इंटरपोल, नोटिस, समझौते, कई इंतजाम फिर भी देश में प्रत्यर्पण मुश्किल क्यों है?
भारत में अपराध करके विदेश में फरार कई ऐसे कुख्यात नाम हैं, जिन्हें भारतीय एजेंसियां विदेश से वापस लाने में नाकाम रही हैं।

भारतीय अपराधियों का प्रत्यर्पण। Photo Credit: ChatGPT
भारत से फरार कुख्यात गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने दावा किया है कि खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में उसका हाथ है। निज्जर हत्याकांड को लेकर भारत और कनाडा के संबंध महीनों तक अपने सबसे बुरे दौर में रहे। भारतीय बदमाशों की वजह से भारत की छवि पूरी दुनिया में धूमिल हो रही है। ये अपराधी भारत में अपराध करके फरार होते हैं, बाहर आतंकी और आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते हैं और दुनिया ठीकरा भारत पर फोड़ती है। इन्हें प्रत्यर्पण के जरिए देश वापस लाना, भारत के लिए बड़ी चुनौती आज भी बनी हुई है।
दीवान लॉ कॉलेज के विधि विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर निखिल गुप्ता ने कहा, 'भारत से फरार होने के कई रास्ते हैं। नेपाल, श्रीलंका से लेकर भूटान तक। भारत के कई वांछित अपराधी, अपराध करने के बाद फरार हुए और भारत तलाश में ही रह गया। भारत ने कुछ देशों से प्रत्यर्पण संधि की है, जिसमें दूसरे देशों ने भारतीय अपराधियों की लौटाने की प्रतिबद्धता जताई है लेकिन इसके जरिए भारत आने वाले अपराधियों की दर बेहद कम है।'
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कितने अपराधियों के प्रत्यर्पण में कामयाब हुआ है भारत?
भारतीय एजेंसियों ने पिछले आठ महीनों में 51 सख्त अपराधियों को भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है, जिनमें अगस्त में अकेले 6 शामिल हैं। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2026 में जुलाई तक 45 फरार अपराधियों को वापस लाया गया, जबकि 1 से 18 अगस्त के बीच छह और लौटाए गए। 2019 से 2026 के बीच कुल 274 फरार अपराधियों को 36 देशों से वापस लाया गया है।
2025 में सबसे अधिक 70, 2024 में 43, 2023 में 37, 2022 में 40, 2021 में 23, 2020 में 7 और 2019 में 9 अपराधी शामिल हैं। इन 274 फरारों में 62 हत्या, डकैती और हिंसक अपराधों, 53 यौन अपराध, बलात्कार और पॉक्सो, 45 अन्य आपराधिक गतिविधियों से जुड़े हैं। 42 संगठित अपराध, गैंगस्टर और हफ्ता वसूली, 18 मानव तस्करी और अपहरण, 17 आतंकवादी, राष्ट्र-विरोधी और नार्को-टेरर से जुड़े हैं, 16 नारकोटिक्स, NDPS और ड्रग तस्करी, 12 तस्करी, नकली मुद्रा, साइबर, प्रतिबंधित सामान और 9 धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों से जुड़े हैं। 
18 अगस्त को मलेशिया से तीन गैंगस्टर, जसप्रीत सिंह उर्फ जस बेहबल उर्फ गोरा, अजय सिंह उर्फ अजय मलेशिया और पवनदीप सिंह को प्रत्यर्पित कर पंजाब पुलिस को सौंपा गया। ये बम्बीहा गैंग से जुड़े थे। 14 अगस्त को यूएई से विरेंद्र सिंह बसोया और अप्रैल 2026 में तुर्की से मोहम्मद सलीम डोला को भी वापस लाया गया।

