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10 साल तक धीमी रही, अचानक कैसे बढ़ी रेलवे में निजी कंपनियों की रफ्तार?

पिछले एक दशक से पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP में भारतीय रेलवे की तरक्की धीमी रही। हालांकि, अब रेलवे में निजी कंपनियों की रफ्तार बढ़ी है। PPP में निजी भागीदारी बढ़ाने के लिए रेलवे ने हाल में दो नए मॉडल जोड़े हैं।

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सांकेतिक तस्वीर, Photo Credit-Chat GPT

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पिछले एक दशक से पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP में भारतीय रेलवे की तरक्की धीमी रही। हालांकि, अब रेलवे में निजी कंपनियों की रफ्तार बढ़ी है। रेल मंत्रालय ने हाल ही में संसदीय स्थायी समिति को बताया था कि अब तक यानी सालों की अवधि में कुल 16,686 करोड़ की लागत में 18 प्रोजेक्ट PPP मॉडल के तहत पूरे हो पाए हैं, जबकि ₹16,362 करोड़ के 7 प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ है। अब मंत्रालय ने 54 नए प्रोजेक्ट्स की ₹1.8 लाख करोड़ की पाइपलाइन तैयार कर ली है। इसमें करीब आधे प्रोजेक्ट सिर्फ रेल ट्रैक निर्माण के हैं,  यह क्षेत्र रेलवे के लिए नई बड़ी पहल है। 

 

PPP में निजी भागीदारी बढ़ाने के लिए रेलवे ने हाल में दो नए मॉडल जोड़े हैं, पहला है डेवलपमेंट पार्टनर मॉडल और हाइब्रिड एन्युटी मॉडल यानी HAM)। PPP यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के बारे में बात करें तो जब कोई बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट जैसे रेल लाइन, स्टेशन, हाईवे बनाना हो, तो सरकार इसे अकेले न बनाकर किसी निजी कंपनी के साथ मिलकर बनाती है।

 

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PPP को रफ्तार देने वाले निवेश की तैयारी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाइपलाइन में इटारसी-मानिकपुर तीसरी लाइन 9,562 करोड़, हरिदासपुर-विजयनगरम चौथी लाइन 8,321 करोड़, सात ट्रेनसेट मेंटेनेंस डिपो 21,000 करोड़, वैगन मेंटेनेंस डिपो 6,400 करोड़ और 44,500 करोड़ के पावर प्रोजेक्ट शामिल हैं। संसदीय समिति ने मंत्रालय से मंजूरी प्रक्रियाओं को आसान बनाने और निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के लिए संतुलित और जोखिम-साझेदारी मॉडल अपनाने की सिफारिश भी की है।

छह रेल लाइनों को मिली मंजूरी 

1 अगस्त 2026 को वित्त मंत्रालय की पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप अप्रेजल कमेटी (PPPAC) ने छह नई रेल लाइनों को मंजूरी दी, जिनकी लागत 31,814 करोड़ है। इसमें ओडिशा में चार, तेलंगाना और झारखंड में एक-एक नई रेल लाइनें शामिल हैं। इन प्रोजेक्ट्स को पहले अप्रैल में जोखिम-साझा वाले DBFOT मॉडल के तहत बुनियादी मंजूरी मिली थी लेकिन बाजार से 

मिले फीडबैक के बाद रेलवे ने इन्हें कम-जोखिम वाले HAM मॉडल में बदल दिया।

 

इसके तहत निर्माण के दौरान रेलवे 40% लागत अनुदान के रूप में देगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह निजी क्षेत्र का भरोसा जीतने के लिए एक सुरक्षित शुरुआत है, जिसके बाद टोल-आधारित मॉडल की राह खुल सकती है।

 

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रेलवे में निजी निवेश को नई रफ्तार मिलेगी

यह तेजी फरवरी 2026 में शुरू की गई नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन 2.0 (NMP 2.0) से भी जुड़ी है। इसके तहत वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक सरकारी संपत्तियों से 16.72 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। इसमें रेलवे की हिस्सेदारी 2.62 लाख करोड़ रुपये यानी करीब 16 फीसदी है। लंबे समय तक रेलवे इस मामले में पीछे माना जाता रहा। हालांकि अब रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास और नई PPP योजनाओं के जरिए निजी निवेश बढ़ाने की कोशिश हो रही है।

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