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क्या विदेशी दबाव में मोदी सरकार झुक गई, वैनडाइक की रिहाई पर इतना हंगामा क्यों?

अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक की रिहाई की खूब चर्चा है। लोग इस कदम को भारत के नरम रुख और विदेशी ताकत के आगे झुकने के तौर पर देख रहे हैं। सरकार की आलोचना भी हो रही है। मगर क्यों... समझते हैं।

Matthew Aaron VanDyke

अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक की रिहाई पर हंगामा। (Photo Credit: Social Media)

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अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को दिल्ली की तिहाड़ जेल से रिहा करने और वापस उनके देश भेजने पर सियासी तूफान मचा हुआ है। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस समेत तमाम विश्लेषकों ने न केवल कदम की आलोचना की, बल्कि केंद्र सरकार को भी कटघरे में खड़ा किया। 

 

पिछले एक महीने में वैनडाइक मामले में घटनाक्रम जितनी तेजी से बदला उसके बाद अमेरिकी दबाव की बात भी होने लगी। हैरानी इस बात पर भी हुई जब वैनडाइक को लेने विदेशी दूतावास की कार तिहाड़ जेल के बाहर पहुंची। लोगों का कहना है कि इस घटनाक्रम से पता चलता है कि वैनडाइक अमेरिका के लिए कितना बड़ा एसेट था।

 

यह भी पढ़ें: इथियोपिया में छिड़ी जंग की वजह क्या, कैसे यह क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकती है?

 

वैनडाइक और उसके छह यूक्रेनी साथियों को दिल्ली की राउज एवेन्यू की स्पेशल एनआई अदालत ने एक महीने का समय दिया है, ताकि वे यूक्रेन और अमेरिका में अपने परिवार से मिल सके। सभी को डिफॉल्ट जमानत मिली है। कुछ शर्तों और औपचारिकताओं का पालन करना होगा। जरूरत पड़ने पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश होना होगा।

 

मगर अब सवाल यह उठता है कि क्या एक महीने बाद वैनडाइक और उसके साथी भारत लौटेंगे। अधिकांश लोगों का मानना है कि यह लोग अब कभी भारत नहीं आने आएंगे। इन्हें शायद आखिरी बार भारत में देखा गया है। वैनडाइक शुक्रवार को ही अमेरिका रवाना हो चुका है, लेकिन उससे 21 अक्टूबर को भारत लौटने की टिकट बुक कराई है। देखना यह है होगा कि वैनडाइक वापस भारत आता है या नहीं। 

क्या अमेरिका के आगे झुका भारत, अपने नरम रुख का प्रदर्शन किया?

वैनडाइक प्रकरण में रणनीतिक विचारक और लेखक डॉ. ब्रह्मा चेलानी ने दबाव में भारत के पीछे हटने की तरीके पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि शक्तिशाली विदेशी हितों के मामले में भारत अक्सर जवाबदेही तय करने में विफल रहता है। उन्होंने भारत के नरम रुख अपनाने की भी आलोचना की। 

 

 

 

'दबाव बढ़ने पर भारत पीछे हट जाता है'

ब्रह्मा चेलानी लिखते हैं, 'भारत एक चिरस्थायी नरमपंथी राज्य है। अमेरिकी गुप्त एजेंट मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनी ड्रोन विशेषज्ञों को चुपचाप भारत छोड़ने की अनुमति देने का निर्णय महज एक अलग-थलग कानूनी उलटफेर नहीं है। यह एक लंबी और असहज परंपरा का हिस्सा है, जिसमें नई दिल्ली अपने कठोर आपराधिक कानूनों का हवाला देती है और फिर भू-राजनीतिक दबाव बढ़ने पर पीछे हट जाती है।'

मार्को रूबियो ने नई दिल्ली के सामने उठाया था मुद्दा: ब्रह्मा चेलानी

ब्रह्मा चेलानी का कहना है कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत के सामने वैनडाइक का मुद्दा उठाया था। इसके बाद ही उसके खिलाफ UAPA हटाया गया। ब्रह्मा चेलानी आगे लिखते हैं, मध्य पूर्व और यूक्रेन में गुप्त युद्धों के अनुभवी वैनडाइक को मार्च में छह सैन्य-प्रशिक्षित यूक्रेनी सहयोगियों के साथ गिरफ्तार किया गया था। भारतीय अदालती दस्तावेजों के अनुसार, यह समूह एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा था जो भारत में ड्रोन की तस्करी करता था और फिर उन्हें म्यांमार भेजता था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने शुरू में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम का हवाला दिया। फिर नाटकीय रूप से पीछे हटने का दौर आया।' 

