दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्रों के आंदोलन में अब हिंसक घटनाएं सामने आने लगी हैं। भीड़ अब पत्रकारों को टारगेट कर रही है। इस प्रोटेस्ट में बुधवार शाम पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प देखने को मिली। इस झड़प को कवर करने के लिए देर रात खबरगांव की एक टीम भी जंतर-मंतर पहुंची थी। भीड़ एक पत्रकार को घेरकर मार रही थी और खबरगांव के रिपोर्टर सत्यम तिवारी ने इसको कवर किया। उन्होंने वहां मौजूद लोगों से सवाल किया कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं। इस दौरान कुछ अराजक तत्वों ने खबरगांव की टीम पर भी हमला किया। इस हमले में कैमरामैन मोहित शुक्ला को चोट भी लगी है।
इस हिंसा की घटना के बाद खबरगांव की टीम स्टूडियो वापस आई और पूरे घटनाक्रम को वीडियो के जरिए यूट्यूब पर शेयर किया। सत्यम ने बताया कि 22 और 23 जुलाई की रात हम प्रोटेस्ट कवर करने के लिए निकले थे। हम 5 जून से इस प्रोटेस्ट को कवर कर रहे हैं और 20 जून से 20 जुलाई तक हमारी टीम ने पूरा प्रोटेस्ट कवर किया। उसके बाद भी हम लगातार जा रहे हैं और रात में भी हम गए थे। दिल्ली पुलिस ने सिक्योरिटी हटा ली थी और इसी पर हम स्टोरी करने गए थे।
सत्यम ने उस घटनाक्रम के बारे में बताया कि जब वह पहुंचे तो जंतर-मंतर के बाहर कुछ लोग किसी व्यक्ति को पीट रहे थे। सत्यम ने कहा, 'बताया गया कि गोदी मीडिया का है इसलिए मार रहे हैं। कुछ लोग उसे बचा रहे थे। यह प्रोटेस्ट बढ़ते-बढ़ते इतना बढ़ गया कि कुछ लोगों ने कैमरे पर पानी फेंका। कुछ लोग हमें रेस्कयू करके ले जा रहे थे और लोग हमें मारने की कोशिश कर रहे थे। मोहित मेरे से पीछे रह गए और उन्हें मारा गया।'
सत्यम ने आगे बताया, 'इसके बाद हम एक जगह पहुंचे और यह मेन स्टेज से 200 मीटर दूर था। यहां पुलिस भी थी इसलिए हमें थोड़ा सेफ लगा। वहां मौजूद लोगों से हमने पूछा कि किस आधार पर आप हमें गोदी मीडिया कह रहे हैं। हालांकि, कोई भी इसका जवाब नहीं दे सका।'
कैमरामैन को आई चोटें
कैमरामैन मोहित शुक्ला को भीड़ ने पीटा है। उन्होंने बताया कि जब वह शूट कर रहे थे तो कुछ लोग आकर उनसे पूछ रहे थे कि वह गोदी मीडिया हैं या नहीं। उन्होंने कहा,'मैंने कहा आप हमारा चैनल देख लीजिए। कुछ लोग मेरा कार्ड छिनने लगे। इतने में किसी ने सामने से पानी फेंका। लोग कहने लगे कि अगर गोदी मीडिया नहीं है तो बोल। जब मैं कैमरा बचाने की कोशिश कर रहा था तो मुझे मारने लगे।'
मोहित को इस घटनाक्रम में चोट भी लगी है। मोहित ने बताया कि कुछ लोग मुझे बचाने की कोशिश भी कर रहे थे। उन्होंने बताया कि जब हम सेफ जोन में पहुंचे तो भी लोग हमें सुन रहे थे कि हम क्या बोल रहे हैं। मोहित ने बताया कि ज्यादातर लोग गाली देकर नारे लगा रहे थे।
खबरगांव के निखिल कामथ ने सवाल उठाए कि हमारे स्टूडियो से ऐसा क्या किया गया है जो आपको लगता है कि उसकी सजा हमें मिलनी चाहिए। सत्यम ने कहा कि जब भी प्रोटेस्ट करने जाओ तो इस तरह की घटानाएं होती है लेकिन जब घेराबंदी करके मारना शुरू किया जाता है तो यह बहुत गलत है। निखिल ने कहा कि खबरगांव पर इस प्रोटेस्ट को लगातार कवर करेंगे।
उन्होंने कहा कि खबरगांव इस तरह की घटनाओं पर प्रोटेस्ट को लीड कर रहे लोगों से जरूर पूछेंगे। पत्रकारों पर हमले की घटनाएं 20 जून के बाद से लगातार बढ़ रही हैं। कई पत्रकारों को वहां पर मारा जा रहा है और भगाया जा रहा है। लगातार हिंसा की घटनाएं बढ़ने के कारण अब इस आंदोलन पर सवाल उठने लगे हैं।