कभी आई ड्रॉप, कभी घी पर विवाद, पतंजलि की मुश्किलें क्यों नहीं हो रहीं कम?
पतंजलि के कई उत्पाद ग्राहकों से लेकर अदालतों तक के निशाने पर रहे हैं। बृजभूषण शरण सिंह ने कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोला है।

बृजभूषण शरण सिंह और योग गुरु रामदेव। Photo Credit: Social Media
उत्तर प्रदेश की कैसरगंज लोकसभा सीट से पूर्व सांसद और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता बृजभूषण शरण सिंह ने बाबा रामदेव और उनकी नेतृत्व में चल रही कंपनी 'पतंजलि' के खिलाफ मोर्चा खोला है। बृजभूषण शरण सिंह का दावा है कि स्वामी रामदेव, नकली घी बनाते हैं, वह नकली उत्पादों के सम्राट हैं। सार्वजनिक मंचों से वह बार-बार दावे कर रहे हैं कि पतंजलि के ज्यादातर उत्पादन नकली हैं और तय नियमों की कसौटी पर खरा नहीं उतरते हैं।
बृजभूषण शरण सिंह और स्वामी रामदेव का झगड़ा अदालत तक पहुंच चुका है। वह लगातार पतंजलि उत्पादों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। कभी दंत मंजन को लेकर बोलते हैं, कभी गाय के घी को लेकर। वह यह भी कह चुके हैं कि जापान और सिंगापुर का कचरा, घी के तौर पर बाबा रामदेव आम लोगों सस्ती घी के नाम पर बेच रहे हैं। उनका कहना है कि इतनी सस्ती देसी घी मिल ही नहीं सकती है, न उनके पास गाय है, न ही डेयरी है, कहां से वह घी पैदा कर रहे हैं।
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बृजभूषण शरण सिंह, नेता, BJP:-
रामदेव के प्रोडक्ट दुनिया के कई देशों में बंद हो चुके हैं, अब चड्ढी बची है, बाकी सब बंद हो गए। रामदेव नकली खाद्य पदार्थों के सम्राट हैं, बाकी राजा हैं। रामदेव ने गाय कहां पाली हैं? जो गाय का घी बेच रहे। कोई आदमी 2,000 रुपये में घी नहीं बेच सकता। रामदेव की गायें कहां पाली गई हैं? कोई वीडियो बनाकर दिखा दे कि ये रामदेव की गाय हैं।
अब कोर्ट में पहुंचा बृजभूषण और रामदेव का झगड़ा
पतंजलि फूड्स लिमिटेड ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ मानहानि का मामला दायर किया है। कंपनी का आरोप है कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से पतंजलि उत्पादों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए और ब्रांड नाम पर भी आपत्ति जताई। रामदेव की ओर से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 50 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर किया गया है। अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह को अपना पक्ष रखने का मौका दिया और अगली सुनवाई 18 सितंबर को तय की। कंपनी का कार्यालय इंदौर के विजय नगर में होने की वजह से मुकदमा वहीं दायर किया गया है।
कई उत्पादों को वापस ले चुका है पतंजलि आयुर्वेद
अप्रैल 2024 की बात है। पतंजलि आयुर्वेद ने खुद सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि कंपनी अपने 14 उत्पादों की बिक्री बंद कर चुकी है। इन्हें बनाने का लाइसेंस उत्तराखंड स्टेट लाइसेंसिंग अथॉरिटी (USLA) ने 2024 में ही निलंबित की थी। कंपनी ने जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच के सामने यह कहा था कि 5,606 फ्रैंचाइजी स्टोरों को इन उत्पादों को वापस लेने के निर्देश जारी कर दिए हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने इन उत्पादों के खिलाफ अर्जी दी थी।
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क्यों IMA और पतंजलि आयुर्वेद की ठनी रहती है?
