इथियोपिया में छिड़ी जंग की वजह क्या, कैसे यह क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकती है?
इथियोपिया में एक नई जंग शुरू हो गई है। गृहयुद्ध से ज्यादा इसके क्षेत्रीय संघर्ष में बदलने की आशंका जताई जा रही है। क्या जंग के पीछे एक जातीय समूह से बढ़कर लाल सागर बड़ी वजह है।

इथियोपिया में छिड़ी नई जंग। (Photo Credit: Social Media)
लाल सागर के तट से जुड़े हॉर्न ऑफ अफ्रीका में हिंसा और संघर्ष की आग थमती नहीं दिख रही है। सूडान, सोमालिया और दक्षिणी सूडान के बाद इथियोपियो में नई जंग शुरू हो चुकी है। अब खतरा इसके पड़ोसी देश इरिट्रिया तक पहुंचने का है। अगर जंग इरिट्रिया तक पहुंची तो लाल सागर में हूती विद्रोहियों के बाद एक नया मोर्चा खुल सकता है। इसका दुनियाभर में पड़ सकता है। विद्रोही गुटों ने इथियोपिया के तीन एयरपोर्ट पर कब्जा कर लिया है। जंग की आग अब तिग्रे से आगे बढ़कर अन्य क्षेत्रों में फैल गई। समझते हैं कि इथियोपियो में नई जंग की वजह क्या है, इसका केंद्र क्या है? इरिट्रिया और लाल सागर का इससे क्या कनेक्शन है?
क्यों भड़की नई जंग?
इथियोपिया अलग-अलग जातीय समूह में बंटा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में कई गुटों का शासन और उनकी खुद की आर्मी है। विपक्षी संगठनों का आरोप है कि सरकार 2022 के शांति समझौते को ठीक से लागू नहीं कर रही है। लड़ाई की एक वजह यह है कि पश्चिमी तिग्रे पर अमहारा मिलिशिया का कब्जा हो गया है। इस कारण लाखों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा। टीपीएलएफ के नेता लोगों की घर वापसी और अपना क्षेत्र वापस हासिल करना चाहते हैं।
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टीपीएलएफ ने क्यों बनाया गठबंधन?
इसी महीने टीपीएलएफ ने अबी अहमद की सरकार के खिलाफ इथियोपियाई पीपुल्स फोर्सेज अलायंस फॉर सर्वाइवल नाम का एक गठबंधन बनाया। इसका उद्देश्य अबी अहमद की सरकार को उखाड़ फेंकना है। सरकार के खिलाफ इतनी नाराजगी है कि कई विरोधी संगठन भी एक ही गठबंधन के तले आ चुके हैं। 2020 की जंग में अमहारा फानो नेशनल मूवमेंट ने इथियोपिया की सरकार का साथ दिया था। अबकी यह संगठन खिलाफ है। इसी तरह ओरोमो लिबरेशन आर्मी ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। यह संगठन मध्य इथियोपिया में सक्रिय है। उधर, इथियोपियो की सरकार का आरोप है कि पड़ोसी देश इरिट्रिया विद्रोही गठबंधन का समर्थन और वित्तपोषित कर रहा है।
कहां है संघर्ष का केंद्र?
अभी जंग का केंद्र तिग्रे क्षेत्र है। यहां टीपीएलएफ की सरकार है। मौजूदा संघर्ष तिग्रे क्षेत्र की सेनाओं और इथियोपिया की संघीय सेना के बीच चल रही है। यह इलाका इथियोपिया के उत्तर में है। तिग्रे की सीमा इरिट्रिया और सूडान से लगती है। 2024 से ही इथियोपिया में जंग के हालात बनने लगे थे। अमहारा में फानो नेशनल मूवमेंट ने पहली बार राजधानी बहिर दार पर हमला किया था। ओरोमिया में ओरोमो लिबरेशन आर्मी ने सरकार के खिलाफ जंग तेज की। हिंसा की आग इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा के करीब तक पहुंच गई थी।
अब ये दोनों ही संगठन टीपीएलएफ के साथ पीएम अबी मोहम्मद को हटाने चाहते हैं। गठबंधन में कुल 6 सशस्त्र समूह शामिल हैं। मौजूदा समय में जंग तिग्रे से बढ़कर पड़ोसी अमहारा और अफार क्षेत्र तक पहुंच चुकी है। कई कस्बों और शहरों में जंग जारी है। तिग्रे की सेना ने मेकेले, अक्सुम और शायर एयरपोर्ट पर कब्जा कर लिया है। जंग का दायरा बढ़ रहा है। अब तक लगभग साढ़े 7 लाख लोगों ने तिग्रे से पलायन किया। इथियोपिया का आरोप है कि इरिट्रिया विद्रोहियों को समर्थन दे रहा है। इससे जंग के क्षेत्रीय संघर्ष में तब्दील होने की आशंका है।
क्यों खौफ में है इरिट्रिया?
