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'छात्रों पर बल प्रयोग गलत, झारखंड सरकार बात सुने', राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने कहा है कि झारखंड में हो रहे विरोध प्रदर्शन में ताकत का इस्तेमाल गलत है। पढ़ें रिपोर्ट।

Rahul Gandhi on Jharkhand Protest

कांग्रेस दफ्तर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए राहुल गांधी। Photo Credit: INC/X

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दिल्ली में NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित तौर पर गोली चलाने और पैलेट गन के इस्तेमाल के खिलाफ राहुल गांधी एक बार फिर सरकार से जवाबदेही की मांग की है। उन्होंने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सरकार यह बताए कि गोली किसने चलाई है, सरकार पहले यह जवाब दे।

राहुल गांधी ने कहा, 'अमित शाह का गुब्बारा फट गया है, अब उसमें गैस नहीं भरी जा सकती है। अमित शाह में यह हिम्मत नहीं है कि वह हमारे सामने खड़े हो जाएं सदन में। नरेंद्र मोदी में भी गट्स नहीं है।'

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राहुल गांधी, नेता विपक्ष, राहुल गांधी:-
झारखंड में विरोध-प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल का इस्तेमाल गलत है। छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है और बातचीत से ही समाधान निकल सकता है। झारखंड सरकार को इन छात्रों की बात सुननी चाहिए और हर समस्या का तुरंत समाधान करना चाहिए।

राहुल गांधी ने झारखंड के मुद्दे पर अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं बोला। राहुल गांधी ने कहा, 'छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर बल प्रयोग का इस्तेमाल गलत है। हम इसकी आलोचना करते हैं।'

मल्लिकार्जुन खड़गे ने क्या मांग की है?

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 3 मांगें रखी हैं-

  • पहली मांग: 20 जुलाई को संसद का सत्र प्रारंभ होने के पहले दिन से ही विपक्ष ने सुदृढ़ता से अपनी मांगें रखी हैं। पहली मांग हमारी यही है कि केंद्रीय गृह मंत्री, दिल्ली पुलिस के द्वारा जो अत्याचार हुआ, पैलेट गन्स चली, आंसू गैस के गोले दागे गए, लाठीचार्ज हुआ। हम चाहते थे कि उस पर चर्चा हो और वे सदन में आएं। पेपर लीक हुए भी कई साल हो गए हैं, जिस पर हम पहले से चर्चा चाहते हैं लेकिन उन्होंने 14-15 दिनों तक इस विषय पर कुछ नहीं कहा। इसका अर्थ है कि वे नहीं चाहते थे कि चर्चा हो। हम दबाव बनाते रहे लेकिन वे नहीं आए।
  • दूसरी मांग: प्रधानमंत्री ने जो राम मंदिर के ट्रस्ट की स्थापना की, उन्होंने ट्रस्ट के सदस्य चुने, ट्रस्ट को चलाने की प्रक्रिया भी बताई... राम मंदिर में जिन लोगों ने चोरी की है, उन्हें सख्त से सख्त सजा होनी चाहिए और प्रधानमंत्री को इसका खुलासा करना चाहिए लेकिन इस मांग पर भी ध्यान नहीं दिया गया... 
  • तीसरी मांग: प्रधानमंत्री मोदी खुद देश की जनता से माफी मांगें क्योंकि हजारों-लाखों लोग राम मंदिर में आस्था रखते हैं। ऐसी जगह पर इतनी बड़ी घटना होती है और प्रधानमंत्री ने कुछ नहीं कहा। यह पहली बार है कि  ऐसे विषय पर प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री, दोनों ने चुप्पी साधी हुई है। हम इन तीनों विषयों पर लड़ रहे हैं। खासकर राहुल गांधी ने इन सभी मुद्दों पर हर जगह पहुंचकर अपना वक्तव्य दिया। वे इन विषयों को पहले से उठाते आए हैं।

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राहुल गांधी ने कहा, 'सवाल यह नहीं था कि अमित शाह संसद में आकर कुछ आम विषयों पर भाषण देंगे। सवाल हमेशा यह रहा है कि अमित शाह को यह साफ़ करना होगा कि दिल्ली में हमारे युवाओं पर गोली चलाने का आदेश किसने दिया था। पेलेट गन चलाई गईं, छात्रों को कील लगी लाठियों से पीटा गया। उन्हें साफ़-साफ़ बताना चाहिए। क्या उन्होंने इसका आदेश दिया था या नहीं?'

राहुल गांधी, नेता विपक्ष, लोकसभा:-
अगर उन्होंने आदेश दिया था तो हमारे बच्चों पर गोली चलवाने के लिए वे दोषी हैं। और अगर उन्हें इस घटना के बारे में पता नहीं था, तो वे अयोग्य हैं। दोनों ही सूरतों में, उन्हें पद छोड़ देना चाहिए। यही चर्चा का विषय था। दूसरी बात, प्रधानमंत्री जो हुआ है उसके लिए माफी मांगें। और तीसरी बात राम मंदिर में चोरी का मुद्दा था। प्रधानमंत्री के बहुत करीबी लोगों ने राम मंदिर में चोरी की है। ये तीन मुद्दे हैं। तो अब अमित शाह अचानक कह रहे हैं कि वे बोलने को तैयार हैं। हमें उनकी मनगढ़ंत बातों में कोई दिलचस्पी नहीं है। 

राहुल गांधी ने कहा, 'हमें इस बात में दिलचस्पी है कि क्या उन्होंने हमारे बच्चों पर गोली चलाने का आदेश दिया था या नहीं। सबसे पहले, उन्हें यह बात पूरी तरह साफ़ करनी चाहिए। उसके बाद ही किसी चर्चा का सवाल उठता है। यही स्थिति है। और विपक्ष यही मांग कर रहा है। हम पिछले 15 दिनों से यही मांग कर रहे है?'

झारखंड पर क्या बोले राहुल गांधी?

राहुल गांधी ने रांची में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज पर कहा, 'झारखंड के छात्रों के लिए मेरा संदेश साफ है कि हम शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा की निंदा करते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह कहां हो रहा है, हम इसकी निंदा करते हैं, हम इसके खिलाफ हैं, हम इसकी सलाह नहीं देते और न ही इसका समर्थन करते हैं। जब तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से हो रहा है, तब तक उस प्रदर्शन पर हिंसात्मक कार्रवाई करना, हम इसके खिलाफ हैं।'


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