पश्चिम बंगाल की जादवपूर यूनिवर्सिटी को भारतीय जनता पार्टी के सीनियर नेता और मंत्री दिलीप घोष ने गांजा और शराबियों का अड्डा बताया है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय का पुराना विवादित इतिहास है। वहां पहली बार ऐसा नहीं हो रहा है, जब गैरकानूनी गतिविधियां सामने आईं हों। उन्होंने कहा है कि रविवार को कहा कि यहां गैर-कानूनी गतिविधियां पहले भी होती रहीं हैं।
दिलीप घोष बार-बार जोर दे रहे हैं कि यह अपराधियों के लिए किसी द्वीप की तरह रहा है। ड्रग्स और गांजे का व्यापार यहां होता रहा है। उन्होंने उन घटनाओं का जिक्र किया, जब विश्वविद्यालय में राज्यपाल और केंद्रीय मंत्रियों के आने का विरोध हुआ। जादवपुर विश्वविद्यालय, वाम और तृणमूल कांग्रेस के प्रभुत्व वाला परिसर रहा है, ऐसे बीजेपी की नई शासन व्यवस्था भी चुनौतियों का सामना कर रही है।
यह भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल के पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी की मौत, दफ्तर में लटकती मिली लाश
दिलीप घोष, मंत्री, पश्चिम बंगाल:-
जादवपुर को लेकर अभी जो विवाद चल रहा है, वह अपनी तरह का पहला मामला नहीं है। उन्होंने इसे असल में एक अलग-थलग इलाका बना दिया था। वहां देश-विरोधी नारे लगाए गए और ड्रग्स और गांजे के व्यापार जैसी गैर-कानूनी गतिविधियां बड़े पैमाने पर हो रही थीं। हमें इस बारे में पहले से ही पता था।
'कैंपस के भीतर जो हो रहा है, उसे संभालना होगा'
दिलीप घोष ने कहा, 'वहां एक केंद्रीय मंत्री और माननीय राज्यपाल का अपमान किया गया, फिर भी किसी ने कुछ नहीं कहा। कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का काम है और कैंपस के अंदर जो हो रहा है, उसे स्थानीय प्रशासन को संभालना होगा।'
यह भी पढ़ें: BJP सांसद अनंत महाराज से पश्चिम बंगाल सरकार ने क्यों छीना बंग विभूषण पुरस्कार?
शुभेंदु अधिकारी ने क्या बताया है?
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि बंगाल में रहने वाले हर व्यक्ति को वंदे मातरम गाना होगा। उन्होंने जादवपुर यूनिवर्सिटी में हाल की झड़पों के बाद कहा कि उनकी सरकार कैंपस के अंदर और बाहर राष्ट्रवाद को मजबूत करेगी। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ तत्व वंदे मातरम गाने और राष्ट्रीय झंडे का सम्मान करने नहीं देते। वे 26 जनवरी और 15 अगस्त के समारोह का भी विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि जादवपुर में राष्ट्रवाद, भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों को बढ़ावा दिया जाएगा।
जादवपुर में हुआ क्या था?
19 अगस्त की रात जादवपुर विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग फैकल्टी स्टूडेंट्स यूनियन की जनरल असेंबली के दौरान वामपंथी छात्र संगठनों और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के बीच विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। दो ABVP से जुड़े छात्रों को अस्पताल में इलाज कराना पड़ा। इसके बाद परिसर में बाहरी लोग घुस आए, जिन्होंने बाइक पर लाठियां लेकर पोस्टर फाड़े और जलाए। छात्रावासों पर पत्थर, कीचड़ और अंडे फेंके गए।
सुरक्षाकर्मी निष्क्रिय रहे तथा पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन से संपर्क नहीं हो सका। प्रोफेसरों के हस्तक्षेप से स्थिति नियंत्रित हुई। 20 अगस्त को एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने गोलपार्क से जादवपुर पुलिस स्टेशन तक मार्च निकाला। भीड़ ने बैरिकेड तोड़कर गेट नंबर 4 की ओर बढ़कर ताला तोड़ने और गेट पर चढ़ने की कोशिश की। इस दौरान विश्वविद्यालय के नंदलाल बोस से जुड़े प्रतीक चिह्न का एक हिस्सा टूट गया।
यह भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल: स्कूलों के मिड-डे मील में मिलेगा अंडा, CM शुभेंदु ने किया एलान
गेट के अंदर के छात्रों पर पानी की बोतल फेंके गए, पत्थरबाजी हुई और जमकर गाली-गलौज की गई। कुछ निर्दोष छात्रों को भी पीटा गया, उन्हें पाकिस्तान और चीन का एजेंट कहा गया। घटना में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। कुलपति चिरंजीब भट्टाचार्य ने आंतरिक जांच का आदेश दिया है और परिसर में पुलिस तैनाती का प्रस्ताव रखा है। भाजपा ने एबीवीपी को स्वतंत्र संगठन बताते हुए हिंसा से दूरी बनाई है जबकि वामपंथी संगठनों ने इसे संगठित हमला करार दिया है। पुलिस का कहना है कि बाहरी लोगों को हटा दिया गया।
जादवपुर यूनिवर्सिटी हर सुर्खियों में क्यों आती है?
जादवपुर यूनिवर्सिटी लंबे समय से राजनीतिक और प्रशासनिक विवादों का केंद्र रही है। अगस्त 2023 में रैगिंग के चलते एक प्रथम वर्ष के छात्र की छात्रावास में मौत हो गई थी। यौन उत्पीड़न से जुड़े मामले भी सामने आई है। विश्वविद्यालय बिना पूर्णकालिक कुलपति की वजह से भी विवादों के घेरे में रहा।
दिसंबर 2025 में एक परीक्षा के दौरान हिजाब पहनी छात्रा से हेडफोन जांच के नाम पर हिजाब हटवाने को लेकर भी विवाद हुआ था। राज्य सरकार ने जांच समिति बैठा दी थी। यूनिवर्सिटी में कभी चुनाव न होने की वजह से विवाद हुआ, कभी राज्यपाल की एंट्री पर हंगामा हुआ था। राजनीतिक वजहों से यह विश्वविद्यालय, चुनाव से पहले तक तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच टकराव के केंद्र में रहा है।