 

 

 

 

उन्होंने आगे लिखा, 'अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा व्यक्तिगत रूप से नई दिल्ली के समक्ष वैनडाइक की हिरासत का मुद्दा उठाने के बाद एनआईए ने यूएपीए के आरोप वापस ले लिए। वैनडाइक और सभी छह यूक्रेनियन अब जमानत पर रिहा हो गए हैं और उन्हें घर लौटने की अनुमति दे दी गई है।'

वैनडाइक प्रकरण में कई घटनाओं का जिक्र

ब्रह्मा चेलानी ने सरकार के नरम रुख की आलोचना की। उन्होंने कहा, 'यह घटना एक परिचित पैटर्न की याद दिलाती है। भोपाल गैस कांड और पुरुलिया हथियार कांड से लेकर एनरिका लेक्सी इतालवी मरीन मामले और बोफोर्स कांड में ओटावियो क्वाट्रोची के भाग जाने तक भारत ने बार-बार विदेशी नागरिकों या संस्थाओं के खिलाफ उच्च-स्तरीय आपराधिक कार्यवाही को कूटनीतिक या रणनीतिक दबाव के तहत कमजोर पड़ते, बंद होते या महत्वहीन होते देखा है। अलग-अलग मामले, अलग-अलग भारतीय सरकारें, लेकिन सवाल वही बना हुआ है: भारत इतना नरम देश क्यों है कि शक्तिशाली विदेशी हितों के शामिल होने पर वह अक्सर जवाबदेही लागू करने में विफल रहता है?'

8 से 24 सितंबर तक कैसे बदला घटनाक्रम?

वैनडाइक को कोलकाता हवाई अड्डे पर यूएपीए की धारा 18 के तहत गिरफ्तार किया गया था, जो आतंकवादी कृत्य को अंजाम देने की साजिश, वकालत, सहायता या उकसाने से संबंधित है। छह यूक्रेनी नागरिक, हुरबा पेट्रो, तारास स्लिवियाक, इवान सुकमानोव्स्की, मारियन स्टेफनकीव, मैक्सिम होनचारुक और विक्टर कामिंस्की को उसी दिन दिल्ली और लखनऊ हवाई अड्डों पर गिरफ्तार किया गया था।

 

अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को NIA ने 13 मार्च को कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किय था। इसी दिन दिल्ली और लखनऊ एयरपोर्ट से उसके छह यूक्रेनी साथियों को भी दबोचा गया था। तब इनकी गिरफ्तारी यूएपीए की धारा 18 के तहत की गई। इन पर आतंकवादी कृत्य को अंजाम देने की साजिश रचने का आरोप लगाया। 

 

8 सितंबर को एनआईए ने अदालत ने आरोपपत्र दाखिल किया। आरोपपत्र में यूएपीए की धारा को हटा दिया गया। उसकी जगह आव्रजन और विदेशी अधिनियम के तहत चार्जशीट दाखिल की गई। विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय सभी पर साढ़े पांच लाख रुपये का जुर्माना लागया। 18 सितंबर को राउज एवेन्यू की स्पेशल एनआईए अदालत से वैनडाइक और उसके साथियों को डिफॉल्ट जमानत दे दी। 24 सितंबर को उसे दिल्ली की तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया।  

इन यूक्रेनी नागरिकों को मिली राहत

  • हुरबा पेट्रो 
  • तारास स्लिवियाक 
  • इवान सुकमानोव्स्की
  • मारियन स्टेफनकीव 
  • मैक्सिम होनचारुक 
  • विक्टर कामिंस्की 

वैनडाइक म्यांमार कनेक्शन क्या है?

