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नक्सलवाद से पश्चिम एशिया संकट तक, लाल किले से PM मोदी के भाषण की 10 बड़ी बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं से अपील की है कि वे नए अनुसंधान और रचनात्मकता के साथ देश के विकास में हिस्सेदारी लें, तभी भारत विकसित बन पाएगा।

Narendra Modi at Red Fort On the Independence Day

लाल किले की प्राचीर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। Photo Credit: PTI

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा इस अवसर को ऐतिहासिक बताया और कहा कि आजादी के बाद, यह पहली बार हो रहा है, जब लाल किले की प्राचीर से 'वंदे मातरम' की गूंज सुनाई दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हर दिल की धड़कन में वंदे मातरम की नाद है और हर घर में तिरंगा लहरा रहा है, तिरंगा बसा हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राष्ट्र अब उत्साह और उमंग के साथ नए संकल्पों को लेकर आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पिछले 12 वर्षों में सरकार की उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देशवासियों के संकल्प और प्रयासों की वजह से भारत ने विकास की नई रफ्तार पकड़ी है। उन्होंने दावा किया कि बीते 12 वर्षों में 25 करोड़ देशवासी गरीबी से बाहर निकले हैं। देशवासियों के प्रयासों के परिणामस्वरूप भारत एक बड़ी और तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था में बदल गया है।

यह भी पढ़ें: क्या है सप्तधारा योजना, जिसके दम पर देश बदलने की बात कर रहे हैं PM मोदी

नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री:-
आजादी के बाद लंबे समय तक देश अपेक्षित रफ्तार से आगे नहीं बढ़ सका। 2014 तक भारत को दुनिया ने 'फ्रैजाइल फाइव' में शामिल कर दिया था, लेकिन पिछले 12 वर्षों में देश ने नई गति हासिल की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण की 10 बड़ी बातें क्या हैं-

 

  • विकसित भारत पर जोर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'कुछ चीजें मैंने बताई है लेकिन मैं इससे भी आगे सोचता हूं। मैं जरा देश को झकझोरना चाहता हूं, मैं देश की शक्ति को भी झकझोरना चाहता हूं। देश यानी केवल सरकार नहीं होती है, देश का मतलब हर नागरिक जुड़ता है। क्या हम सोच नहीं सकते कि  फॉर्च्यून 500 की चर्चा तो हम बहुत सुनते हैं, आने वाले 1 दशक में इन फॉर्च्यून 500 में 50 कंपनियां भारत की क्यों न हों, ये लक्ष्य हमारा क्यों न होना चाहिए। भारत का भी एक बैंक टॉप 5 बैंकों में भी होना चाहिए। समय की मांग है कि दुनिया की 5 बड़ी फार्मा कंपनियों में भारत की भी 1-2 फार्मा कंपनियों का नाम गूंजना चाहिए। क्या समय की मांग नहीं है कि ग्लोबल लीडरशिप अब हमारे हाथ में होनी चाहिए? 

  • कल के नियमों से आगे बढ़ने का वक्त: पीएम मोदी ने कहा, 'हमारा लंबा इतिहास भी है, भाषाओं पर हमारा प्रभुत्व है, हमें विश्व में पहुंचना चाहिए। हमारे ऐसे ब्रांड हों, जिससे दुनिया आकर्षित होती है। हमारे ब्रांड हमारी पहचान हो और विश्व के लिए एक डेस्टिनेशन बन जाए, हमें इसके लिए काम करना होगा। मैं राज्य सरकारों को कहना चाहता हूं, मैं स्थानीय स्वराज्य की संस्थाओं को कहना चाहता हूं, भारत सरकार का भी ये दायित्व है कि हमें अपने सुधारों की गति बढ़ानी होगी। हम बीते हुए काल के नीति नियमों पर नहीं चल सकते हमें आने वाले काल के अनुसार नीति नियमों को गढ़ना होगा।'

  • दिमागी नक्सलियों को पहचानने की जरूरत: प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, '21वीं सदी में दशकों पुरानी चुनौतियों को खत्म करना बहुत अनिवार्य है। नक्सलवाद, माओवाद लाखों युवाओं के भविष्य को तबाह कर दिया, अनेक माताओं के दुधमल नौजवानों को छीन लिया, बर्बाद कर दिया और मां-बाप के सपनों को चूर-चूर कर दिया। इस नक्सलवाद ने चार दशक तक हिंदुस्तान के बहुत बड़े हिस्से को, वहां की बड़ी आबादी को दबोचकर रखा था, बंदूक की नोंक पर दबोचकर रखा ता और संविधान की धज्जियां उड़ा दी थीं और देश के सामान्य नागरिकों की रक्षा में 3500 से ज्यादा हमारे पुलिस सुरक्षा बल के जवान शहीद हो गए।  युद्ध के अंदर जितने सैनिक मरते हैं, उससे ज्यादा हमारे पुलिस-जवानों को जान की बाजी लगानी पड़ी ताकि देश के सामान्य मानवी को सुरक्षा मिले। 2014 में आपने हमें जब मौका दिया, उसी दिन हमने संकल्प लिया था कि हम देश को नक्सलवाद से मुक्त करेंगे और आज मुझे खुशी है कि नक्सली-माओवादी हिंसा, आखिरी सांस भी शायद रहने की ताकत नहीं रही। हथियारी नक्सल तो गए लेकिन दिमागी नक्सल मौके की तलाश में हैं, हिंसा और अराजकता के वे रास्ते खोज रहे हैं। समाज को गलत राह पर घसीटने के लिए, भांति-भांति के दांव खेल रहे हैं, इन दिमागी नक्सलों को पहचानना होगा।'

