उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बने राम मंदिर के लिए आए चंदे और चढ़ावे के पैसे को लेकर शुरू हुआ विवाद हर दिन और गहरा होता जा रहा है। अब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा है कि वह इसके बारे में जानते तो बहुत कुछ हैं लेकिन बोल नहीं सकते हैं। बृजभूषण शरण सिंह ने किसी का नाम लिए बिना कहा कि वे लोग बहुत बड़े हैं इसलिए अगर उन्होंने कुछ बोला तो वह परेशानी में आ जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कभी समय आने पर वह इसके बारे में जरूर बोलेंगे लेकिन अभी उनकी हिम्मत नहीं है।
दिल्ली में लगभग 10 दिन के प्रवास के बाद गांव लौटे बृजभूषण सिंह ने अपने हालिया राजनीतिक और सामाजिक अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले कुछ समय से वह कई जटिल परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। साल 2023 में कुछ महिला पहलवानों की ओर से लगाए गए आरोपों से जुड़े विवाद का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से उस प्रकरण से उपजी परिस्थितियों को संभालने में लगे हुए हैं।
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राम मंदिर के चंदे पर क्या बोले बृजभूषण?
राम मंदिर के चंदे और चढ़ावे के पैसों से जुड़े सवाल के जवाब में बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, 'देखिए, अगर मैं सत्य बोल दूंगा तो बहुत परेशानी में आ जाऊंगा क्योंकि वे बहुत बड़े लोग हैं। सत्य बोलने की हिम्मत अभी हमारी नहीं है। कभी समय आएगा तो बोलेंगे।' उन्होंने इशारों ही इशारों में यह जरूर कहा कि उन्हें इसके बारे में जानकारी है। बता दें कि समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ने आरोप लगाए थे कि चंदे की रकम में बंपर गड़बड़ी की गई है।
इसी तरह के आरोप राम मंदिर ट्रस्ट के लेखाधिकारी रहे महिपाल सिंह ने भी लगाए हैं। महिपाल सिंह ने तो कहा है कि चंदे के पैसों में हेरफेर की सूचना जब उन्होंने चंपत राय को दी तब उन्हें हटा दिया गया और 7-8 महीने के सीसीटीवी फुटेज भी डिलीट करवा दिए गए। वहीं, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तमाम अधिकारी इस तरह के आरोपों को सिरे से खारिज कर रहे हैं।
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पेपर लीक पर भी बोले बृजभूषण
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बचाव करते हुए बृजभूषण सिंह ने कहा कि किसी मंत्री के इस्तीफा देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के पीछे एक संगठित तंत्र काम करता है जिसमें विभिन्न स्तरों के अधिकारी और कर्मचारी शामिल होते हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या किसी मंत्री के इस्तीफा देने से भविष्य में पेपर लीक रुकने की गारंटी दी जा सकती है।
बृजभूषण सिंह ने कहा कि मंत्री हर परीक्षा केंद्र या व्यवस्था की व्यक्तिगत निगरानी नहीं कर सकता। उनके अनुसार जब तक दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाना संभव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पहली बार बड़े अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होती दिखाई दे रही है और उन्हें उम्मीद है कि मौजूदा सरकार नकल एवं पेपर लीक से जुड़े नेटवर्क को तोड़ने में सफल होगी।