सूचना एवं प्रसारण और संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल मुरुगन ने मंगलवार को अपने दोनों मंत्री पदों और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि वह जमीन पर काम करना चाहते हैं। अब वह कार्यकर्ताओं के साथ खड़े होकर 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले तमिलनाडु में BJP को मजबूत करने के लिए पूरा समय देना चाहते हैं।
एल मुरुगन ने X पर लिखा, 'प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी
के नेतृत्व में भारत माता और तमिलनाडु की सेवा करना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है। दिहाड़ी मजदूर के बेटे से केंद्रीय मंत्रिपरिषद तक पहुंचना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है।'
एल मुरुगन पहली बार 2021 में राज्यसभा के लिए चुने गए थे। 2024 में वह दूसरी बार राज्यसभा पहुंचे। अब वह तमिलनाडु बीजेपी के लिए काम करेंगे। उन्होंने केंद्रीय राजनीति से ब्रेक लेने का फैसला किया है।
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प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी में क्या लिखा?
एल मुरुगन ने इस्तीफे के साथ प्रधानमंत्री को पांच पन्नों की चिट्ठी भी लिखी है। इसमें उन्होंने प्रधानमंत्री के हाल के तमिलनाडु दौरे का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि हर पड़ाव पर लोगों का स्नेह और उम्मीद देखकर वह गर्व और आभार से भर गए। उनके मुताबिक इससे तमिलनाडु, पार्टी और देश के लिए और काम करने का संकल्प मजबूत हुआ है।
एल मुरुगन ने लिखा कि वह किसी राजनीतिक परिवार से नहीं हैं और बहुत गरीब परिवार से आते हैं। उनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूर और पशुपालक रहे हैं और आज भी कोनूर गांव में सादा जीवन जी रहे हैं। उन्होंने लिखा कि उनके माता-पिता ने कभी सोचा भी नहीं था कि उनका बेटा केंद्र सरकार में सेवा करेगा।
ABVP से मंत्रिपरिषद तक का सफर कैसा रहा?
एल मुरुगन सरदार पटेल और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रवादी विचारों से प्रेरित होकर कॉलेज में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से ABVP से जुड़े। उन्होंने लिखा कि करीब 30 साल ABVP और BJP में रहते हुए उनका मार्गदर्शक सिद्धांत यही रहा, राष्ट्र पहले, पार्टी उसके बाद, खुद सबसे आखिर में।
उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व और जमीनी कार्यकर्ताओं को पहचानने की BJP की प्रतिबद्धता से उन्हें उम्मीद से कहीं ज्यादा अवसर मिले। वह राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष रहे। उन्होंने दो बार राज्यसभा सदस्य बनकर और प्रधानमंत्री की मंत्रिपरिषद में रहकर काम किया। उन्होंने सूचना और प्रसारण, संसदीय कार्य, मत्स्य पालन और पशुपालन मंत्रालयों में काम किया। पार्टी ने उन्हें विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ने का मौका भी दिया।
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प्रधानमंत्री की तारीफ में क्या कहा?
चिट्ठी में केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन ने लिखा कि प्रधानमंत्री की मंत्रिपरिषद में पांच साल के दौरान उन्होंने करीब से प्रधानमंत्री का धैर्य, करुणा और असाधारण समर्पण देखा। उन्होंने तिरुवल्लुवर का एक दोहा भी लिखा। इसका भावार्थ है कि उदारता, दया, न्यायपूर्ण शासन और प्रजा की देखभाल करने वाला शासक राजाओं के बीच प्रकाश की तरह चमकता है।
एल मुरुगन ने लिखा कि जब भी उन्होंने तमिलनाडु से जुड़े मुद्दों, संघर्ष वाले इलाकों में फंसे तमिल लोगों की सुरक्षा या भारतीय मछुआरों के कल्याण के लिए मदद मांगी, प्रधानमंत्री ने तुरंत ध्यान दिया। अब वह जमीन पर काम करेंगे।