ग्राउंड रिपोर्ट: इंकलाब जिंदाबाद के शोर में घुल रहीं गालियां, जंतर-मंतर का हाल
जंतर-मंतर पर हो रहे प्रदर्शन में नारों के बीच गालियां भी खूब दी जा रही हैं। प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री को भी गालियां देने से युवा हिचक नहीं रहे हैं।

रोचक पोस्टर दिखा रहे हैं प्रदर्शनकारी, Photo Credit: Khabargaon
देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर प्राचीन वेधशालाओं के लिए मशहूर है लेकिन अब यह बीती बात हो गई। अब 21वीं सदी में मिलेनियल्स के बाद GenZ भी इसे धरना-प्रदर्शन और आंदोलन के लिए जान रही है। खगोलीय पिंडों की गति का अध्ययन करने, समय की गणना करने और कैलेंडर तैयार करने के विज्ञान को समायोजित करने वाला जंतर-मंतर बीते कई दशकों से राजनीति का काल निर्धारित कर रहा है। 2011 के बाद 2026 में भी जंतर-मंतर पर सत्ता विरोधी नारे गूंज रहे हैं। देश की आजादी के समय से लगाए जा रहे 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारों में इस बार गालियों भरे नारे और ताने घुल रहे हैं। बोल्ड अंदाज और अलग सोच के लिए अक्सर आलोचना झेलने वाले Gen Z के युवा बिना किसी फिल्टर के गालियां बक रहे हैं और अपना गुस्सा उनके जरिए ही जाहिर कर रहे हैं।
बुधवार यानी 22 जुलाई की दोपहर में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता आशुतोष रंका ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए आपत्तिजनक नारेबाजी पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने अपील की कि सिर्फ 'भारत माता की जय', 'इंकलाब ज़िंदाबाद', 'जय भीम' और 'धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो' यही चार नारे लगाए जाएं। खबरगांव की टीम को जंतर-मंतर पर यह देखने को मिला कि सबसे कम इस्तेमाल इन्हीं चार नारों का हो रहा था। बीच-बीच में 'इंकलाब जिंदाबाद' और 'भारत माता की जय' के नारे भी लग रहे हैं लेकिन धरनास्थल और उसके आसपास मौजूद प्रदर्शनकारियों के हाथ में जो पोस्टर हैं, उन पर रचनात्मकता का GenZ अंदाज दिख रहा है।
तेवर, कलेवर और सोच सब अलग
आमतौर पर होने वाले प्रदर्शनों में किसी भी एक शख्स के गाली देने पर लोग उससे दूरी बना लेते हैं। कई बार तो आयोजक खुद उस शख्स को वहां से हटा देते हैं। कारण होता है कि आंदोलन में शामिल लोग ऐसी उम्र के होते हैं जो गाली को बुरा मानते हैं और आपत्तिजनक बयानों से बचते हैं। पारंपरिक मीडिया चैनल भी ऐसे गाली देने वाले लोगों के सामने से कैमरा हटा लेते हैं और कई बार इसीलिए लाइव के बजाय रिकॉर्ड किए हुए प्रोग्राम तैयार किए जाते हैं। 2011 में हुए अन्ना आंदोलन, किसान आंदोलन और कई अन्य आंदोलनों में ऐसा ही देखा गया है।
यह भी पढ़ें: जंतर-मंतर पर खबरगांव की टीम पर हमला, रिपोर्टर और कैमरामैन को आई चोट
इस मामले में जंतर-मंतर पर हो रहा मौजूदा आंदोलन बिल्कुल अलग है। ज्यादातर प्रदर्शनकारी कम उम्र के हैं। 2026 में 14 से 26 उम्र के लोगों GenZ का माना जाता है और मौजूदा वक्त में जंतर-मंतर पर जुटे प्रदर्शनकारियों में 90 प्रतिशत GenZ ही हैं। इनकी सोच अलग है, इनके तेवर अलग हैं और इसी के चलते इस प्रदर्शन का पूरा कलेवर अलग है। इन्हीं GenZ को कवर कर रहे यूट्यूब चैनल और अन्य गैरपारंपरिक मीडिया चैनल को गालियों से कोई शिकायत नहीं है। वे तैयार हैं कि अगर कोई गाली दे भी देता है तो बीप कर देंगे लेकिन किसी को रोकेंगे नहीं।

