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AI और आतंकवाद का भारत ने क्या कनेक्शन बताया कि पाकिस्तान को अखर गया?

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने कहा कि आतंकवादी हमेशा आतंकवादी ही होता है। भारत ने आतंकवाद को पैसा मिलने से रोकने और आधुनिक तकनीक के गलत इस्तेमाल पर कड़े नियम बनाने की मांग की है।

Parvathaneni Harish

परवठानेनी हरीश, Photo Credit: PTI

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संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिधि परवठानेनी हरीश ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख दिखाया है। उन्होंने न्यूयॉर्क में आतंकवाद रोकने वाली मीटिंग में हिस्सा लिया। इस मीटिंग में बात हुई कि आतंकवाद को पैसा कैसे मिलता है और इसे कैसे रोका जाए। भारत ने साफ कहा है कि आतंकवाद किसी भी सूरत में हो, यह गलत है। उन्होंने कहा कि 'एक आतंकवादी हमेशा आतंकवादी ही होता है।' भारत का कहना है कि आतंकवाद को किसी भी बहाने से सही नहीं ठहराया जा सकता। अब इस लड़ाई में कोई ढील या दोहरे नियम नहीं चलेंगे।

 

दुनिया में एक संस्था है जिसे फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) कहते हैं। यह संस्था देखती है कि कहीं कोई देश आतंकवाद के लिए पैसा तो नहीं दे रहा। भारत ने उन देशों को चेतावनी दी है जो इस संस्था की जांच पर सवाल उठाते हैं। परवठानेनी हरीश ने कहा कि जो देश जांच का विरोध करते हैं, वे इसलिए ऐसा करते हैं क्योंकि वे खुद डर रहे हैं। उन्हें डर है कि उनकी चोरी पकड़ी जाएगी। भारत का कहना है कि जो देश अपनी जमीन या बैंक सिस्टम का इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने के लिए होने देते हैं, उन्हें अब यह काम बंद करना होगा। ऐसे देशों को फालतू की राजनीति छोड़कर इस संस्था के नियमों को मानना चाहिए।

 

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नई तकनीक का गलत इस्तेमाल

भारत ने बताया है कि अब आतंकवादी इंटरनेट और नई मशीनों का गलत फायदा उठा रहे हैं। वे ऑनलाइन लोगों से चंदा मांग रहे हैं। वे डिजिटल पैसे और प्रीपेड कार्ड का इस्तेमाल पैसा एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए कर रहे हैं। आतंकवादी अब ऐसे रास्ते ढूंढ रहे हैं जो सस्ते हों बहुत तेज हों और जिन पर नजर रखना मुश्किल हो। वे ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल हमले की योजना बनाने के लिए कर रहे हैं। वे नए लोगों को अपनी टीम में भर्ती करने के लिए भी इसका उपयोग कर रहे हैं। इन खतरों से निपटने के लिए भारत ने अपने यहां डिजिटल लेन-देन और वेरिफिकेशन के नियम काफी सख्त कर दिए हैं।

 

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बड़े कानून (CCIT) की मांग

भारत ने 'कॉम्प्रिहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म' (CCIT) नाम के एक बड़े कानून की मांग फिर से उठाई है। भारत का कहना है कि पिछले 30 सालों से इस कानून पर कोई फैसला नहीं हो पाया है, जो एक बहुत बड़ी असफलता है। भारत ने कहा कि आतंकवाद को रोकने के लिए दुनिया के पास एक मजबूत और साफ कानून होना चाहिए।

 

आतंकवाद का सामना करना सिर्फ एक देश की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए दुनिया के सभी देशों को साथ मिलकर काम करना होगा। सभी देशों को मिलकर आतंकवाद को पैसा मिलने वाले रास्ते पूरी तरह बंद करने होंगे। आखिर में भारत ने कहा कि आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए हर देश को पक्का इरादा दिखाना होगा। भारत ने कहा है कि आतंकवाद पर 'जीरो-टोलरेंस' की नीति अपनानी होगी, यानी आतंकवाद को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


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