IMA और पतंजलि आयुर्वेद का झगड़ा भी पुराना है। IMA का कहना है कि पतंजलि ने कोविड टीकाकरण अभियान और आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के खिलाफ बदनामी का अभियान चलाया था। उन्होंने अंग्रेजी दवा पद्धति को ही फर्जी ठहरा दिया था, जिसके लिए उन्हें कई बार लिखित माफी मांगनी पड़ी। इससे पहले USLA ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि पतंजलि आयुर्वेद और दिव्य फार्मेसी के 14 उत्पादों के निर्माण लाइसेंस तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिए गए हैं।
USLA ने 15 अप्रैल 2024 को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक रूल्स 1954 के नियम 159(1) के तहत यह कार्रवाई की थी। सुप्रीम कोर्ट ने USLA को फटकार लगाई थी कि कैसे इन उत्पादों को जारी रखने की इजाजत दी जा सकती है। USLA हरिद्वार के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पतंजलि आयुर्वेद, उसके प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण, सह-संस्थापक बाबा रामदेव और दिव्य फार्मेसी के खिलाफ ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम 1954 के तहत आपराधिक शिकायत भी दर्ज कराई थी।
https://twitter.com/Shubhamshuklamp/status/2101002865771003931
पतंजलि के किन उत्पादों पर गिर चुकी है गाज?
- श्वासारि गोल्ड
- श्वासारि वटी
- ब्रॉन्कोम
- श्वासारि गोल्ड
- श्वासारि प्रवाहि
- श्वासारि अवलेह
- मुक्ता वटी एक्स्ट्रा पावर
- लिपिडोम
- बीपी ग्रिट
- मधुग्रिट
- मधुनाशिनी वटी एक्स्ट्रा पावर
- लिवामृत एडवांस
- लिवोग्रिट
- आईग्रिट गोल्ड
- पतंजलि दृष्टि आई ड्रॉप्स
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क्यों पतंजलि के उत्पादों पर उठते हैं सवाल?
IMA और सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि पतंजलि ने अपने कई उत्पादों में अतिशयोक्तिपूर्ण और असत्यापित दावे किए हैं, गुणवत्ता मानकों और एलोपैथी के खिलाफ आक्रामक प्रचार किया है। कंपनी ने कई दवाओं के विज्ञापनों में ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, दमा और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को शत-प्रतिशत ठीक करने के वादे किए हैं। पतंजलि की ओर से किए गए दावे, अब तक के मेडिकल साइंस के मुताबिक ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज एक्ट के साथ टकरा रहे हैं।
कई खाद्य और औषधीय उत्पादों के लैब परीक्षणों में फेल होने की खबरें सामने आईं हैं। पतंजलि के उत्पादों पर मिलावट के आरोप भी लगते रहे हैं। यह भी आरोप लगते हैं कि पतंजलि ने कई औषधियों को लिनिकल ट्रायल्स के ठोस प्रमाण बिना पेश किया है। कोरोना महामारी के दौरान 'कोरोनिल' को लेकर भी ऐसे ही दावे किए गए थे। न्यायपालिका, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और बृजभूषण शरण सिंह जैसी कई सार्वजनिक हस्तियों ने पतंजलि के खिलाफ आवाज उठाई है।
च्यवनप्राश पर भी हो चुका है विवाद
रामदेव अक्सर विज्ञापनों ने दावा करते थे कि ज्यादातर लोग च्यवनप्राश के नाम पर धोखा खा रहे हैं और केवल पतंजलि का उत्पाद ही असली है। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस विज्ञापन पर रोक लगाया है। विज्ञापनों में पतंजलि ने अपने 51 जड़ी-बूटियों वाले स्पेशल च्यवनप्राश को महान बताते हुए कहा था कि 40 जड़ी-बूटियों वाले साधारण च्यवनप्राश से समझौता क्यों करें। डाबर ने इसे लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने पतंजलि को टीवी, यूट्यूब और सोशल मीडिया से ऐसे सभी विज्ञापन तुरंत हटाने का आदेश दिया।
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