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1 नवंबर को ही क्यों 8 राज्यों का स्थापना दिवस? जानिए गठन की कहानी

आज भारत के आठ राज्य अपना स्थापना दिवस मना रहे हैं। इन राज्यों में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और छत्तीसगढ़ शामिल है। इनके गठन के पीछे कहानी समझते हैं।

पोट्टी श्रीरामुलु की प्रतिमा का अनावरण करते आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की तस्वीर

पोट्टी श्रीरामुलु की प्रतिमा के साथ मुख्य मंत्री चंद्रबाबू नायडु, फोटो क्रेडिट- सोशल मीडिया

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आज यानी 1 नवंबर को भारत के आठ अलग-अलग राज्य अपना स्थापना दिवस मना रहे हैं। इन राज्यों में दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत तक के राज्य शामिल हैं। दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के अलावा उत्तर भारत के मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और छत्तीसगढ़ भी अपना स्थापना दिवस मना रहे हैं। हालांकि, इन सभी राज्यों का गठन अलग-अलग सालों में हुआ था, लेकिन तारीख एक ही है। किसी को भाषा के आधार पर अलग पहचान मिली तो किसी का गठन क्षेत्रीय मांग के बाद हुआ। साल 1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम लागू होने के बाद देश के नक्शे में बड़ा बदलाव हुआ।

 

भारत ने पहले अंग्रेजों से अपनी पहचान की लड़ाई लड़ी थी। आजादी के बाद अलग-अलग राज्यों में भाषा और सांस्कृतिक पहचान के आधार पर अलग राज्य बनाने की मांग उठने लगी। लोग अपनी भाषा में सांस्कृतिक पहचान ढूंढते थे। जब सरकार ने इन मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो विरोध तेज हो गया। 1 नवंबर 1956 को भारत सरकार ने राज्य पुनर्गठन अधिनियम लागू किया था। इस अधिनियम के बाद भारत का नक्शा और राज्यों की सीमाएं हमेशा के लिए बदल गईं। इन आठ राज्यों का गठन तीन अलग-अलग सालों में हुआ। 1956 के बाद साल 1966 और फिर 2000 में इन राज्यों का गठन हुआ। आइए, इन आठ राज्यों के गठन की कहानी समझते हैं।

1956 में पहली बार बदला था नक्शा

भाषा के आधार पर राज्य मांगने का पहला उदाहरण दक्षिण भारत के आंध्र क्षेत्र में देखने को मिला। आज का आंध्र प्रदेश तब मद्रास और हैदराबाद राज्यों के तेलुगु भाषी क्षेत्रों में बंटा हुआ था। यहां तेलुगु बोलने वाले लोग अपनी अलग पहचान और अलग राज्य चाहते थे। तेलुगु भाषियों के लिए अलग राज्य की मांग को लेकर पोट्टी श्रीरामुलु ने आमरण अनशन किया था। 58 दिनों के अनशन के बाद 15 दिसंबर 1952 को उनकी मौत हो गई। इसके बाद आंदोलन तेज हुआ और 1 अक्टूबर 1953 को मद्रास राज्य से अलग आंध्र राज्य बना। 1 नवंबर 1956 को हैदराबाद राज्य के तेलुगु भाषी इलाकों को मिलाकर आंध्र प्रदेश का गठन हुआ।

 

तमिलनाडु का गठन भी 1 नवंबर 1956 को मद्रास राज्य के रूप में हुआ था। राज्य पुनर्गठन के दौरान तमिल भाषी इलाकों को मिलाकर इसका स्वरूप तय किया गया। बाद में मद्रास राज्य का नाम बदलकर तमिलनाडु करने की मांग उठी। 18 जुलाई 1967 को नाम बदलने का प्रस्ताव पारित हुआ और 14 जनवरी 1969 से तमिलनाडु नाम आधिकारिक रूप से लागू हो गया।

 

