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भारत में 'एयर टैक्सी' योजना, टेस्टिंग से आगे क्यों नहीं बढ़ पाई?

भारत में एयर टैक्सी प्रोजेक्ट, अमेरिका, चीन और जापान जैसे देशों से पीछे है। कंपनियां अभी शुरुआती मुश्किलों से जूझ रहीं हैं।

Flying Car by Ajam Tamta

अल्मोड़ा में इनोवेटर रवि टाम्टा ने सिंगल-सीटर फ्लाइंग कार के प्रोटोटाइप सफल टेस्ट किया। Photo Credit: RaviTamta/Insta

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उत्तराखंड के अल्मोड़ा में रवि टाम्टा ने 13 साल की मेहनत और रिसर्च के बाद अपना इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल उड़ा दिया। हेलीकॉप्टर की तरह दिखने वाले इस 'एयर कार' की उड़ान देशभर में चर्चा का विषय है। बीते शुक्रवार को आर्मी हेलिपैड से 'हपिडा स्काइनैक्स' नाम के इस सिंगल-सीट प्रोटोटाइप ने उड़ान भरी तो हिंदुस्तानी निहाल हो गए। 

रवि टाम्टा लगभग एक मिनट तक हवा में रहे। जिला अधिकारी और स्थानीय लोग इस परीक्षण को देख रहे थे। जिला मजिस्ट्रेट अंशुल सिंह और एसएसपी चंद्रशेखर आर घोड़के भी मौजूद थे। प्रशासन की निगरानी में सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए गए थे।  

हपिडा स्काई प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक रवि टाम्टा ने कहा कि उनका मकसद भारत को पर्सनल एयर-मोबिलिटी टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बनाना है। अब इस प्रोटोटाइप के और ट्रायल होंगे, जिससे इसकी सुरक्षा, क्षमता और प्रदर्शन और बेहतर हो।  

 

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भारत के लिए यह बड़ी बात क्यों है?

एविएशन इंजीनियर अभिषेक राय से जब इस सवाल का जवाब पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'पर्सनल एयर-मोबिलिटी जैसी तकनीक अभी तक ज्यादातर विकसित देशों और बड़ी कंपनियों तक सीमित रही है। अल्मोड़ा जैसे छोटे शहर से एक स्वदेशी इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल का सफल परीक्षण चौंकाने वाला है।'

अभिषेक राय ने बताया, 'अगर इस प्रोटोटाइप में किए जा रहे बदलाव सफल रहते हैं तो इससे राज्य के दुर्गम रास्तों के लिए क्रांतिकारी माना जा सकता है। यह अभी शुरुआती चरण का परीक्षण है। सुरक्षा, क्षमता और प्रदर्शन को लेकर कई और परीक्षणों की जरूरत होगी।'

 

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दुनिया में पर्सनल एयर-मोबिलिटी का हाल क्या है?

पर्सनल एयर-मोबिलिटी की रेस में अमेरिका सबसे आगे है। जॉबी एविएशन नाम की एक कंपनी, फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) हासिल करने की रेस में चौथे स्टेज तक पहुंच गई है। आर्चर एविएशन की कोशिश है कि लॉस एंजिलिस में साल 2028 में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए एयर टैक्सी उपलब्ध करा दे। 

दूसरे नंबर पर चीन है। चीन पायलट-रहित उड़ानों में आगे है। ईहैंग का EH216-S मॉडल दुनियाभर में चर्चा आया था। चीन के सिविल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ चाइना (CAAC) की ओर से यह प्रमाणित है। 

यूरोप में जर्मनी की 'वोलोकॉप्टर' और 'लिलियम' जैसी कंपनियां आगे हैं। कुछ टू सीटर मल्टीकॉप्टर भी जर्मनी बना चुका है। 

वैरिफाइड मार्केट रिसर्च की एक रिपोर्ट बताती है, पर्सनल एयर ई टैक्सी का बाजार 2025 में लगभग 13.24 अरब डॉलर का था और 2033 तक बढ़कर करीब 25.86 अरब डॉलर होने की उम्मीद है। 

भारत में क्यों अटकी है यह योजना?

भारत में एयर टैक्सी योजना अभी भी सिर्फ टेस्टिंग के शुरुआती चरण में फंसी हुई है। सरला एविएशन जैसी कंपनी का SYL-X1 विमान अभी जमीन पर ही टेस्ट हो रहा है। इसमें प्रोपल्शन, स्ट्रक्चर और सुरक्षा सिस्टम की जांच चल रही है, लेकिन उड़ान परीक्षण अभी शुरू नहीं हुए हैं।

 

सरकार का लक्ष्य है कि 2026 के आसपास एयर टैक्सी की ट्रायल सेवाएं शुरू हो जाएं। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा है कि अगले साल पूरी तरह टेस्टिंग फेज में जाने की उम्मीद है और 2028 तक व्यावसायिक उड़ानें शुरू करने का प्लान है। भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जहां एयर मोबिलिटी का काम चल रहा है।अभी नियामक मंजूरी और सुरक्षा प्रमाणन की लंबी प्रक्रिया बाकी है। 

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कहां फंस जाता है पेच?

एविएशन इंजीनियर अभिषेक राय ने कहा, 'डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) से डिजाइन ऑर्गनाइजेशन अप्रूवल जैसे कदम अभी शुरू ही हुए हैं। किसी भी नए एयरक्राफ्ट को कमर्शियल सेवा तक पहुंचने में आमतौर पर कई साल लग जाते हैं।'

 

अभिषेक राय ने बताया, 'भारत में अभी बैटरी बनाने-निपटाने और शहर की बिजली व्यवस्था पर पड़ने वाले दबाव जैसे पर्यावरण संबंधी मुद्दों पर भी अभी खास चर्चा नहीं हुई है। डीजीसीए में तकनीकी और सुरक्षा निरीक्षण के कई पद खाली हैं, जिससे संस्था, उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर रही है। सुरक्षा प्रमाणन, सस्ते किराए के मॉडल और छोटे हवाई अड्डों जैसे बुनियादी ढांचों के न होने से भारत में बात टेस्टिंग से आगे बढ़ ही नहीं पा रही है।'


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