वैनडाइक और उनके साथियों पर टूरिस्ट वीजा पर भारत में आने के बाद बिना परमिट के मिजोरम जाने और वहां से म्यांमार में दाखिल होने का आरोप है। यहां इन्ही सातों लोगों ने चिन स्टेट में स्थित चिन नेशनल आर्मी के मुख्यालय कैंप विक्टोरिया में विद्रोहियों को ट्रेनिंग दी। ड्रोन उड़ाने, ड्रोन वारफेयर, जैमिंग तकनीक की जानकारी भी उपलब्ध कराई। चिन आर्मी म्यांमार की राष्ट्रीय सेना के खिलाफ जंग लड़ रही है। ट्रेनिंग देने के बाद यह सभी लोग दोबारा भारत के रास्ते भागने की फिराक में थे। मगर एयरपोर्ट पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।

वैनडाइक के नाम पर इतना हंगामा क्यों?

सोशल मीडिया और मेनस्ट्रीम मीडिया के अलावा तमाम विश्लेषकों के बीच सबसे अधिक चर्चा सिर्फ वैनडाइक के नाम पर है। अलग-अलग संघर्ष में वैनडाइक की भूमिका ने लोगों को उसकी रिहाई पर सोचने पर मजबूर कर दिया।

 

मैथ्यू वैनडाइक का दुनियाभर के कई संघर्षों से नाता रहा है। वह पूर्व पत्रकार और डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर है। वह पहली बार साल 2011 में तब चर्चा में आया था जब लीबिया में गद्दाफी की सत्ता के खिलाफ विद्रोह का हिस्सा बना। गद्दाफी की सेना ने उसे पकड़ लिया था। कई महीनों की कैद के बाद छोड़ा गया था। उसने संस ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल की स्थापना की है। यह संगठन दुनियाभर में विद्रोही समूहों को हथियार, ट्रेंनिग और परामर्श देता है। वैनडाइक 2009 में इराक में और 2010 में अफगानिस्तान में अमेरिका सेना के साथ तैनात एक युद्ध संवाददाता था।

 

यह भी पढ़ें: ईरान पर भड़का कोलंबिया, राजनयिक संबंध तोड़े; क्या इजरायल है वजह?

 

 

2007 से 2009 तक अरब देशों में अकेले बाइक से यात्रा की। 2010 में हिंसा वाले क्षेत्रों में बाइक यात्रा की। 2011 में लीबिया युद्ध में लड़ाका और युद्धबंदी बना। अरब स्प्रिंग, लीबियाई गृहयुद्ध, सीरियाई गृहयुद्ध, उत्तरी अफ्रीका, मध्य पूर्व, ईरान और अफगानिस्तान में बेहद सक्रिय रहा। इंटरनेट की दुनिया में वैनडाइक की पहचान विद्रोह भड़काने और तख्तापलट करवाने वाले भाड़े के सैनिक के तौर पर होती है।

जब भारत ने एंडरसन को जाने दिया

साल 1984 में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भीषण गैस त्रासदी हुई। लगभग 15 हजार लोगों की जान गई। हादसे के चार दिन बाद यानी 7 दिसंबर को हादसे की जिम्मेदार कंपनी यूनियन कार्बाइड के चेयरमैन वॉरेन एंडरसन को जमानत पर भारत से निकाल दिया गया था।  

 

खास बात यह है कि हजारों मौत के आरोपी को सरकारी विमान में भोपाल से दिल्ली भेजा गया था। इसका खुलासा उस वक्त भोपाल कलेक्टर रहे मोती सिंह ने बाद में किया था। एंडरसन ने कोर्ट और पुलिस के बुलाने पर भारत आने का वादा किया था। मगर आज तक वह दोबारा भारत नहीं आया। 2014 में उसने अमेरिकी में ही अपनी आखिरी सांस ली।

इतालवी मरीन केस

15 फरवरी 2012 को केरल तट के पास इटली का तेल टैंकर एनरिका लेक्सी पहुंचा। इसमें सवार दो इतालवी मरीन ने एक भारतीय नाव पर फायरिंग कर दी। इसमें दो मछुआरों की जान गई। भारत ने इतालवी मरीन मासिमिलियानो लातोरे और सल्वातोरे गिरोने को गिरफ्तार किया। उनके खिलाफ केस चलाया। 2012 में ही दोनों को अस्थायी रूप से इटली जाने की अनुमति मिल गई थी।

 

बाद में यह मामला स्थायी मध्यस्थता न्यायालय पहुंचा। अंतरराष्ट्रीय पंचाट ने भारत की कार्रवाई को गलत बताया। लेकिन इटली को 10 करोड़ रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। मुआवजा स्वीकार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में यह केस खत्म कर दिया।


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