इरिट्रिया को आशंका है कि टीपीएलएफ के साथ संघर्ष को इथियोपिया बहाने के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है। तिग्रे की अस्थिरता का फायदा उठाकर उस पर हमला किया जा सकता है, ताकि मसाबा और असाब बंदरगाह तक इथियोपिया की पहुंच सुनिश्चित की जा सके। 2020 में टीपीएलएफ के खिलाफ जंग में इथियोपिया सरकार का साथ देने वाला इरिट्रिया मौजूदा घटनाक्रम से सतर्क है। 2023 से उसके रिश्ते भी इथियोपिया के साथ पहले जैसै नहीं रहे। अगर यह जंग लाल सागर तक पहुंचती है तो वैश्विक व्यापार पर सबसे बुरा असर पड़ेगा, क्योंकि बाब अल-मंडेब में हूती विद्रोहियों के कब्जे के कारण पहले से ही व्यापार ठप होने की आशंका जताई जा रही है।
लाल सागर का एंगल क्या है?
इथियोपिया एक लैंड लॉक्ड देश है। उसकी कोई सीमा समुद्र से नहीं लगती है। लाल सागर में पड़ोसी देश इरिट्रिया के मसावा और असाब नाम के दो पोर्ट है। इथियोपिया इन पोर्ट तक अपनी पहुंच बनाना चाहता है। 2023 में इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद ने लाल सागर तक देश की पहुंच बनाने से जुड़ा बयान दिया। इसी बयान के बाद इथियोपिया और इरिट्रिया के रिश्ते बिगड़ने लगे। अब अहमद ने कहा, '2030 तक इथोपिया की जनसंख्या 15 करोड़ हो जाएगी। इतनी बड़ी आबादी भौगोलिक कैद में नहीं रह सकती।' उनके इस बयान को इरिट्रिया ने अपने खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत के रूप में देखा।
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इथियोपिया किसी भी हाल में समुद्र तक अपनी पहुंच बनाना चाहता है। इसी उद्देश्य से उसने जनवरी 2024 में सोमालीलैंड के साथ एक समझौता किया। इसमें सोमालीलैंड अदन की खाड़ी तक इथियोपिया को पहुंच देता। बदले में उसे देश के तौर पर मान्यता मिलती। लेकिन इस कदम से सोमालिया भड़क उठा। उसने इथियोपिया को युद्ध की धमकी दी। बाद में तुर्की के दखल से दोनों देशों के रिश्ते सुधरे।
इथियोपिया में संघर्ष की पृष्ठभूमि क्या है?
1970 के दशक में इथियोपिया की सैन्य सरकार के खिलाफ विद्रोह भड़का। तभी तिग्रे पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट (TPLF) का गठन हुआ। 1991 से 2018 तक टीपीएलएफ ने गठबंधन में इथियोपिया में शासन किया। 2018 में सत्ता जाने के बाद टीपीएलएफ की सियासी पकड़ कमजोर पड़ने लगी। उस वक्त टीपीएलएफ सरकार के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन भड़का। 2018 में ही इथियोपिया को ओरोमो समुदाय से आने वाला पहला प्रधानमंत्री अबी अहमद के रूप में मिला।
अबी अहमद ने 2019 में प्रॉस्पेरिटी पार्टी का गठन किया। इसका उद्देश्य इथियोपियो के विभिन्न क्षेत्रीय दलों को एकजुट करके एक झंडे तले लाना था। केंद्रीय सत्ता में टीपीएलएफ का प्रभाव धीरे-धीरे और भी कम होने लगा। 2020 में इथियोपिया में आम चुनाव होने थे, लेकिन कोविड-19 के कारण चुनाव को टाल दिया गया।
चुनाव में बार-बार हो रही देरी और अबी अहमद के कार्यकाल को मिले विस्तार ने टीपीएलएफ में नाराजगी पैदा कर दी। नतीजा यह हुआ कि टीपीएलएफ ने केंद्र सरकार के खिलाफ जाकर तिग्रे में चुनाव कराने का फैसला किया।
प्रधानमंत्री अबी अहमद ने तिग्रे की राजधानी मेकेले में स्थित एक केंद्रीय सैन्य कैंप पर हमले का आरोप टीपीएलएफ पर लगाया। अपने सैनिकों को तिग्रे की तरफ बढ़ने का आदेश दिया। यही से इथियोपियो में एक नई जंग की शुरुआत हुई। संघर्ष में 6 लाख लोगों की मौत हुई। 51 लाख लोगों को पलायन करना पड़ा। 2022 में टीपीएलएफ और इथियोपिया सरकार के बीच दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया में युद्धविराम समझौता हुआ।
पिछले संघर्ष में ओरोमिया की क्षेत्रीय सेना ओरोमो लिबरेशन आर्मी ने टीपीएलएफ का साथ दिया। दूसरी तरफ इथियोपिया सरकार को अमहारा और अफार के आतंकवादियों का समर्थन मिला। इरिट्रिया की सेना ने भी जंग में इथियोपिया का साथ दिया। इस बीच अबी अहमद ने 2021 में दूसरी और 2026 में तीसरी बार जीत हासिल की। विपक्षी संगठनों का आरोप था कि उनकी भूमिका सरकार में कम हो रही है। मौजूदा सरकार ओरोमा समुदाय को अधिक तवज्जो दे रही है। खासकर तिग्रे समुदाय में मौजूदा सरकार के प्रति भारी नाराजगी है।
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