केरल पहले त्रावणकोर, कोचीन और मद्रास प्रेसीडेंसी के मालाबार क्षेत्र में बंटा हुआ था। 1 जुलाई 1949 को त्रावणकोर और कोचीन का विलय कर त्रावणकोर-कोचीन राज्य बनाया गया। इसके बाद मलयालम भाषी लोगों ने भाषा के आधार पर अलग राज्य बनाने की मांग की। इस मांग को ऐक्य केरल आंदोलन के नाम से जाना गया। के. केलप्पन इस आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। 1 नवंबर 1956 को त्रावणकोर-कोचीन और मद्रास राज्य के मालाबार क्षेत्र को मिलाकर केरल का गठन हुआ।

 

कर्नाटक मैसूर रियासत, बॉम्बे राज्य, मद्रास राज्य, हैदराबाद राज्य और कूर्ग सहित कई प्रशासनिक इकाइयों में बंटा था। सभी कन्नड़ भाषी क्षेत्रों को एक राज्य में मिलाने के लिए 19वीं सदी के आखिरी वर्षों में आंदोलन शुरू हुआ था। 1890 में आर. एच. देशपांडे ने धारवाड़ में कर्नाटक विद्या वर्धक संघ की स्थापना की, जबकि अलूर वेंकट राव इस आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। इसे कर्नाटक एकीकरण आंदोलन कहा गया। इसके बाद 1 नवंबर 1956 को इन क्षेत्रों को मिलाकर मैसूर राज्य बनाया गया, जिसका नाम 1 नवंबर 1973 को बदलकर कर्नाटक कर दिया गया।

 

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मध्य प्रदेश का गठन किसी बड़े आंदोलन के चलते नहीं हुआ था। इस प्रदेश का गठन सरकार ने प्रशासनिक सुविधा के लिए किया था। मध्य प्रदेश का गठन 1 नवंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत हुआ था। इससे पहले आज का मध्य प्रदेश पांच प्रशासनिक इकाइयों में बंटा था—पुराना मध्य प्रदेश, मध्य भारत, विंध्य प्रदेश, भोपाल और राजस्थान का सिरोंज क्षेत्र। इन सभी को मिलाकर नया मध्य प्रदेश बनाया गया। इसके गठन के पीछे किसी बड़े जनआंदोलन या अलग राज्य की मांग के बजाय प्रशासनिक पुनर्गठन और राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों की भूमिका थी।

 

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पंजाब से अलग हुआ हिंदी भाषी पंजाब

पंजाब और हरियाणा पहले अविभाजित पंजाब का हिस्सा थे। हरियाणा के हिंदी भाषी क्षेत्रों को अलग राज्य बनाने की मांग उठ रही थी। वहीं, पंजाबी भाषी लोगों के लिए अलग पंजाब की मांग को लेकर आंदोलन तेज हो गया था। इसे पंजाबी सूबा आंदोलन कहा गया। इसके प्रमुख चेहरों में अकाली दल के मास्टर तारा सिंह और संत फतेह सिंह शामिल थे। 1966 में केंद्र सरकार ने जस्टिस जे. सी. शाह की अध्यक्षता में शाह आयोग बनाया, जिसने पंजाबी भाषी और हिंदी भाषी क्षेत्रों की सीमाएं तय कीं। इसके बाद 1 नवंबर 1966 को हरियाणा अलग राज्य बना और पंजाब को भी नया स्वरूप मिला। चंडीगढ़ को केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया और पंजाब-हरियाणा की साझा राजधानी का दर्जा दिया गया। इसी वजह से दोनों राज्य 1 नवंबर को स्थापना दिवस मनाते हैं।

 

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बड़े आंदोलन के दबाव में नहीं बना था छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ बनने के पीछे क्षेत्रीय पहचान और विकास जैसे मुद्दे थे। यहां के लोगों का मानना था कि अलग राज्य बनने से क्षेत्र की जरूरतों के मुताबिक विकास की योजनाएं बनाई जा सकेंगी। अलग छत्तीसगढ़ की मांग 1920 के दशक से उठ रही थी। हालांकि, झारखंड और उत्तराखंड की तरह यहां कोई मजबूत और व्यापक जनआंदोलन खड़ा नहीं हो पाया। 1990 के दशक में कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने अलग राज्य की मांग का समर्थन किया। इसके बाद मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के तहत 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ अलग राज्य बना। रायपुर को इसकी राजधानी बनाया गया।

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