यह भी पढ़ें: LIVE: 80वां स्वतंत्रता दिवस, लाल किले पर वंदे मातरम की गूंज, देशभर में जश्न

  • शक्ति की सप्तधारा पर जोर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'आज लाल किले की प्राचीर से मैं देश के सामने 'शक्ति की सप्त धारा' का आह्वान करता हूं। आने वाले 5-7 साल में, जो पिछले 5-7 दशक में नहीं हुआ उस 'सप्त धारा' के सामर्थ्य से, उसकी शक्ति से हम देश को नई ऊंचाई और गति देंगे और नए लक्ष्यों को पार करने वाले सामर्थ्य देंगे। इसके साथ-साथ देश की युवा शक्ति के सामर्थ्य का भी भरपूर राष्ट्र निर्माण में उपयोग होगा, उनकी शक्ति जोड़ी जाएगी। आने वाले दिनों में जब मैं सप्त धारा की बात करता हूं तो उसकी पहली शक्ति है मैन्यूफैक्चरिंग पावर। इस सप्त धारा की दूसरी शक्ति है, कृषि और खाद्य उत्पादन। मेरी सप्त धारा की तीसरी शक्ति है, प्रौद्योगिकी और नवाचार। सप्त धारा की चौथी शक्ति है गति शक्ति। हमारी पांचवी सप्त धारा की शक्ति रक्षा बल है। हमारी सप्त धारा की छठी शक्ति है, ग्रीन इकॉनमी और ब्लू इकॉनमी। हमारी सप्त धारा की सांतवीं धारा है और दुनिया के लिए इसका अपना भी महत्व है जो है, भारत की 'सॉफ्ट पावर।'

  • विकसित भारत 2047 पर जोर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'मैंने जो भूमिका आपके सामने रखी है, उसके पीछे 2047 का लक्ष्य, मजबूत नींव पर खड़ा है। 2047 विकसित भारत का लक्ष्य, इन मजबूत नींव पर खड़ा है। 2047 विकसित भारत का लक्ष्य, पिछले 12 वर्षों में देशवासियों ने जो सामर्थ्य दिखाया है उस सामर्थ्य का हिस्सा है। सदी का एक-चौथाई हिस्सा बीत चुका है और अगला एक-चौथाई हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अब हम रुक नहीं सकते हैं, हमारी गति नहीं रुक सकती है। हमारी दिशा तय हो चुकी है। हमें उसे प्राप्त करके रहना है। इसके लिए हमें हमारे वर्क कल्चर को बदलना होगा, हमारे वर्क कल्चर को बदलते हुए हमें हमारी सोच को भी बदलना होगा। हमें हमारे काम की गति को भी बदलना होगा। जो काम पिछले 5-7 दशक में नहीं हुए हैं, वो काम हमें आगामी 5-7 साल में करने हैं। मेरा भरोसा है, मेरी देश की युवा शक्ति पर, मेरे देश के नौजवानों पर, मेरे देश की माताओं बहनों पर, मेरे देश के किसानों पर, मेरे देश के मजदूरों पर, कि हम इस सपने को साकार कर सकते हैं।'

  • आत्मनिर्भर भारत: प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'एक समय था जब मैं आत्मनिर्भरता की बात कर रहा था तो कुछ एयरकंडीशनर चेंबर में बैठकर सोचने वाले लोग हमें बता रहे थे कि ग्लोबलाइजेशन  का क्या होगा लेकिन पूरी दुनिया देख रही है कि पिछले 1 दशक में ऐसा लग रहा है कि लोगों ने ग्लोबलाइजेशन बोलना ही बंद कर दिया। जहां से ग्लोबलाइजेशन की आवाजें आती थीं, अब वो आवाजें सुनाई नहीं देती है। दुर्भाग्य से इस संकट के कालखंड में कुछ लोगों ने अपना रुतबा दिखाने के लिए संसाधनों को वेपनाइज्ड करने का खेल खेला है। दुनिया अपने पास जो कुछ भी है उसे वेपनाइज्ड करने में लगी है। संसाधनों का वेपनाइज्ड, पेट्रोल, डीजल, खाद, दवाईयां, इतना ही नहीं भूभाग को भी वेपनाइज्ड किया जा रहा है। ऐसे समय अगर हम आत्मनिर्भर के मंत्र को लेकर 10 साल सही दिशा में न चले होते तो हम ऐसी चुनौतियों का मजबूती से सामना कैसे करते।'


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