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भारतीय नौसेना को मिली पहली मल्टी-पर्पज वेसल, क्यों पड़ी इस जहाज की जरूरत?

भारतीय नौसेना के लिए बनाया गया पहला स्वदेशी मल्टी-पर्पज वेसल (MPV) नौसेना को सौंप दिया गया। इसे L&T ने बनाया है और इस पोत में 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है।

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मल्टी-पर्पज वेसल, INS समर्थक। Photo Credit-Social Media

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भारतीय नौसेना के लिए बनाया गया पहला स्वदेशी मल्टी-पर्पज वेसल (MPV) नौसेना को सौंप दिया गया। इस पोत को समर्थक नाम दिया गया है। बता दें कि समर्थक में 75 फीसदी से ज्यादा स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। इसे लार्सन एंड टुब्रो कंपनी (एल एंड टी) ने कट्टुपल्ली में बनाया है। समर्थक को इस तरह डिजाइन किया गया है कि एक ही पोत से कई तरह के समुद्री अभियानों को अंजाम दिया जा सके। 

 

इस एक पोत से कई काम हो जाएंगे। अब एक ही पोत पर नए हथियारों और उपकरणों की टेस्टिंग, समुद्र पर निगरानी और जानकारी जुटाना, समुद्री सीमा की गश्त यानी पहरेदारी, और तूफान-बाढ़ जैसी आपदा में राहत और मदद पहुंचाने जैसे काम हो जाएंगे।

 

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क्या है मल्टी-पर्पज वेसल?

इस जहाज का नाम समर्थक रखा गया है, जिसका मतलब है मदद करने वाला या साथ देने वाला। यह जहाज केवल एक काम के लिए नहीं, बल्कि कई तरह के कामों में एक भरोसेमंद मददगार की तरह काम करेगा। इसलिए यह नाम रखा गया। 27 अगस्त 2026 को इसे भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। यह यह बहुउद्देश्यीय जहाज समुद्री निगरानी, गश्त, नए नौसैनिक उपकरणों की टेस्टिंग और आपदा राहत अभियानों में काम आएगा, इससे हिंद महासागर में भारत की समुद्री सुरक्षा मजबूत होगी। 

नौसेना को क्यों पड़ी इसकी जरूरत? 

नौसेना को समर्थक की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि पहले नए हथियारों और सेंसर की जांच के लिए कोई खास जहाज नहीं था, तो असली लड़ाकू जहाजों का इस्तेमाल करना पड़ता था, जिससे वे अपने मुख्य काम के लिए कम उपलब्ध रहते थे। साथ ही, नौसेना को ऐसा जहाज चाहिए था जो निगरानी, गश्त और आपदा राहत जैसे कई काम एक साथ कर सके, ताकि अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग जहाज न बनाने पड़ें। पहले ऐसे कई जहाज विदेश से खरीदे जाते थे, इसलिए सरकार अब भारत में ही ऐसे जहाज बनाकर देश को आत्मनिर्भर बनाने की राह में बड़ा कदम उठाया है।

 

इस पोत से नौसेना का काम होगा आसान

हथियारों और सेंसर जांज करने वाले उपकरण की टेस्टिंग केअलावा, यह जहाज समुद्र पर निगरानी रखने और जानकारी जुटाने में भी मदद करेगा। समुद्री सीमा की गश्त (पहरेदारी), तूफान-बाढ़ जैसी आपदा में लोगों की मदद और राहत पहुंचाना का भी काम करेगा। 

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