ऐसा ही एक वीडियो रिकॉर्ड कर रहे शख्स को उस वक्त मायूसी हाथ लगी जब उसी शख्स ने कैमरे पर गाली नहीं दी। दरअसल, कैमरा लिए खड़े शख्स ने उस शख्स को इसीलिए बात करने का मौका दिया था क्योंकि वह कैमरा चालू होने से पहले खूब गालियां निकाल रहा था। कैमरे वाले शख्स को उम्मीद थी कि उसके वीडियो में भी यही आएगा लेकिन जब उसी शख्स ने कैमरे पर गाली नहीं दी तो वह मायूस हो गया। GenZ एंकर ने तुरंत इस पर नाराजगी भी जाहिर कर दी और कहा, 'अरे यार पहले वाली गाली नहीं दी।' नई उम्र की इस भीड़ ने इस पर जोरदार ठहाके लगाए और कैमरा बंद होने के बाद वही गाली जोर से गूंज उठी।
गालियों से नहीं एतराज
जंतर-मंतर पर मौजूद हजारों प्रदर्शनकारियों में ज्यादातर को गालियों से एतराज नहीं है। गालियों को नारों में बदल रहे युवा इतने वोकल हैं कि बाकी लोग इंट्रोवर्ट ही बने हुए हैं। जिन्हें बुरा लग भी रहा है, वे भी 20 जुलाई को हुए लाठीचार्ज के आगे इसे छोटा मानकर चुप रह जा रहे हैं। बिना किसी संकोच के ये प्रदर्शनकारी शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक के लिए गालियां निकाल रहे हैं। इन्हीं गालियों को नारों में बदलकर एक ओर से उछाला जाता है तो दूसरा सिरा उसे उसी शोर के साथ वापस करता है।
यह भी पढ़ें: धर्मेंद्र प्रधान से ज्यादा दिल्ली पुलिस पर गुस्सा, शहरों में पहुंचा छात्र आंदोलन
सिर्फ मंच के पास ऐसा देखा जा रहा है कि गालियां देने वाले लोग कम हैं या फिर वहां गालियां नहीं बकी जा रही हैं। आशुतोष रंका की अपील का असर सिर्फ मंच के आसपास ही दिखाई देता है। पहली बैरिकेडिंग पार करते ही गालियों से भरी क्रिएटिविटी, पोस्टर और नारे उतराने लगते हैं। कई युवा तो रोचक नारे अपने फोन या लैपटाप पर ही दिखा रहे हैं। ऐसे ही एक युवा मिले जो कुछ-कुछ देर में अपने फोन पर दिखने वाला नारा बदल दे रहे थे।
CJP ही नहीं, Memes भी जमीन पर उतरे
कॉकरोच जनता पार्टी का उदय चीफ जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी के जवाब में हुई थी। देखते ही देखते लाखों लोग उससे जुड़ गए थे और जबरदस्त रेस्पांस मिला था। उस वक्त यही माना जा रहा था कि यह सिर्फ इंटरनेट की दुनिया तक ही सीमित रहने वाला है। हालांकि, अब कॉकरोच जनता पार्टी के साथ हजारों युवा सड़क पर उतर आए हैं। जंतर-मंतर पर मौजूद जो युवा CJP का समर्थन नहीं भी करते, वे भी उसकी सोच के साथ हैं कि सरकारों का जिम्मेदार होना जरूरी है। इसी जिम्मेदारी को तय करने की दिशा में हो रहे आंदोलन में क्रिएटिविटी भी खूब दिख रही है।

जिस तरह CJP सड़क पर उतरी है, उसी तरह इंटरनेट की दुनिया भी सड़क पर उतर आई है। इंटरनेट पर दिखने वाले Memes ने अब नारों और पोस्टरों की शक्ल ले ली है। Memes के प्रिंटआउट लिए खड़े युवा खामोश रहकर भी लोगों को अपनी ओर खींच रहे हैं। खामोशी से खड़े इन युवाओं और उनके पोस्टर की तस्वीर लेने के लिए लोग अपने आप खिंचे चले आ रहे हैं। ये युवा जंतर-मंतर के पूरे परिसर में खड़े हैं, उनके हाथ में पोस्टर हैं और ऐसे ही पोस्टर बनाने के लिए कुछ युवा कोरे कागज, पेंट और ब्रश लेकर भी बैठे हैं।
यह भी पढ़ें: 'फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाएंगे, किसी को नहीं बख्शेंगे', पेपर लीक पर PM मोदी का एलान
इनमें कुछ नारे ऐसे हैं जिनमें सीधे-सीधे प्रधानमंत्री, शिक्षा मंत्री और सरकार को गालियां दी गई हैं। कुछ पोस्टर ऐसे भी हैं जो चर्चित Memes के टेंपलेट्स से उठाए गए हैं। इसी तरह सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले Meme कैरेक्टर्स के जरिए भी प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री को आड़े हाथ लिया जा रहा है।

कुल मिलाकर यह आंदोलन नई पीढ़ी की सोच, उसके बेझिझक अंदाज और अनफिल्टर्ड रवैये का गवाह बन रहा है। अगर इस पीढ़ी को प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री से नाराजगी है तो उनके लिए गालियां निकालने से भी गुरेज नहीं है। यह पीढ़ी जिम्मेदारी तय करने की बात कर रही है और इसका शिकार खुद CJP की लीडरशिप भी हो चुकी है। बर्गर खाने वाले वीडियो के बाद हुई ट्रोलिंग के चलते बने दबाव के बाद CJP ने अपने प्रवक्ता विजेता दहिया को हटा दिया। ऐसे वीडियो भी सामने आए जिनमें युवाओं ने आशुतोष रंका को घेरकर सवाल पूछे कि आखिर वह सोने के लिए एसी में क्यों जाते हैं और प्रदर्शन वाले दिन सारे नेता गायब क्यों थे?
यह दिखा रहा है कि नई पीढ़ी अपनी मांगों को लेकर एकदम कट्टर है। शायद यही वजह है कि हर दिन CJP की ओर से एक ही मांग दोहराई जा रही है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना होगा। अब गेंद सरकार के पाले में है और देखना है कि वह इसे आगे किस तरह से डील करती है।
और पढ़ें
Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies
CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | EDITORIAL POLICY | Sitemap




