भले ही अंतरजातीय विवाहों को लेकर समाज के एक वर्ग में स्वीकार्यता ना हो लेकिन सरकार इसे बढ़ावा देती है। सामाजिक तौर पर एकीकरण के लिए केंद्र सरकार ऐसी शादियां करने वाले लोगों को आर्थिक मदद भी देती है। डॉ. आंबेडकर योजना के तहत शादीशुदा जोड़े को 2.5 लाख रुपये दिए जाते हैं। ध्यान रहे कि इस योजना का लाभ तभी दिया जाता है जब लड़का या लड़की में से कोई एक अनुसूचित जाति का हो और दूसरा शख्स किसी दूसरे समुदाय का हो। पिछले कुछ साल में केंद्र सरकार की ओर से इस योजना पर 10 करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च कि गए हैं और सैकड़ों लोगों को इसका लाभ मिला है।
भारतीय समाज में दशकों से चले रहे जातिगत भेदभाव को खत्म करने, सामाजिक स्तर पर बराबरी का भाव पैदा करने के लिए सरकार ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करते हैं जो समाज में 'दलित' माने जाने लोगों से शादी करते हैं। इसके तहत नई जिंदगी शुरू करने वाले इन जोड़ों को आर्थिक सहायता के लिए 2.5 लाख रुपये की मदद दी जाती है। साथ ही, जिला प्रशासन को बी ऐसी हर शादी के लिए 25 हजार रुपये दिए जाते हैं ताकि वे ऐसे कपल के लिए कार्यक्रम भी आयोजित करें।
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क्या-क्या पता चला?
बीजेपी के राज्यसभा सांसद
राघव चड्ढा
ने 12 अगस्त को इससे जुड़ा एक सवाल संसद में पूछा। सामाजिक न्याय मंत्री रामदास आठवले ने अपने जवाब में बताया है कि अंतरजातीय विवाहों के जरिए सामाजिक एकिकारण के लिए डॉ. आंबेडकर योजना और SC/ST पीड़ितों के लिए डॉ. आंबेडकर राष्ट्रीय राहत को 31 मार्च 2023 से मर्च कर दिया है। अब इन योजनाओं के तहत राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को पैसे दिए जाते हैं और योजनाओं को लागू करने की जिम्मेदारी उनकी ही है।
पिछले 3 साल में अंतरजातीय विवाह करने वाले कुल 457 जोड़ों को कुल 10.66 करोड़ रुपये दिए गए हैं। 2023-24 में 68, 2024-25 में 11 और 2025-26 में कुल 378 लाभार्थियों को इस योजना के तहत पैसे दिए गए हैं।
किसे मिलता है इसका फायदा?
इस योजना की पहली शर्त है कि दूल्हा या दुल्हन में से किसी एक को अनुसूचित जाति का और दूसरे को किसी दूसरी जाति का होना चाहिए। उदाहरण के लिए इसका फायदा तभी मिलेगा जब एक शख्स अनुसूचित जाति से हो और दूसरा सामान्य वर्ग या फिर ओबीसी वर्ग से हो। इसके लिए मैरिज सर्टिफिकेट होना जरूरी है। साथ ही, यह भी अनिवार्य है कि दोनों की यह पहली ही शादी हो और दोनों को मिलाकर सालाना आय 5 लाख से कम हो।
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एक बार योजना का लाभ ले चुके लोग दोबारा इसका फायदा नहीं ले सकते हैं। इसका आवेदन डॉ. आंबेडकर फाउंडेशन को भेजना होता है। सारी शर्तें और कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद पहले 50 प्रतिशत राशि कपल को ज्वाइंट रूप में डीडी बनाकर दी जाती है। बाकी के 50 प्रतिशत पैसे 5 साल के बाद दिए जाते हैं। एक साल में कुल 500 लोगों को ही इसका लाभ मिल सकता है। इसके लिए हर राज्य का एक टारगेट तय है। यह टारगेट राज्य की जनसंख्या और वहां SC की आबादी के हिसाब से तय होती है।