि ये सिस्टम जनरेटेड नोटिस ECINET में डेटा सुधारने के लिए भेजे जा रहे हैं। CEO दफ्तर ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया में जिस तरह इसे पेश किया जा रहा है, वैसा कोई 'अस्तित्व का संकट' नहीं है।
दिल्ली SIR में नोटिस क्यों भेजे जा रहे हैं?
ड्राफ्ट मतदाता सूची बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को मतदाताओं की तरफ से दिए गए एन्यूमरेशन फॉर्म के आधार पर तैयार की गई थी। यह सूची 31 अगस्त को प्रकाशित की गई थी और CEO दिल्ली की वेबसाइट के साथ-साथ इलेक्शन रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO), असिस्टेंट इलेक्शन रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) (AERO) दफ्तरों और तय मतदान केंद्रों पर उपलब्ध है।
भारत निर्वाचन आयोग ने 14 मई को दिल्ली में SIR का ऐलान किया था। इसका मकसद यह तय करना है कि कोई भी योग्य नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई भी अयोग्य व्यक्ति सूची में शामिल न हो।
इस प्रक्रिया के तहत ड्राफ्ट सूची में शामिल मतदाताओं को इस आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है कि उनकी या उनके वंशजों की एंट्री पिछली SIR की मतदाता सूची से जुड़ पाई या नहीं। जिन मतदाताओं की एंट्री पिछली सूची से नहीं जुड़ पाई या जिनकी लिंकिंग प्रक्रिया में गड़बड़ी पाई गई, उन्हें ही नोटिस भेजे जा रहे हैं।
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नोटिस मिलने पर क्या करें मतदाता?
जिन मतदाताओं को नोटिस मिला है, वे अपना जवाब और जरूरी दस्तावेज संबंधित ERO या BLO के पास जमा कर सकते हैं। CEO दफ्तर ने कहा कि निर्वाचन आयोग की तरफ से बताए गए दस्तावेजों की सूची सिर्फ उदाहरण के तौर पर है, इसमें और भी दस्तावेज मान्य हो सकते हैं।
ERO एक सांविधिक प्राधिकरण के तौर पर उपलब्ध दस्तावेजों और BLO की रिपोर्ट के आधार पर हर मामले पर अलग से फैसला लेंगे। इन नोटिस को निपटाने की प्रक्रिया 29 अक्टूबर तक पूरी करने की योजना है। इसके बाद ऐसे मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे जो 4 नवंबर को प्रकाशित होने वाली है।