फरार अपराधियों के साथ भारत करता क्या है?
2019 से 2026 के बीच फरार अपराधियों की 17,874 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की गईं, जबकि फरार आर्थिक अपराधियों के मामलों में 18,762 करोड़ रुपये वापस किए गए। रेड कॉर्नर नोटिस 2022 में 40, 2023 में 100, 2024 में 107, 2025 में 112 और 2026 में अब तक 182 जारी किए गए हैं, जबकि पिछले तीन वर्षों में कुल 401 नोटिस जारी हुए।
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कितने देशों के साथ है भारत की प्रत्यपर्ण संधि?
विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत के साथ 48 देशों ने प्रत्यर्पण संधि पर सहमति जताई है। 12 देशों के साथ पूरी व्यवस्था बन गई है। इन देशों के साथ कई बहुपक्षीय समझौतों भी हैं। आतंकवाद, नशीली दवाओं और विमान अपहरण जैसे अपराधों से निपटने के लिए ये प्रत्यपर्ण किए गए हैं। फिर भी अपराधियों को लाने में भारत की सफलता दर बहुत कम है। 
प्रत्यर्पण की चुनौतियां क्या हैं?
गोल्डी बराड़, गुरपतवंत सिंह पन्नू ही नहीं, कई ऐसे आतंकी और आर्थिक अपराधी हैं, जिन्हें गृहमंत्रालय ने भी अपराधी माना है, एजेंसियां कोशिश भी कर रहे हैं लाने की लेकिन ला नहीं पा रहीं हैं। विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, डेविड हेडली और भोपाल गैस त्रासदी के सबसे बड़े विलेन के तौर पर बदनाम वारेन एंडरसन जैसे कई मामले हैं, जिनमें भारत असफल रहा है।
इंटरनेशनल स्टडीज में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व शोधार्थी डॉ. दीपक कुमार ने कहा, 'प्रत्यर्पण में कानूनी अड़चनें कई तरह की हैं। नई संधियों में दोहरे अपराध का सिद्धांत लागू होता है। यानी अपराध दोनों देशों में अपराध होना चाहिए। राजनीतिक अपराध, मौत की सजा की संभावना या दोहरी सजा का खतरा होने पर भी प्रत्यर्पण रुक जाता है। डेविड हेडली का मामला इसका उदाहरण है। अमेरिका ने उसे पहले ही सजा दे दी, इसलिए भारत उन्हें नहीं ला सका।'
डॉ. दीपक कुमार, पूर्व शोधार्थी, JNU:-
भारत के सामने मानवाधिकार की चिंताएं और भी बड़ी बाधा हैं। यूरोपीय देश और ब्रिटेन भारतीय जेलों की खराब हालत, बैरक से ज्यादा भीड़, गंदगी, यातना के आरोपों को देखकर प्रत्यर्पण देने से कतराते हैं। अपराधी कई मामलों में यही दलीलें देकर बच भी जाते हैं। विजय माल्या के वकीलों ने भी आर्थर रोड जेल की स्थिति का हवाला दिया। नील्स होल्क और संजीव कुमार चावला जैसे मामलों में भी यही वजह बनी। भारतीय जेलों की खराब छवि, प्रत्यपर्ण दर ज्यादा न होने की एक वजह है।
क्या वजहें हैं, जिनकी वजह से प्रत्यर्पण खारिज होता है?
असिस्टेंट प्रोफेसर निखिल गुप्ता ने कहा, 'जांच में देरी, गलत दस्तावेज या सबूतों की कमी की वजह से भी प्रत्यर्पण की मांग कई बार खारिज हो जाती है। विदेशी अदालतें भारतीय जांच एजेंसियों की लापरवाही पर सवाल उठाती हैं। राजनयिक रिश्ते और आपसी विश्वास का न होना भी एक चुनौती है। अगर भारत खुद दूसरे देशों के अनुरोधों को तेजी से नहीं निपटाता तो वे भी सहयोग कम करते हैं।'

निखिल गुप्ता, असिस्टेंट प्रोफेसर, दीवान लॉ कॉलेज:-
भारत के पाकिस्तान, चीन और म्यांमार से रिश्ते खट्टे रहे हैं। इन देशों के साथ प्रत्यर्पण संधि ही नहीं है। दाऊद इब्राहिम, हाफिज सईद, मसूद अजहर, जकी-उर-रहमान लखवी, साजिद मीर, अब्दुल रऊफ, टाइगर मेमन और कई खालिस्तानी आतंकी पाकिस्तान में बसे हैं, जिन्हें लाने के लिए भारत एड़ी-चोटी का जोर लगा चुका है लेकिन नहीं लौटा पाया है। अगर पाकिस्तान के साथ सामानय रिश्ते होते तो शायद ये आ भी जाते। कूटनीतिक रिश्ते न होने से भारत इन्हें कभी ला ही नहीं पाया।
चुनौती जिससे चाहकर भी नहीं उबर सकता भारत?
निखिल गुप्ता ने कहा, 'पाकिस्तान, चीन और म्यांमार से संधियां न होने से सीमा पार अपराधी आसानी से बच जाते हैं। समाधान के लिए भारत को और ज्यादा देशों से संधियां करनी चाहिए। जांच एजेंसियों अगर सही वक्त पर डोजियार सौंप सकें तो भारत के पक्ष में नतीजे आ सकते हैं। भारत को सबसे पहले जेल व्यवस्था सुधारनी होगी, जिससे मानवाधिकार वाले बहाने दूसरे देश इनकार न कर पाएं। आर्थिक अपराधियों के लिए कूटनीतिक संबंधों को और संवारने की जरूरत है। राजनयिक दबाव और आपसी सहयोग अगर बेहतर हों तो ज्यादा बेहतर परिस्थितियां भारत के पक्ष में बन सकती हैं।'
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