भारत का पर्यटन क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार का एक बड़ा आधार बनता जा रहा है। पर्यटन मंत्रालय के मुताबिक इस क्षेत्र का देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदान करीब 5.22 फीसदी है। साल 2023-24 में भारतीय पर्यटन उद्योग की वजह से करीब 8.46 करोड़ लोगों को रोजगार मिल। यह आंकड़ा, साल 2019-20 के 6.94 करोड़ वाले आंकड़े से कहीं ज्यादा है। भारत में अब पर्यटन तेजी से फल-फूल रहा है।
पर्यटन मंत्रालय ने ये आंकड़े टूरिज्म सैटेलाइट अकाउंट (TSA) के हवाले से दिया है। पर्यटन क्षेत्र के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आर्थिक योगदान को TSA से आंका जाता है। साल 2025 में घरेलू पर्यटकों की संख्या बढ़कर 428.55 करोड़ हो गई। विदेशी पर्यटकों की संख्या 2.53 करोड़ तक पहुंची। पर्यटन से विदेशी मुद्रा आय भी साल 2021 के 63,978 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,76,831 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
यह भी पढ़ें: भारतीय कैसे, कहां और कितना खर्च कर सफर करते हैं? MoSPI के आंकड़ों से समझिए
टीयर 2-3 शहरों में पर्यटन से खूब मिल रहा रोजगार
बड़े शहरों के अलावा अब छोटे शहर भी पर्यटन के जरिए रोजगार सृजन में अहम भूमिका निभा रहे हैं। 17 अप्रैल 2023 तक देशभर के 262 जिलों में ट्रैवल और टूरिज्म सेक्टर के 1,497 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप मौजूद थे, जिन्होंने करीब 13,919 लोगों को रोजगार दिया। इन्हें डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटर्नल ट्रेड (DPIIT) से मान्यता मिली है। इनमें से 58 फीसदी स्टार्टअप टीयर-2 और टीयर-3 शहरों में स्थापित हैं। पर्यटन का रोजगार सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं रह गया है।

किस तरह से स्टार्टअप का बढ़ा है क्रेज?
टूरिज्म सैटेलाइट अकाउंट के आंकड़े बताते हैं कि ये स्टार्टअप ट्रैवल टेक्नोलॉजी, ऑनलाइन बुकिंग, होमस्टे, ग्रामीण और एक्सपीरियंस टूरिज्म से जुड़े हैं। स्मार्ट मोबिलिटी और AI प्लान से जुड़े स्टार्टअप भी भारत में तेजी से बढ़ रहे हैं। हाइवे डिलाइट, हाइवे पर सुविधाओं का डिजिटल नेटवर्क तैयार करता है। विलोटेल, होमस्टे और सामुदायिक अनुभवों के जरिए ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देता है। उड़चलो 28 लाख से ज्यादा रक्षा कर्मियों, पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों को यात्रा सेवाएं दे रहा है।
पर्यटन में निवेश कौन कर रहा है?
पर्यटन क्षेत्र में लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए 'कैपिसिटी बिल्डिग फॉर सर्विस प्रोवाइडर्स स्कीम (CBSP) चला रही है। स्थानीय समुदायों, आदिवासी क्षेत्रों और वंचित वर्गों के युवाओं को अल्पकालिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के 2025 की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2020-21 से 2024-25 के बीच 1.68 लाख से ज्यादा लोगों को प्रशिक्षित किया गया।
यह भी पढ़ें: घूमने पर नहीं, इलाज पर ज्यादा खर्च, मेडिकल ट्रिप जेब पर कैसे भारी पड़ रही हैं?

योजना से करीब 36,000 से अधिक को रोजगार भी मिला। 2024 में शुरू हुई पर्यटन मित्र, पर्यटन दीदी पहल के तहत करीब 4,382 लोगों को कैब-ऑटो चालकों, होटल-रेस्टोरेंट कर्मियों, गाइड और होमस्टे मालिकों को प्रशिक्षित किया गया है।
सरकार भविष्य के लिए क्या तैयारी कर रही है?
छोटे शहरों में रोजगार बढ़ाने के लिए सड़क संपर्क को भी मजबूत किया जा रहा है। अब तक 687 RCS उड़ान रूट्स के जरिए 95 एयरपोर्ट को जोड़ा जा चुका है। उड़ान योजना के तहत 2026-27 से 2035-36 तक 28,840 करोड़ रुपये के बजट से 100 एयरपोर्ट और 200 आधुनिक हेलीपैड बनाने की योजना है। कम पहुंच वाले इलाकों में भी पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।
कौन से शहर भारत के पर्यटन को संवार रहे हैं?
केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के तहत देश के 57 पर्यटन स्थलों को विकास के लिए साल 2025 में नोटिफाई किया था। पहले चरण की स्वदेश दर्शन योजना में बौद्ध, तटीय, विरासत, आध्यात्मिक, पूर्वोत्तर समेत विभिन्न थीम सर्किटों पर कुल 76 परियोजनाएं मंजूर की गई थीं। इनके लिए स्वीकृत राशि करीब 5,294 करोड़ रुपये है। तीर्थस्थलों के विकास के लिए शुरू की गई प्रसाद योजना के तहत 46 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं।
स्वदेश दर्शन 2.0 के अधिसूचित स्थलों में आंध्र प्रदेश के गंडीकोटा और अरक्कु-लंबासिंगी, बिहार के गया और नालंदा, गुजरात के धोलावीरा और द्वारका, कर्नाटक के हम्पी और मैसूरु, केरल के कुमारकोम और बेपोर, महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग और अजंता-एलोरा को संवारने पर सरकार जोर दे रही है। राजस्थान का बूंदी और जोधपुर, उत्तर प्रदेश का प्रयागराज और नैमिषारण्य, लद्दाख का लेह और कारगिल जैसी जगहों को भी इसी तरह से संवारा जा रहा है। इनमें से ज्यादातर शहर टीयर 2-3 शहर हैं।